महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के भूम शहर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की बड़ी कार्रवाई के बाद सामने आए कथित दूध मिलावट मामले की जांच तेज हो गई है. भूम शहर के इंदिरानगर स्थित मधुबन ट्रेडिंग कंपनी पर छापेमारी के दौरान 1525 किलो व्हे पाउडर और व्हे परमिट पाउडर का बड़ा भंडार जब्त किया गया. इस मामले में 7 लोगों के खिलाफ भूम पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है.
61 बोरियों में भरकर रखे गए थे व्हे पाउडर
यह मामला खाद्य सुरक्षा अधिकारी रोहित दिनेश फंदे की शिकायत पर दर्ज किया गया है. खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने 5 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 3:20 बजे मधुबन ट्रेडिंग कंपनी पर छापा मारा था. जांच के दौरान गोदाम से 6 अलग-अलग ब्रांड के व्हे पाउडर और व्हे परमिट पाउडर की 61 बोरियां, प्रत्येक 25 किलो वजन की बरामद हुईं. कुल जब्त माल का वजन 1,525 किलो है.
प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह माल अकलूज स्थित हेमंत कॉर्पोरेशन से खरीदा गया था. शिकायत के अनुसार इस पाउडर को दूध विक्रेताओं, दूध संग्रह केंद्रों और चिलिंग सेंटरों को आपूर्ति करने के उद्देश्य से रखा गया था. जब्त किए गए नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है.
मामले में 7 लोगों को किया गया गिरफ्तार
इस मामले में मधुबन ट्रेडिंग कंपनी के बालासाहेब मधुकर गोडगे, हेमंत कॉर्पोरेशन के हेमंत टेके, धर्मराज शिंदे, गजानन कांबळे, काकासाहेब डोंबाले व टेंभा और इट क्षेत्र के दूध संग्रह केंद्रों से जुड़े अन्य लोगों सहित कुल सात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. मामले की आगे की जांच पुलिस निरीक्षक गणेश कानगुडे के मार्गदर्शन में चल रही है.
जांच के दौरान प्रस्तुत खरीद बिलों की पड़ताल में सामने आया कि 1 जनवरी 2026 से अब तक लगभग 98 लाख रुपये का व्हे पाउडर खरीदा गया. वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 1.98 करोड़ रुपये और 2025-26 में लगभग 4.69 करोड़ रुपये के व्हे पाउडर की खरीद दर्ज है.
प्रारंभिक जांच में 2,000 से अधिक बिक्री लेन-देन सामने आए हैं. हालांकि इस पाउडर का वास्तविक उपयोग कहां और किस उद्देश्य से किया गया, इसकी जांच अभी जारी है. सातों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस दल रवाना किए गए हैं. साथ ही सप्लाई चेन और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है.
व्हे पाउडर क्या है?
दूध से पनीर, चीज़ बनाते समय जो तरल पदार्थ अलग होता है उसे व्हे (Whey) कहा जाता है. इसी तरल को सुखाकर तैयार की गई पाउडर को व्हे पाउडर कहते हैं. इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसका उपयोग बेकरी, होटल और कुछ खाद्य उत्पादों में कानूनी रूप से किया जा सकता है. हालांकि दूध या दुग्ध उत्पादों में इसकी मिलावट कर एसएनएफ (SNF) या प्रोटीन की मात्रा कृत्रिम रूप से बढ़ाने की अनुमति नहीं है. ऐसा करना खाद्य मिलावट की श्रेणी में आ सकता है.
दूध में मिलावट की आशंका
पुलिस द्वारा जब्त किए गए सेल रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर व्हे पाउडर की खरीद-फरोख्त सामने आई है. जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस पाउडर का उपयोग दूध में मिलावट के लिए किया गया हो सकता है. हालांकि इसकी पुष्टि प्रयोगशाला की रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही हो सकेगी.
आरोपी फरार, तलाश जारी
पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज होने के कई दिन बाद भी सभी आरोपी फरार हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीमें विभिन्न स्थानों पर छापामारी कर रही हैं. यदि जांच में दूध या दुग्ध उत्पादों में मिलावट साबित होती है, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आरोपियों पर भारी जुर्माना, लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई और मामले की गंभीरता के अनुसार कारावास की सजा भी हो सकती है. यदि मिलावटी खाद्य पदार्थों से किसी के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान या मृत्यु होना सिद्ध होता है, तो कानून में और भी कठोर दंड का प्रावधान है.
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है. प्रयोगशाला की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि जब्त किए गए व्हे पाउडर का वास्तविक उपयोग किस उद्देश्य से किया गया और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही.
(रिपोर्ट- गणेश सुभाष जाधव)