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अडानी का बचाव, उद्धव को फटकार और BJP संग जाने का विरोध... महाराष्ट्र संकट के बीच चर्चा में रहे शरद पवार के ये फैसले

शरद पवार के इस्तीफे की पेशकश पार्टी के कई नेताओं के लिए बड़ा झटका रहा. प्रफुल्ल पटेल और जयंत पाटिल समेत तमाम ऐसे नेता, जो पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे, सभी इस बात से बेखबर थे. अपने इस्तीफे की घोषणा करने के कुछ हफ्ते पहले तक शरद पवार विपक्षी दलों के मुद्दों पर अपने "अप्रत्याशित" रुख को लेकर सुर्खियों में थे.

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शरद पवार
शरद पवार

शरद पवार को यूं ही भारतीय राजनीति का मंझा हुए खिलाड़ी नहीं कहा जाता. उन्होंने पहले इस्तीफा देकर महाराष्ट्र की सियासत में खलबली मचा दी. फिर चंद घंटे बाद ही उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं की सम्मान करते हुए ये कह दिया कि दो चार दिन में विचार करके वो बताएंगे कि इस्तीफा वापस लेंगे या नहीं. कार्यकर्ता कह रहे हैं कि लोकसभा विधानसभा चुनाव तक पवार ही एनसीपी अध्यक्ष रहें. 

पवार की इस्तीफे के पेशकश पार्टी के कई नेताओं के लिए बड़ा झटका रहा. प्रफुल्ल पटेल और जयंत पाटिल समेत तमाम ऐसे नेता, जो पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे, सभी इस बात से बेखबर थे. लेकिन जिस तरह से पवार ने घोषणा की, ऐसा लगता है कि उन्होंने बहुत सोच-समझकर निर्णय लिया था. इस्तीफे की घोषणा के समय उनकी पत्नी मंच पर मौजूद थीं. 

उनका भाषण लिखा गया था और बेटी सुप्रिया व दामाद सदानंद सुले निश्चिंत थे और इस निर्णय से अवगत थे. पवार के इस्तीफे की घोषणा के कुछ दिन पहले, सुप्रिया सुले ने कहा कि अगले 15 दिनों के भीतर दिल्ली और महाराष्ट्र में भूकंप आएगा. सुप्रिया के बयान के 13वें दिन शरद पवार ने इस्तीफा दे दिया. वहीं अजीत पवार को भरोसे में लिया गया ताकि वह नाराज न हों और पवार अपने फैसले को आगे बढ़ा सकें.

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अपने इस्तीफे की घोषणा करने के कुछ हफ्ते पहले तक शरद पवार विपक्षी दलों के मुद्दों पर अपने "अप्रत्याशित" रुख को लेकर सुर्खियों में थे. इस दौरान उन्होंने उद्योगपति गौतम अडानी का समर्थन किया और हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर अडानी ग्रुप की संसदीय जांच के लिए विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया था. इसके बाद में दोनों अडानी से मुलाकात भी की.

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के तख्तापलट होने पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद शरद पवार ने उद्धव ठाकरे को फटकार लगाई थी. पवार ने उद्धव की उनके और उनके सहयोगियों से विचार-विमर्श किए बिना निर्णय लेने की आलोचना की. ये वो निर्णय था, जिससे राज्य में महा विकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी.

अपने विधायकों को एनसीपी संस्थापक ने अपनी पार्टी के उन विधायकों के खिलाफ भी खुला रुख अपनाया, जो भाजपा से हाथ मिलाने का दबाव बना रहे थे. तब उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह अपने लंबे समय से चले आ रहे 'दुश्मन' के साथ गठबंधन नहीं करना चाहते हैं.

'समिति की बैठक का निर्णय स्वीकार्य'

बुधवार को शरद पवार ने कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई. सूत्रों के मुताबिक बुधवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के बाद शरद पवार ने कहा कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद से हटने से पहले वरिष्ठ नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को भरोसे में लेना चाहिए था. उन्होंने कहा, “अगर मैंने इस फैसले के बारे में सबसे पूछा होता, तो स्वाभाविक रूप से सभी इसका विरोध करते. इसलिए, मैंने सीधे इसकी घोषणा करना चुना. शरद पवार ने 5 मई या 6 मई को एक समिति की बैठक बुलाई है. साथ ही गया है कि इस बैठक में समिति द्वारा लिया गया निर्णय स्वीकार्य होगा. 

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