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बदलापुर स्कूल में तोड़फोड़ मामले में सत्तारूढ़ NCP नेता की पत्नी पर केस दर्ज, एफआईआर में 1500 लोगों के नाम

बदलापुर स्कूल में दो लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न के विरोध में 20 अगस्त को शहर बंद के दौरान करीब 2000 लोगों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था. बाद में उनमें से कई लोग जबरन स्कूल में घुस गए और नर्सरी सेक्शन में तोड़फोड़ की थी. इस मामले में पुलिस ने एफआईआर में करीब 1200 से 1500 लोगों को आरोपी बनाया है.

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बदलापुर केस के खिलाफ प्रदर्शन की तस्वीर (Image: PTI)
बदलापुर केस के खिलाफ प्रदर्शन की तस्वीर (Image: PTI)

बदलापुर स्कूल में हिंसक प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में कई स्थानीय नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इनमें से एक नाम प्रियंका दामले का भी है. वह महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ पार्टी एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता आशीष दामले की पत्नी हैं. प्रियंका खुद भी एनसीपी से जुड़ी हैं और पार्टी के माध्यम से सामाजिक कार्यों में शामिल रहती हैं.

2000 हजार लोगों ने स्कूल के बाहर किया था प्रदर्शन

बता दें कि बदलापुर स्कूल में दो लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न के विरोध में 20 अगस्त को शहर बंद के दौरान करीब 2000 लोगों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था. बाद में उनमें से कई लोग जबरन स्कूल में घुस गए और नर्सरी सेक्शन में तोड़फोड़ की थी. 

इस मामले में पुलिस ने एफआईआर में करीब 1200 से 1500 लोगों को आरोपी बनाया है और अब तक 40 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई है. जबकि पुलिस के पास जिन 23 लोगों के नाम हैं, वे फरार बताए जा रहे हैं. इनमें से एक फरार आरोपी का नाम प्रियंका दामले है.

कौन हैं आशीष दामले?

आशीष दामले एनसीपी (अजित पवार) के प्रदेश महासचिव हैं और बदलापुर में अच्छी छवि वाले नेता के तौर पर जाने जाते हैं. दामले के मुताबिक उनकी पत्नी प्रदर्शन में शामिल नहीं थीं और उन्हें राजनीतिक कारणों से जबरन फंसाया गया है. 

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दामले ने कहा कि बंद से पहले उनकी पत्नी सिर्फ लड़कियों के लिए न्याय मांगने थाने गई थीं और किसी प्रदर्शन में शामिल नहीं थीं. पुलिस ने कहा कि उनके पास सभी आरोपियों के वीडियो और फोटो हैं और उसी आधार पर मामला दर्ज किया गया है.

विपक्ष ने किया था बंद का आह्वान

बदलापुर की घटना के विरोध में महाराष्ट्र में विपक्षी दलों (MVA) ने 24 अगस्त को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया था, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस बंद को असंवैधानिक बताया. लिहाजा विपक्षी दलों ने 'महाराष्ट्र बंद' वापस ले लिया है.

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