बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई के कुर्ला इलाके में हुए दर्दनाक बस हादसे के आरोपी BEST बस चालक संजय मोरे को जमानत दे दी है. दिसंबर 2024 में कुर्ला में हुई इस घटना में 9 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे. जस्टिस आरएम जोशी की बेंच ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि यह मामला गैर-इरादतन हत्या का नहीं, बल्कि लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाने का है.
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया यह साफ होता है कि BEST प्रशासन की बड़ी लापरवाही इस हादसे के पीछे रही. अदालत ने पाया कि BEST अंडरटेकिंग को ड्राइवरों को कम से कम 7 दिन की ट्रेनिंग देनी चाहिए थी, लेकिन संजय मोरे को केवल 3 दिन की ट्रेनिंग दी गई. इससे भी ज्यादा गंभीर बात यह रही कि इस ट्रेनिंग में कोई प्रैक्टिकल (फील्ड) ट्रेनिंग शामिल नहीं थी. कोर्ट ने इसे चौंकाने वाला बताया और कहा कि बिना पर्याप्त ट्रेनिंग के ड्राइवर को व्यस्त सड़कों पर बस चलाने देना प्रशासन की बड़ी चूक है.
संजय मोरे के पास बस चलाने का कई सालों का अनुभव था, लेकिन वह इलेक्ट्रिक बस चलाने में नया था. ऐसे में उसे पूरी ट्रेनिंग देना जरूरी था, जो नहीं दी गई. कोर्ट ने कहा कि ट्रेनिंग अवधि घटाने और फील्ड ट्रेनिंग न देने का फैसला ही इस दुखद घटना का एक बड़ा कारण बना.
अभियोजन पक्ष ने दलील दी थी कि अगर मोरे को इलेक्ट्रिक बस चलाने में आत्मविश्वास नहीं था, तो उसे बस चलाने से मना कर देना चाहिए था. हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि जब किसी व्यक्ति की नौकरी और परिवार की जिम्मेदारी दांव पर हो, तो वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश को ठुकराना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं होता.
कोर्ट ने यह भी माना कि इस मामले में आपराधिक मंशा का अभाव है, इसलिए यह अपराध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत नहीं आता. इसके बजाय यह धारा 106 (लापरवाही से मौत) के तहत आता है, जिसमें अधिकतम 5 साल की सजा का प्रावधान है.
इसके अलावा अदालत ने ट्रायल में हो रही देरी को भी जमानत का अहम आधार माना. कोर्ट ने कहा कि संजय मोरे करीब 1 साल 5 महीने से जेल में है, जबकि मामले में 96 गवाह हैं और 13 अक्टूबर 2025 को आरोप तय होने के बावजूद अब तक एक भी गवाह का बयान दर्ज नहीं किया गया है. ऐसे में ट्रायल जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है. इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने संजय मोरे को जमानत देने का फैसला किया.