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अंबरनाथ चुनाव में बड़ा खेल, व्हिप के खिलाफ जाकर अजित गुट ने BJP के विरोध में किया वोट, शिंदे गुट का किया सपोर्ट

अंबरनाथ नगर परिषद में हंगामे के बीच सदाशिव पाटिल उपाध्यक्ष चुने गए. NCP के 4 पार्षदों ने अपनी ही पार्टी का व्हिप तोड़कर शिवसेना (शिंदे) का साथ दिया. भाजपा ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए कोर्ट जाने की घोषणा की है.

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अंबरनाथ नगर परिषद के उपाध्यक्ष चुनाव पर BJP–शिवसेना आमने-सामने (Photo-ITG)
अंबरनाथ नगर परिषद के उपाध्यक्ष चुनाव पर BJP–शिवसेना आमने-सामने (Photo-ITG)

महाराष्ट्र के ठाणे जिले की अंबरनाथ म्युनिसिपल काउंसिल में वाइस प्रेसिडेंट पद के चुनाव ने शनिवार को सियासी पारा चरम पर पहुंचा दिया. सत्ता संतुलन, व्हिप, वैधता और सड़क से सदन तक के हंगामे ने इस चुनाव को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम बना दिया.

चुनाव से ठीक पहले नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) के चार कॉर्पोरेटरों को पार्टी के गुट नेता अभिजीत करंजुले ने सख्त व्हिप जारी किया. व्हिप में चेतावनी दी गई कि यदि किसी भी कॉर्पोरेटर ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर भाजपा उम्मीदवार के विरोध में मतदान किया, तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है.

इसके बावजूद शिवसेना (शिंदे गुट) ने एनसीपी के इन्हीं चार कॉर्पोरेटरों के समर्थन से बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए सदाशिव उर्फ ‘सदा मामा’ पाटिल को अंबरनाथ म्युनिसिपल काउंसिल का वाइस चेयरमैन चुन लिया. चुनाव प्रक्रिया सभी निर्वाचित कॉर्पोरेटरों की वोटिंग के जरिए पूरी की गई.

इस घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए. भाजपा नेताओं का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के खिलाफ हुई है और पार्टी इसे अदालत में चुनौती देगी.

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दरअसल, जिन चार एनसीपी कॉर्पोरेटरों ने शिंदे गुट का साथ दिया, वे पहले ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ का हिस्सा थे. यह अघाड़ी भाजपा (14), कांग्रेस (12), एनसीपी (4), एक निर्दलीय और मेयर सहित कुल 31 सदस्यों के समर्थन से बनी थी और जिला कलेक्टर कार्यालय में आधिकारिक रूप से पंजीकृत भी थी. ऐसे में अचानक इस फ्रंट से अलग होकर शिंदे गुट के साथ जाना अब कानूनी बहस का विषय बन गया है.

चारों पार्षदों की सदस्यता पर संकट

ग्रुप लीडर अभिजीत करंजुले ने साफ कहा है कि व्हिप उल्लंघन की स्थिति में चारों कॉर्पोरेटरों की सदस्यता रद्द की जा सकती है. वाइस प्रेसिडेंट पद के लिए नामांकन की समय-सीमा दोपहर 1 बजे तय थी, जबकि मतदान दोपहर 2:30 बजे शुरू हुआ. प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान केवल निर्वाचित पार्षदों को ही परिषद भवन में प्रवेश मिलेगा और नामांकित पार्षद मतदान नहीं कर सकेंगे.

चुनाव के दौरान म्युनिसिपल काउंसिल हॉल में भारी हंगामा देखने को मिला. सदाशिव पाटिल के खिलाफ नारेबाजी हुई, एक महिला द्वारा चप्पल उतारने की घटना के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया. भाजपा और शिवसेना कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए, हालात संभालने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा.

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जमकर हुई नारेबाजी

मतदान में शिवसेना महायुति विकास अघाड़ी को 32 वोट मिले, जबकि अंबरनाथ विकास अघाड़ी के खाते में 28 वोट आए. इसके साथ ही सदाशिव (सदा मामा) पाटिल को औपचारिक रूप से वाइस प्रेसिडेंट घोषित कर दिया गया.

नतीजों के बाद कांग्रेस समर्थकों ने हॉल में “चोर मामा, गद्दार मामा” जैसे नारे लगाए. वहीं, सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के ऑडिटोरियम पहुंचते ही भाजपा और शिवसेना कार्यकर्ताओं के बीच एक बार फिर तीखी नारेबाजी शुरू हो गई. अब पूरे राजनीतिक गलियारे की नजर इस सवाल पर टिकी है कि अंबरनाथ म्युनिसिपल काउंसिल का यह सत्ता समीकरण आगे कानूनी और राजनीतिक रूप से कौन सा मोड़ लेता है.

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