महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक दर्जा देने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तुरंत बाद महज चार दिनों में 75 अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र जारी किए गए. अल्पसंख्यक मामलों के इस विभाग उका प्रभार उस समय अजित पवार के पास था. हैरानी की बात यह है कि अगस्त 2025 से कोई प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ था, लेकिन 28 जनवरी के बाद अचानक मंजूरियों की बाढ़ आ गई.
29 जनवरी को Poddar International School के 25 स्कूलों को एक ही दिन अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया गया. इसी तरह St. Xavier's के पांच स्कूलों और स्वामी शांति प्रकाश व देवप्रकाश ट्रस्ट के चार स्कूलों को भी प्रमाणपत्र जारी हुए.
28 जनवरी को दोपहर 3:09 बजे श्री माता कन्या सेवा संस्थान को सर्टिफिकेट मिला और इसी दिन अजित पवार का निधन हुआ था. निधन के दिन भी सात संस्थाओं को मंजूरी दी गई. 1 फरवरी (रविवार) को कोई प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ, लेकिन 2 फरवरी को फिर मंजूरियां जारी रहीं. कुछ अनुमोदन शाम 6:45 और 6:58 बजे तक दर्ज किए गए.
अल्पसंख्यक दर्जा क्यों अहम?
अल्पसंख्यक संस्थान बनने पर स्कूलों को कई नियामकीय छूट मिलती है-
पूर्व मंत्री मणिकराव कोकटे के अनुसार, तकनीकी खामियों (खेल मैदान व खेल शिक्षक विवरण आदि) के कारण अक्टूबर से प्रक्रिया रोक दी गई थी. विभाग बाद में अजित पवार को सौंपा गया. कांग्रेस नेता अक्षय जैन ने आरोप लगाया कि जब राज्य शोक में था और मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की थी, तब मंत्रालय में फाइलें तेजी से निपटाई गईं.
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महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने कहा- यह बड़ा घोटाला
महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने दावा किया कि यह “और भी बड़ा घोटाला” हो सकता है. उन्होंने कहा कि "अजित पवार जी के निधन का कुछ लोगों ने गलत फायदा उठाया. उनके निधन वाले दिन और उसके अगले दिन 75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र दिए गए.राज्य में 95% अल्पसंख्यक स्कूल फर्जी और करप्शन में लिप्त हैं."
उन्होंने कहा, “मैंने इस संबंध में देवेंद्र फडणवीस जी से एसआईटी गठित करने का अनुरोध किया था. एसआईटी ने शिक्षा विभाग समेत 6000-7000 लोगों की संलिप्तता का खुलासा किया. लेकिन यह उससे भी बड़ा घोटाला है. हम इसकी जांच कराएंगे और मकोका के तहत कार्रवाई करेंगे. जब मैंने अजित पवार साहब से बात की थी, तो उन्होंने कहा था कि अच्छे स्कूलों को ही प्रमाणपत्र मिलेगा. इस मामले की जांच सीआईडी को करनी चाहिए.”
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