महाराष्ट्र में मुस्लिम आरक्षण खत्म किए जाने पर समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी और एआईएमआईएम के वरिष्ठ नेता इम्तियाज जलील ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं. उन्होंने इस फैसले को लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर तीखा हमला बोला है. अबू आजमी ने कहा कि अगर कांग्रेस चाहती, तो वह अपने कार्यकाल में मुस्लिम आरक्षण को कानून के रूप में लागू कर सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. उन्होंने कहा कि पहले जो अध्यादेश लाया गया था, वह बीजेपी सरकार के कार्यकाल में खत्म हो गया और उस दौरान सिर्फ मराठा आरक्षण को आगे बढ़ाया गया.
आजमी ने आरोप लगाया कि बीजेपी और कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों ही अपने-अपने वोट बैंक को साधने की राजनीति कर रही हैं. उन्होंने साफ किया कि मुस्लिम समाज धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं मांग रहा है, बल्कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए आरक्षण की मांग कर रहा है. सपा नेता अबू आजमी ने कहा कि कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि आज कई मुस्लिम समुदाय की स्थिति दलितों से भी बदतर है और जब तक ये तबका आगे नहीं बढ़ेगा, देश की प्रगति संभव नहीं है. उन्होंने दोहराया कि अल्पसंख्यकों के आरक्षण की लड़ाई जारी रहेगी.
बीजेपी नहीं चाहती मुस्लिम IAS-IPS बनें: जलील
वहीं, एआईएमआईएम नेता इम्तियाज जलील ने बीजेपी के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ताधारी दल नहीं चाहता कि मुस्लिम युवा आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनें. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चाहती है कि मुस्लिम युवक सिर्फ ऑटो चलाएं, गाड़ियां धोएं या छोटे-मोटे काम करें. जलील ने आरोप लगाया कि बीजेपी की यही सोच दलित समुदाय को लेकर भी रही है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा नौकरियों और शिक्षा में मुसलमानों को मिलने वाला पांच प्रतिशत आरक्षण रद्द किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए जलील ने कहा कि यह फैसला समुदाय को पीछे धकेलने वाला है.
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जकात का पैसा शिक्षा पर खर्च करें मुस्लिम: जलील
उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि रमजान के मौके पर जकात (इस्लाम के पांच बुनियादी स्तंभों में से एक अनिवार्य धार्मिक कर या दान) की राशि का इस्तेमाल शिक्षा पर किया जाए, न कि धार्मिक इमारतों के निर्माण पर. जलील ने कहा कि मुस्लिम समुदाय अब जागरूक है और अगर आरक्षण न भी मिले, तो वह शिक्षा और प्रतिस्पर्धा के जरिए आगे बढ़ेगा. उन्होंने सरकार की उस सोच की भी आलोचना की, जिसमें मदरसों को शक की नजर से देखा जाता है. इम्तियाज जलील के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय देश का अभिन्न अंग है, जिसे अलग-थलग नहीं किया जा सकता.
महाराष्ट्र सरकार ने खत्म किया 5% मुस्लिम आरक्षण
देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने नौकरियों और शिक्षा में पांच प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण को रद्द कर दिया है. इस संबंध में मंगलवार को सरकारी आदेश जारी किया गया. मुस्लिमों को पांच प्रतिशत आरक्षण से संबंधित पिछला अध्यादेश समाप्त हो चुका है और उस निर्णय पर अदालत का अंतरिम स्टे लगा हुआ है. पिछली कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने मराठों को 16 प्रतिशत और मुसलमानों को 5 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए एक अध्यादेश जारी किया था.