भारतीय सेना के एक ऑफिसर के दुनिया से जाने के बाद उनकी पत्नी ने मातृभूमि की सेवा का बीड़ा उठाया. इस बहादुर महिला ने खुद फौजी अफसर बनने का सपना देखा. फिर तमाम मुश्किलों को झेलने के बावजूद उसने इस सपने को पूरा कर दिखाया. अब ये महिला अक्टूबर में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी ज्वाइन करने वाली है.
ये कहानी है मध्य प्रदेश के सागर में रहने वाली निधि दुबे की. निधि ने चार बार एसएसबी परीक्षा में असफलता का मुंह देखने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी. आखिरकार उसने पांचवें और अंतिम प्रयास में परीक्षा को पास करके ही दम लिया.
पति की मौत के दो दिन बाद ही ससुराल वालों ने निकाला
निधि की शादी सेना के ऑफिसर मुकेश कुमार दुबे के साथ हुई थी. लेकिन शादी के एक साल बाद ही मुकेश का दिल के दौरे की वजह से निधन हो गया. पति को खोने का गम ही कम नहीं था कि निधि के ससुराल वालों ने भी उससे मुंह मोड़ लिया. निधि को पेट में मुकेश की निशानी के बावजूद ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया. ऐसा मुकेश की मौत के दो दिन बाद ही कर दिया गया.
माता-पिता, भाई चट्टान की तरह साथ रहे
लेकिन ऐसे में निधि को अपने माता-पिता और भाई का सहारा मिला. सागर में मायके आने के बाद एक वक्त तो निधि डिप्रेशन में चली गई. लेकिन घरवाले उसे हर कदम पर हौसला देते रहे. पति की मौत के पांच महीने बाद निधि ने बेटे को जन्म दिया. बेटे की सूरत को देखकर ही निधि ने फैसला किया कि वो उसे कभी पिता की कमी नहीं महसूस होने देगी.
कदम कदम पर रहा मुश्किलों का सामना
निधि खुद कुछ बनने के लिए बेटे सुयश को उसकी नानी के पास छोड़कर इंदौर चली आई. यहां निधि ने एचआर मैनेजमेंट में एमबीए करने के बाद डेढ़ साल तक एक कंपनी में जॉब भी किया. इंदौर में ही सेना के वरिष्ठ अफसरों से निधि को पता चला कि सैनिकों की विडोज की सेना में भर्ती के लिए योजना है. तब तक निधि को एसएसबी (सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड) परीक्षा का कुछ पता नहीं था. निधि को जब इसका पता चला तो उसने ठान ली कि वो भी सेना में जाकर पति की तरह ही मातृभूमि की सेवा करेगी. इसके अलावा निधि ने हैदराबाद में पति की बीमारी के वक्त ही देखा था कि कैसे उसकी रेजीमेंट के साथियों ने उसकी मदद की थी.
सपना पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत की
निधि ने इसके बाद सागर आकर एसएसबी की तैयारी शुरू कर दी. जिस महार रेजीमेंट में पति पोस्टेड थे, वहीं के ब्रिगेडियर रेड्डी और कर्नल एमपी सिंह ने निधि को परीक्षा के बारे में हर चीज समझाई. निधि ने आत्मनिर्भर रहने के लिए आर्मी स्कूल में टीचर का जॉब भी किया. इस दौरान निधि का रूटीन रहा- सुबह चार बजे उठकर सबसे पहले पांच किमी रनिंग करने जाना. फिर घर लौटकर बेटे को तैयार करना. इसके बाद बेटे को 20 किमी स्कूटी चलाकर स्कूल लेकर जाना. दोपहर तीन बजे बेटे के साथ ही निधि घर लौटती. फिर घर का काम निपटाने के बाद शाम पांच बजे जिम जाकर एक्सरसाइज करती. इसके बाद छह बजे लौटकर बेटे का होमवर्क कराना. रात नौ बजे बेटे को सुलाकर निधि खुद पढ़ाई में लग जाती थी.
पांचवीं बार में पास की परीक्षा
जून 2014 में एसएसबी के पहले प्रयास में निधि लास्ट राउंड तक पहुंची. तीसरे और चौथे प्रयास में कॉन्फ्रेंस राउंड तक पहुंची, लेकिन बाहर हो गई. मई 2016 में निधि के लिए एसएसबी का आखिरी मौका था. आखिर निधि की मेहनत रंग लाई और परीक्षा पास कर अपने सपने को हकीकत में बदलने में सफल रही. निधि की मेहनत और जज्बे को सलाम.