scorecardresearch
 

हर तरफ सन्नाटा, सबकी आंखें नम... चतरा एयर एंबुलेंस हादसे में कैसे उजड़ गया संजय का पूरा परिवार

झारखंड में 23 फरवरी की रात रेडबर्ड एयरवेज का एयर एम्बुलेंस रांची से उड़ान के कुछ मिनट बाद चतरा के कासियातू जंगल में क्रैश हो गया, जिसमें संजय कुमार समेत सात लोगों की मौत हो गई. खराब मौसम को शुरुआती कारण माना गया है. घटनास्थल दुर्गम जंगल में था, जहां हजारों ग्रामीण पहुंचे. मलबे से फ्यूल की गंध और विमान के हिस्से अलग-अलग मिले. मंत्री इरफान अंसारी से मिलकर परिजन फूट-फूट कर रो पड़े. AAIB हादसे की जांच कर रहा है.

Advertisement
X
संजय का परिवार उजड़ गया. Photo ITG
संजय का परिवार उजड़ गया. Photo ITG

झारखंड में 23 फरवरी की स्याह रात एक भीषण त्रासदी लेकर आई. तेज आंधी, तूफान, बारिश और बिजली की गर्जना के बीच जो हुआ, उसने सात परिवारों की दुनिया हमेशा के लिए बदल दी. उस रात रेडबर्ड एयरवेज का एक एयर एम्बुलेंस रांची से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के कासियातू जंगल में क्रैश हो गया. विमान में 41 वर्षीय 65 प्रतिशत बर्न पीड़ित संजय कुमार समेत कुल सात लोग सवार थे. इस हादसे ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया. चतरा में राज्य के मंत्री इरफान अंसारी ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि एयर एम्बुलेंस हादसे ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया है. मुलाकात के दौरान संजय के पिता मंत्री से लिपटकर फूट-फूट कर रो पड़े और बार-बार अपने बेटे को वापस लाने की गुहार लगाते रहे. वहीं संजय की मां बोलीं, 'मंत्री जी मेरा बेटा मुझे लौटा दीजिए', इससे वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया.

जानकारी के मुताबिक एयर एम्बुलेंस ने शाम 7 बजकर 11 मिनट पर रांची से उड़ान भरी थी. लेकिन कुछ ही मिनटों बाद विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और रडार से संपर्क टूट गया. इसके बाद देर रात खबर आई कि विमान चतरा के घने और दुर्गम जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. शुरुआती जांच में खराब मौसम को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है.

उस रात की पूरी कहानी
आजतक की टीम भी उस भयावह रात में घटनास्थल तक पहुंची. लगातार रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश और घना अंधेरा माहौल को और डरावना बना रहे थे. क्रैश साइट रांची से करीब 170 किलोमीटर दूर, पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित थी, जहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल था. मोटर योग्य सड़क भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं थी.

Advertisement

पैदल निकल पड़े ग्रामीण
टीम रांची से हजारीबाग, फिर करीब 50 किलोमीटर का सफर तय कर सिमरिया और वहां से करमाटांड़ होते हुए कच्ची सड़कों के जरिए पहाड़ी और जंगल क्षेत्र तक पहुंची. लेकिन आगे का रास्ता इतना दुर्गम था कि दो से तीन किलोमीटर पैदल चलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. राहत की बात यह रही कि पूरे रास्ते कच्ची सड़कों और पगडंडियों पर लोगों का हुजूम दिखाई दे रहा था. हजारों ग्रामीण बाइक और पैदल घटनास्थल की ओर बढ़ते जा रहे थे.

काफी मशक्कत के बाद टीम जब क्रैश साइट तक पहुंची तो वहां एक अजीब सन्नाटा पसरा हुआ था. हजारों लोगों की मौजूदगी के बावजूद माहौल श्मशान जैसा शांत था. पूरे इलाके में करीब एक किलोमीटर तक एविएशन फ्यूल की तेज गंध फैली हुई थी, जो नाक में साफ महसूस हो रही थी. इससे यह अंदाजा लगाया गया कि रडार से संपर्क टूटने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए फ्यूल डंप किया होगा, ताकि टक्कर के समय आग न लगे.

इंजन अलग गिरा मिला
घटनास्थल पर सबसे पहले विमान का इंजन अलग गिरा हुआ मिला. यह दृश्य ही इस बात का संकेत दे रहा था कि हादसा बेहद भीषण रहा होगा. थोड़ा आगे बढ़ने पर तराई की ओर विमान का एक विंग भी दिखाई दिया, जहां भी लोगों की भीड़ जुटी हुई थी. आश्चर्य की बात यह रही कि जहां मुख्य मलबा पड़ा था, वहां आग लगने के कोई स्पष्ट निशान नहीं मिले, जिससे फ्यूल डंपिंग की संभावना और मजबूत हुई.

Advertisement

कई घरों के चिराग बुझे
क्रैश साइट पर विमान के टूटे प्लास्टिक पार्ट्स, बिखरा विंडस्क्रीन और अन्य मलबा फैला हुआ था. सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर रखा था, ताकि कोई भी व्यक्ति मलबे से छेड़छाड़ न कर सके. दूसरी ओर, घटनास्थल से लेकर चतरा जिला मुख्यालय तक मृतकों के परिजनों का विलाप गूंज रहा था. कई परिवारों ने अपने घर के इकलौते बेटे खो दिए थे.

बताया गया कि विमान में सवार रांची के डॉ. विकास अपने परिवार के अकेले चिराग थे, जबकि पायलट विवेक विकास भगत भी अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे. डॉ. विकास के पिता बजरंगी प्रसाद ने रोते हुए बताया कि उन्होंने सब्जी बेचकर अपने बेटे को डॉक्टर बनाया था, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया. यह सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं.

हादसे के चश्मदीदों ने क्या देखा?
स्थानीय ग्रामीणों के बीच हादसे को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी सुनने को मिलीं. कोई कह रहा था कि उसने आसमान से नीचे गिरते विमान की लाल ब्लिंकर लाइट देखी, तो किसी ने जोरदार विस्फोट जैसी आवाज सुनने का दावा किया, जो करीब 10 किलोमीटर दूर सिमरिया थाने तक सुनाई दी थी. कुछ समय के लिए पुलिस को नक्सली साजिश की आशंका भी हुई, लेकिन बाद में यह संभावना कमजोर पड़ गई.

Advertisement

गांव के मुखिया ने बताया कि रात में मोबाइल टॉर्च की रोशनी में युवाओं की टीम जब जंगल में पहुंची तो फ्यूल की गंध का पीछा करते हुए उन्हें पहले इंजन और फिर विमान के अन्य हिस्से मिले. इसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई और राहत-बचाव कार्य शुरू हुआ.

इस बीच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है. शुरुआती रिपोर्ट में खराब मौसम को हादसे का प्रमुख कारण माना गया है, हालांकि विस्तृत जांच अभी जारी है. मलबे से यात्रियों के बैग और सामान भी बरामद किए गए. एक झोले में संभवतः संजय कुमार के परिजनों द्वारा रखा गया चावल मिला, जिसे देखकर मौके पर मौजूद लोगों का कलेजा मुंह को आ गया.

जैसे-जैसे शाम ढलती गई, दिन भर घटनास्थल पर उमड़ी भीड़ धीरे-धीरे लौटने लगी. लेकिन उस जंगल में पसरी तबाही की तस्वीर और सात परिवारों का उजड़ा भविष्य हर किसी के मन पर गहरा असर छोड़ गया. जांच जारी है, लेकिन यह हादसा लंबे समय तक लोगों की यादों में दर्द बनकर दर्ज रहेगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement