जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने केंद्र शासित प्रदेश में सूचना के अधिकार (RTI) आवेदनों के निपटारे में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है. हाई कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को इन अपीलों और शिकायतों के जल्द निपटारे के लिए उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.
अदालत ने निर्देश दिया है कि आयोग अपीलों को गलत तरीके से बहुत लंबे समय तक लटकाकर नहीं रख सकता है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार और जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी की डिविजनल बेंच ने पिछले सप्ताह एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए ये आदेश जारी किया.
याचिकाकर्ता ने मांग की थी केंद्रीय सूचना आयोग के लिए दूसरी अपीलों और शिकायतों के निपटारे की 45 दिनों की समय-सीमा तय की जाए. लेकिन अदालत ने कहा कि वो ऐसा नहीं कर सकती.
RTI कानून में समय-सीमा तय नहीं
हाई कोर्ट ने बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आयोग के लिए दूसरी अपीलों और शिकायतों का फैसला करने के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है. इसके बावजूद, बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा, 'इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि केंद्रीय सूचना आयोग अपीलों को बहुत लंबे समय तक दबाकर बैठा रहे और उन्हें सालों-साल अनसुलझा छोड़ दे.'
अदालत ने CIC को निर्देश दिया है कि वो इस मामले की समीक्षा करे. आयोग अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर की सीमाओं और आने वाली अपीलों की संख्या को ध्यान में रखते हुए अपने कामकाज में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाए.
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याचिकाकर्ता के सुझावों पर विचार करने की सलाह
ये जनहित याचिका जुनैद जावेद ने अधिवक्ता नावेद बुख्तियार के जरिए दायर की थी. याचिका में जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश से जुड़ी अपीलों के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए कुछ सुझाव रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति मांगी गई थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया.
हाई कोर्ट की डिविजनल बेंच ने CIC को सलाह दी कि वो याचिकाकर्ता के दिए गए सुझावों पर भी अच्छी तरह से विचार करे. अगर ये सुझाव सही और काम के पाए जाते हैं, तो आयोग अपने कामकाज को बेहतर बनाने के लिए इनका इस्तेमाल कर सकता है.