कांग्रेस ने पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों द्वारा जम्मू-कश्मीर में चुनाव के लिए अनुकूल माहौल बनाने संबंधी के बयान की कड़ी आलोचना की. कांग्रेस ने बीजेपी से उनके सहयोगी के इस रुख पर सफाई भी मांगी. उधर बीजेपी ने भी के बयान से पल्ला झाड़ लिया है.
राज्यसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, 'यह बिल्कुल असत्य है कि पाकिस्तान या आतंकवादी संगठनों ने अनुकूल माहौल बनाया. नई सरकार 6-8 सरंपचों की हत्या और उरी में एक सैन्य शिविर पर आत्मघाती हमले को कैसे भूल सकती है, जहां सैन्य अधिकारियों ने अपनी जान गंवाई थी.' उन्होंने कहा, 'दरअसल पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों ने राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अस्थिर करने की हर संभव कोशिश की.'
आजाद ने नई गठबंधन सरकार को गलत दिशा में श्रेय देने से बाज आने की अपील करते हुए कहा, 'पहला श्रेय, जम्मू-कश्मीर के लोगों को जाता है, दूसरा हमारे सैन्य बलों को जिन्होंने सीमा पर दिन-रात कड़ी चौकसी रखी और तीसरा चुनाव आयोग को व सबसे अधिक भारतीय लोकतंत्र को.' जब उनसे पूछा गया कि वह सईद के बयान को किस तरह लेते हैं, उन्होंने कहा, 'मुझे कोई सफाई नहीं देनी' यह बीजेपी है जिसे सफाई देनी है.' सईद ने कहा था कि हमें हुर्रियत और आतंकवादी संगठनों एवं पाकिस्तान को शांतिपूर्ण मतदान का श्रेय देना चाहिए.
उधर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने भी बीजेपी से सफाई मांगी है. उन्होंने बीजेपी से विधानसभा चुनावों में सुरक्षा बलों व चुनाव आयोग की भूमिका को स्पष्ट करने को कहा है.
"Pakistan, Huriyaat & Militants ALLOWED peaceful conduct of elections" says Mufti Syed. I guess we should be grateful for their generosity.
— Omar Abdullah (@abdullah_omar)
Dear please explain roll of security forces & polling staff considering your CM just said "Pakistan allowed elections in J&K".
— Omar Abdullah (@abdullah_omar)
शांतिपूर्ण चुनाव संविधान में यकीन करने वालों की वजह से
जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव के लिए सीमापार के लोगों और अलगाववादियों को श्रेय देने संबंधी मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के बयान से उपजे विवाद में पड़ने से बचते हुए बीजेपी ने रविवार को कहा कि विधानसभा चुनाव, चुनाव आयोग, भारतीय सेना और भारतीय संविधान में विश्वास रखने वालों की कोशिश की वजह से सफल रहे.
बीजेपी सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा, 'जम्मू कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव भारतीय संविधान में यकीन रखने वालों के अलावा चुनाव आयोग एवं राज्य पुलिस समेत सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से हो पाए.' शर्मा ने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोग शांति और विकास चाहते हैं तथा वे राज्य को तरक्की की राह पर बढ़ते देखना चाहते हैं. नई पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार न्यूनतम साझा कार्यक्रम का पालन करेगी और सुशासन के माध्यम से इन आकांक्षाओं को पूरा करेगी. राज्य को विकास के पथ पर ले जाने की कोशिश करने के साथ ही नई सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि जम्मू-कश्मीर को राष्ट्रीय मुख्यधारा में लाया जाए.
मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद सईद ने कहा था कि राज्य में विधानसभा चुनाव के वास्ते अनुकूल माहौल बनाने के लिए सीमापार के लोगों (पाकिस्तान की ओर इशारा), हुर्रियत और आतंकवादी संगठनों को श्रेय दिया जाना चाहिए.