नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की कस्टडी में BSF जवान जसविंदर सिंह की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मृतक के परिवार ने प्रताड़ना का आरोप लगाया है. विरोध प्रदर्शन, जांच की मांग और एजेंसियों के अलग-अलग दावों के बीच मामला अब संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है.
मृतक जवान जसविंदर सिंह सीमा सुरक्षा बल की 42वीं बटालियन में त्रिपुरा में तैनात थे. वो छुट्टी पर जम्मू स्थित अपने घर आए हुए थे. इसी बीच 3 मार्च को NCB की जम्मू यूनिट ने उन्हें उठा लिया. इसके 9 दिन के बाद 12 मार्च को उनको औपचारिक रूप से गिरफ्तार दिखाया गया.
ये मामला ट्रामाडोल की व्यावसायिक मात्रा की बरामदगी से जुड़ा बताया गया. जसविंदर की कस्टडी को समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा. इस पूरे केस में उनके भाई पुपिंदर सिंह का नाम भी सामने आया, जिसे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था. वो NDPS एक्ट के तहत 6 मामलों में शामिल बताया गया.
इस बीच जसविंदर सिंह की मौत ने पूरे मामले को उलझा दिया है. परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि कस्टडी के दौरान उन्हें प्रताड़ित किया गया, जिसकी वजह से उनकी मौत हुई. परिवार ने CBI या न्यायिक जांच की मांग की है. पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने भी पारदर्शी जांच की मांग की है.
अमन अरोड़ा ने कहा कि कस्टडी में होने वाली मौतों में जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है. यदि एजेंसियां निष्पक्ष जांच नहीं कर पातीं, तो पीड़ित परिवार को न्याय मिलने पर सवाल उठते हैं. इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं. आरोप है कि जसविंदर को स्थानीय पुलिस को जानकारी दिए बिना उठाया गया.
परिजनों ने यह भी दावा किया कि उनके शरीर पर चोट के निशान थे, जो हिरासत में प्रताड़ना की ओर इशारा करते हैं. एक वीडियो के सामने आने के बाद ये आरोप और तेज हो गए हैं. हालांकि, NCB ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह मौत स्वाभाविक थी. 19 मार्च को जसविंदर ने सीने में दर्द की शिकायत की थी.
एजेंसी के मुताबिक, शिकायत के बाद उन्हें अमृतसर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां उन्हें दो बार दिल का दौरा पड़ा. 20 मार्च की सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. इसके बाद उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए अमृतसर सिविल अस्पताल ले जाया गया. BSF ने भी घटना को लेकर चिंता जताई है.
BSF के कुछ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह मामला बेहद परेशान करने वाला है. एक अधिकारी ने सवाल उठाया कि 30 साल से अधिक उम्र का एक फिट व्यक्ति ऐसे हालात में कैसे मर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि शरीर पर दिख रही चोटें प्रताड़ना की आशंका को बल देती हैं.
हालांकि, BSF के प्रवक्ता ने आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ अधिकारियों ने NCB के सामने अपनी चिंता जताई है. NCB ने अपने बयान में कहा है कि पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक अपनाई गई.
जांच एजेंसी ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. फिलहाल इस मामले में कई स्तरों पर जांच चल रही है. न्यायिक जांच, मजिस्ट्रेट जांच और पोस्टमार्टम प्रक्रिया जारी है. वहीं अमृतसर पुलिस ने भी पुष्टि की है कि न्यायिक जांच शुरू हो चुकी है. अब सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के नतीजों पर टिकी है.