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J&K: 1990 हमले में चार जवान हुए थे शहीद, चश्मदीद ने कोर्ट में यासीन मलिक की पहचान की

जम्मू-कश्मीर में 25 जनवरी 1990 को आईएएफ कर्मियों पर हुए आतंकी हमले के मामले में एक नए चश्मदीद गवाह ने यासीन मलिक और मोहम्मद रफीक पहलू उर्फ नानाजी को आरोपी के रूप में पहचाना है. यह पहचान जम्मू के टाडा कोर्ट में हुई, जहां दोनों को हमले में शामिल शूटर बताया गया.

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रीनगर के रावलपोरा हमले केस में नए गवाह का बयान आया सामने (Photo: ITG)
रीनगर के रावलपोरा हमले केस में नए गवाह का बयान आया सामने (Photo: ITG)

जम्मू-कश्मीर में 25 जनवरी 1990 को हुए आतंकी हमले के मामले में एक और चश्मदीद गवाह ने शनिवार को यासीन मलिक और मोहम्मद रफीक पहलू उर्फ नानाजी की पहचान की है. यह पहचान जम्मू स्थित टाडा कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान हुई, जहां दोनों आरोपियों को हमले में शामिल शूटर के रूप में पहचान किया.

इससे पहले 31 जनवरी को भी एक अन्य गवाह ने यासीन मलिक के करीबी सहयोगी शौकत बख्शी को शूटर के रूप में पहचान की थी. जनवरी 2024 में पूर्व आईएएफ कॉरपोरल राजवार उमेश्वर सिंह, जो इस हमले में जीवित बचे थे, ने भी यासीन मलिक को मुख्य शूटर बताया था.

यह हमला श्रीनगर के बाहरी इलाके रावलपोरा में हुआ था, जब आईएएफ के जवान पुराने श्रीनगर एयरफील्ड पहुंचने के लिए अपने पिकअप वाहन का इंतजार कर रहे थे. इसी दौरान आतंकियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें चार आईएएफ कर्मी, जिनमें स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना भी शामिल थे, शहीद हो गए और लगभग 40 व्यक्ति घायल हुए. 

इस हमले में स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना भी मारे गए थे. ये केस 1990 से सीबीआई के पास है और टाडा कोर्ट जम्मू में मामला चल रहा है.

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यह भी पढ़ें: 1990 के J-K एयरफोर्स हमला मामले में हुई गवाही, चश्मदीद ने अलगाववादी यासीन मलिक की पहचान की

इस हमले के सिलसिले में 31 अगस्त 1990 को टाडा कोर्ट में यासीन मलिक समेत छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी. आरोपियों में जेकेएलएफ से जुड़े अली मोहम्मद मीर, मंजूर अहमद सोफी उर्फ मुस्तफा, जावेद अहमद मीर उर्फ नाल्का, जावेद अहमद जरगर और नानाजी भी शामिल है.

कौन है यासीन मलिक?

1980 के दशक में जम्मू और कश्मीर के पॉलिटिकल सिनेरियो में एक बदलाव आया जब कई युवा उग्रवादी समूहों में शामिल होने लगे. इसी क्रम में कुछ युवा JKLF (जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) के उग्रवादी सदस्य बना और कश्मीर को भारत-पाकिस्तान के नियंत्रण से आजाद कराने के लिए हथियारबंद संघर्ष में सक्रिय हो गया. 2022 में यासीन को टेरर फंडिंग केस में दोषी पाया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई. वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद है.

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