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हरियाणा महिला आयोग ने 'ऑपरेशन सिंदूर' पर टिप्पणी को लेकर निजी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को भेजा नोटिस

हरियाणा महिला आयोग ने अशोक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को ऑपरेशन सिंदूर पर महिला अधिकारियों के प्रति अपमानजनक बयान देने पर नोटिस भेजा है. आयोग का मानना है कि यह बयान सेना और राष्ट्रीय एकता को कमजोर करते हैं. विश्वविद्यालय ने कहा कि यह प्रोफेसर की निजी राय है, संस्थान की नहीं.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

हरियाणा राज्य महिला आयोग ने एक निजी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को 'महिलाओं और सशस्त्र बलों के प्रति अपमानजनक और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले बयान' देने के मामले में नोटिस भेजा है. यह बयान उन्होंने हाल ही में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर दिया था.

महिला आयोग ने 12 मई को स्वत: संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया. अली खान महमूदाबाद अशोक विश्वविद्यालय, सोनीपत में राजनीतिक विज्ञान विभाग के प्रमुख हैं. आयोग ने उन्हें 14 मई को पेश होने को कहा था, लेकिन वह नहीं आए. आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने बताया कि प्रोफेसर ने ईमेल कर जानकारी दी कि उन्हें देर से सूचना मिली, इसलिए वे उपस्थित नहीं हो सके.

रेनू भाटिया ने कहा, 'हम देश की बेटियों कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को सलाम करते हैं. लेकिन प्रोफेसर द्वारा उनके बारे में जिस तरह की बातें की गईं, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं. हमें उम्मीद थी कि वह आयोग के समक्ष आकर खेद व्यक्त करेंगे.'

प्रोफेसर महमूदाबाद के बयान आयोग की नोटिस के साथ संलग्न हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जो लोग कर्नल सोफिया कुरैशी की सराहना कर रहे हैं, उन्हें भीड़ हिंसा और घरों पर बुलडोजर चलाने के मामलों में भी आवाज उठानी चाहिए. उन्होंने महिला अधिकारियों की मीडिया ब्रीफिंग को 'दिखावा' बताया था.

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आयोग का मानना है कि ये टिप्पणियां भारतीय सशस्त्र बलों, विशेष रूप से महिला अधिकारियों को नीचा दिखाने की कोशिश हैं और इससे राष्ट्रीय एकता व साम्प्रदायिक सौहार्द पर असर पड़ सकता है.

अशोक विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि प्रोफेसर के विचार निजी हैं और विश्वविद्यालय की राय से मेल नहीं खाते. विश्वविद्यालय ने सेना का समर्थन करते हुए कहा कि वह देश की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों में पूरी तरह उनके साथ है. आयोग ने यह भी कहा कि प्रोफेसर के बयान UGC नियमों के तहत एक शिक्षक के नैतिक आचरण का उल्लंघन हैं.

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