मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब भारत के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है, जहां एलपीजी की कमी ने हालात बिगाड़ दिए हैं. इस संकट के कारण उद्योग-धंधों पर ताले लगने लगे हैं और बड़ी संख्या में मजदूरों को अपने घरों की ओर लौटना पड़ रहा है. इसी कड़ी में रविवार को सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ देखने को मिली. यूपी और बिहार जाने वाली ट्रेनों में जगह पाने के लिए हजारों लोग स्टेशन पर जुट गए. हालात इतने बिगड़ गए कि लाठीचार्ज के बाद अफरातफरी जैसी स्थिति बन गई.
इस बीच एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने भीतर तक झकझोर कर रख दिया. वापस लौटता एक युवक बेहद भारी मन से कह रहा है कि अब वापस नहीं आऊंगा. भीड़ के साथ ट्रेन पकड़ने जाता शख्स कहता है, 'अब नहीं आऊंगा दोस्त, अब नहीं आऊंगा, बता देना.' वीडियो में उसकी बेबसी, उसका दर्द झलकता है. न जाने कितने लोग काम की तलाश में परदेश आते हैं और फिर काम न मिलने या रोजगार छिनने के बाद घर लौट जाते हैं.
गैस सिलेंडर की कमी
मालूम हो कि गैस की कमी का सीधा असर सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर पड़ा है. उद्योग में काम करने वाले करीब 30 प्रतिशत मजदूर, यानी लगभग 3 लाख लोग, शहर छोड़ चुके हैं. इसका असर उत्पादन पर भी पड़ा है, जो पहले रोजाना 6.5 करोड़ मीटर था, वह घटकर 4.5 करोड़ मीटर रह गया है. उद्योग को रोजाना करीब 15 हजार गैस सिलेंडर की जरूरत होती है, लेकिन सप्लाई सुस्त रहने से संकट और गहरा गया है. यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो और मजदूरों के पलायन और उद्योग को बड़े नुकसान की आशंका बनी हुई है.
बता दें कि सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे उधना-हसनपुर ट्रेन के लिए यात्रियों को लाइन में खड़ा किया जा रहा था. तभी कुछ लोगों ने नियम तोड़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की, जिससे व्यवस्था बिगड़ गई. हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस और आरपीएफ के जवानों को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. वायरल हो रहे वीडियो में यात्री पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए लोहे की बैरिकेडिंग पार करते नजर आ रहे हैं.
क्या बोला रेलवे?
रेलवे के अधिकारी अनुभव सक्सेना के अनुसार, दोपहर तक छह ट्रेनों के माध्यम से 21 हजार से अधिक यात्रियों को रवाना किया जा चुका था. इसके बावजूद भीड़ इतनी ज्यादा थी कि व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया. बार-बार अपील के बावजूद लोग कतार में नहीं रह पाए, जिसके चलते सख्ती करनी पड़ी.
काम धंधा हुआ बंद, नहीं है रोजगार!
इस भारी भीड़ के पीछे सिर्फ गर्मी की छुट्टियां ही वजह नहीं हैं. बीते एक-दो महीनों से एलपीजी की कमी के चलते कामगारों का पलायन लगातार जारी है. छुट्टियों और गैस संकट, दोनों कारणों ने यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ा दी है, जिससे रेलवे की व्यवस्थाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं.
अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जा रही हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. लेकिन जब कुछ लोग नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी हो जाता है.
गौरतलब है कि रेलवे स्टेशनों पर भीड़ पहले भी देखी गई है, लेकिन इस बार हालात अलग हैं. एलपीजी संकट के चलते रोजगार प्रभावित हुआ है, जिससे मजदूरों का अपने घरों की ओर लौटना तेज हो गया है. अब गर्मी की छुट्टियों ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है.