सूरत शहर के पांडेसरा GIDC इलाके से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है. होली की छुट्टियों के दौरान एक डाइंग मिल में टैंक की सफाई करना मजदूरों के लिए काल बन गया. आरोप है कि पारस प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड नामक टेक्सटाइल मिल में बिना सुरक्षा उपकरणों के मजदूरों को केमिकल युक्त पानी के टैंक की सफाई के लिए उतारा गया, जिससे तीन श्रमिकों की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि एक मजदूर की हालत गंभीर बनी हुई है.
जानकारी के अनुसार, मिल में होली के अवसर पर दो दिनों की छुट्टी थी. इसी दौरान मिल प्रबंधन ने सफाई कार्य कराने के लिए मजदूरों को टैंक में उतारा. गुरुवार शाम करीब 6 से 8 बजे के बीच, जब शहर में लोग होली का त्योहार मना रहे थे तब मजदूरों को गहरे टैंक में सफाई के लिए भेजा गया. पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने के कारण यह सफाई अभियान एक भीषण हादसे में बदल गया.
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एक-एक कर टैंक में उतरे मजदूर, जहरीली गैस से हुए बेहोश
बताया गया कि केमिकल युक्त पानी के टैंक को साफ करने के लिए सबसे पहले सोनू कुमार को टैंक में उतारा गया. टैंक के तल में जमा जहरीले कीचड़ और पानी के कारण वह अचानक नीचे दब गया और दम घुटने से बेहोश हो गया. जब वह बाहर नहीं निकला तो उसे बचाने के लिए अन्य मजदूरों को अंदर भेजा गया.
सोनू को बचाने के प्रयास में अंकित कुमार और संदीप कुमार एक-एक करके टैंक में उतरे, लेकिन अंदर फैली जहरीली गैस के कारण वे भी होश खो बैठे और टैंक के भीतर ही गिर पड़े. तीनों के बाहर न आने पर भी मिल प्रबंधन ने चौथे मजदूर अमरेंद्र कुमार को टैंक में उतारा, लेकिन अंदर का मंजर देखकर वह घबरा गया और किसी तरह बाहर निकल आया. अमरेंद्र कुमार की हालत गंभीर है और वह अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है.
बिहार के रोहतास जिले के थे सभी मजदूर
इस हादसे में जान गंवाने वाले सभी युवक मूल रूप से बिहार के रोहतास जिले के निवासी थे. मृतकों में पीयूष कुमार उर्फ अंकित रविंदर पासवान (16), निवासी ग्राम आमझरपुर थाना शिवसागर, सोनू कुमार कमलेश पासवान (23) निवासी ग्राम नौरिहा थाना शिवसागर और संदीप कुमार संतोषभाई पासवान (23) निवासी ग्राम कुदरा शामिल हैं.
घायल मजदूर मनोज कुमार सूरज पासवान (31) ग्राम परशुरामपुर पोस्ट दुआ थाना दिनारा जिला रोहतास का निवासी है, जिसकी हालत गंभीर बताई जा रही है. रोजगार की तलाश में सूरत आए इन युवाओं की उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच बताई जा रही है और वे मिल में मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहे थे.
घटना के बाद देरी से दी गई पुलिस को सूचना
बताया जा रहा है कि हादसे के बाद मजदूरों को सरकारी अस्पताल ले जाने की बजाय डिंडोली इलाके के बाबा मेमोरियल नामक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां पहुंचने से पहले ही तीन मजदूरों की मौत हो गई. प्राथमिक अनुमान के अनुसार टैंक में ऑक्सीजन की कमी और केमिकल युक्त कीचड़ से निकलने वाली जहरीली गैस के कारण दम घुटना ही मौत का मुख्य कारण बना.
पांडेसरा थाना पुलिस के अनुसार यह घटना 5 मार्च को शाम 4:30 से रात 8 बजे के बीच हुई थी, लेकिन मिल प्रबंधन ने इसकी सूचना पुलिस को 6 मार्च की सुबह 5:10 से 5:35 बजे के बीच दी. घटना पांडेसरा GIDC के प्लॉट नंबर 276 स्थित ईटीपी प्लांट की अंडरग्राउंड टंकी में हुई. तीन मजदूरों की मौत के बाद गुजरात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है और एफएसएल को भी सूचना दी गई है. फिलहाल पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं.