सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम को लेकर काफी चर्चा हो रही है. यह चर्चा अब सोशल मीडिया से निकलकर मुख्यधारा के मीडिया तक पहुंच गई है. इस बीच गुजरात के सूरत में रहने वाले परेश कुमार महाले कलेक्टर ऑफिस पहुंचे, जहां उनके हाथ में एक पोस्टर था. पोस्टर के एक तरफ कॉकरोच का सिंबल बना था और दूसरी तरफ उनकी खुद की तस्वीर लगी हुई थी. उन्होंने खुद को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का समर्थक बताया.
'आजतक' से बातचीत में परेश महाले ने कहा कि कॉकरोच का सिंबल रखने के पीछे एक ही कारण है कि सरकार और व्यवस्था ने लोगों को ‘कॉकरोच’ बनने पर मजबूर कर दिया है. उन्होंने कहा कि देश में भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है, जिससे युवा परेशान हैं. उनका आरोप है कि जब युवा सोशल मीडिया या समाज में सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो उन्हें ‘कॉकरोच’ कहकर अपमानित किया जाता है.
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परेश महाले ने कहा कि इसी अपमानजनक शब्द के विरोध में वे सूरत कलेक्टर ऑफिस पहुंचे हैं. उनका कहना है कि अब वे इसी प्रतीक के जरिए व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाएंगे.
NEET पेपर लीक और भ्रष्टाचार का भी उठाया मुद्दा
परेश महाले ने बातचीत के दौरान NEET परीक्षा का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते हुई NEET परीक्षा में लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया. उनके मुताबिक, जिन परिवारों ने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए संघर्ष किया, उनका भरोसा पेपर लीक की वजह से टूट गया.
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर सरकार सही तरीके से काम करती, तो युवाओं को इस तरह विरोध करने की जरूरत नहीं पड़ती. परेश महाले ने कहा कि अब युवा ‘कॉकरोच’ बनकर ही इस व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे.
‘अनाज माफियाओं’ के खिलाफ लड़ाई का दावा
परेश महाले ने दावा किया कि उनके पास ‘अनाज माफियाओं’ के खिलाफ एक साल से चल रही लड़ाई से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने मामलतदार, डिप्टी कलेक्टर, गृह मंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायतें भेजी हैं और उनके पास रिसीविंग कॉपी भी है.
उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई और उन्हें धमकियां भी मिल रही हैं. परेश महाले ने कहा कि युवा महंगाई और गलत नीतियों से परेशान हैं और आने वाले समय में और लोग इस व्यवस्था के खिलाफ सामने आएंगे. बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वह आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए हैं और उनका मानना है कि शिक्षित उम्मीदवार ही बदलाव ला सकते हैं.