गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से नकली सिगरेट की तस्करी का मामला सामने आया है. डीआरआई ने सिंगापुर से टॉयलेट टिशू के रूप में लाई गई 19.87 करोड़ रुपये की नकली सिगरेट जब्त की है. मुंद्रा बंदरगाह से एक बार फिर बड़े पैमाने पर तस्करी का भंडाफोड़ हुआ है.
डीआरआई (राजस्व खुफिया निदेशालय) की अहमदाबाद क्षेत्रीय इकाई ने सिंगापुर से आए एक कार्गो कंटेनर में छिपाई गई नकली सिगरेट जब्त की है, जिसकी कीमत करीब 19.87 करोड़ रुपये आंकी गई है.
सूचना के आधार पर अधिकारियों ने मुंद्रा बंदरगाह पर सिंगापुर से आ रहे कंटेनर को रोका. बताया जा रहा है कि माल उत्तर प्रदेश के दादरी भेजा जाना था. आयात दस्तावेजों में माल को शौचालयों में इस्तेमाल होने वाले टॉयलेट टिश्यू के रूप में घोषित किया गया था. जब भी कोई माल विदेश से भारत में आयात किया जाता है, तो सीमा शुल्क विभाग को एक फॉर्म जमा करना होता है.
इस फॉर्म को बिल ऑफ एंट्री कहा जाता है. इस कंटेनर के लिए बिल ऑफ एंट्री अभी तक दाखिल नहीं किया गया था, जो संदिग्ध प्रतीत हुआ. 28 अप्रैल को कंटेनर की जांच करने पर उसमें गोल्ड फ्लेक ब्रांड वाली 82.80 लाख सिगरेटें मिलीं. हालांकि आईपीआर प्रतिनिधि ने जांच में पाया कि ये सभी सिगरेटें नकली थीं. जानबूझकर कंटेनर के लिए बिल ऑफ एंट्री दाखिल नहीं किया गया था और यह दिखाया गया था कि इसे मुंद्रा से दादरी भेजा जा रहा है.
दरअसल नकली गोल्ड फ्लेक ब्रांड की सिगरेटों को कंटेनर में छिपाकर, पैकेजिंग और सीरियल नंबर बदलकर उन्हें असली दिखाने का प्रयास किया गया था. सिंगापुर जैसे देश से इतनी बड़ी मात्रा में नकली सिगरेटों के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं.
आशंका है कि इसके पीछे एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह सक्रिय है. फिलहाल, डीआरआई ने इस बात का पता लगाने के लिए गहन जांच शुरू कर दी है कि इतनी मात्रा में सिगरेट का ऑर्डर किसने दिया था और उन्हें कहां भेजा जाना था.
नकली सिगरेट से खतरा
नकली सिगरेट निम्न गुणवत्ता की होती हैं और उनमें अत्यंत हानिकारक रसायन होते हैं. इससे कैंसर का खतरा नियमित सिगरेट पीने की तुलना में कई गुना अधिक होता है. इससे गंभीर और जानलेवा फेफड़ों की बीमारियों के विकसित होने की प्रबल संभावना है.