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सरकार ने मछुआरों को दी राहत! डीजल के दामों में हुई बढ़ोतरी को लिया वापस

गुजरात में डीजल के दामों में 22.43 रुपये लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. जिसको लेकर मछुआरों ने विरोध जताया था. मछुआरों का कहना था कि डीजल के दाम में हुई इस बढ़ोतरी से मछली उद्योग पूरी तरह ठप हो जाएगा.

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मछुआरों के हित में सरकार का बड़ा फैसला. (Photo: Screengrab)
मछुआरों के हित में सरकार का बड़ा फैसला. (Photo: Screengrab)

मछुआरों के हित में सरकार ने ऐतिहासिक, त्वरित और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. जिसके तहत भारत पेट्रोलियम द्वारा मछली पकड़ने वाली नावों के डीज़ल की कीमत में की गई 22.43 रुपये की बढ़ोतरी वापस ले ली गई है. राज्य के मछुआरों को नावों के लिए डीज़ल अब भी पहले से तय रियायती दर पर ही मिलेगा. मत्स्य पालन मंत्री और मछुआरों ने मछुआरों के हित में त्वरित निर्णय लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है.

आपको बता दें कि गुजरात के मांगरोल में लगभग 2500 नावें हैं जो मछली पकड़ने के व्यवसाय में लगी हुई हैं. इस बारे में बताते हुए दामोदर चामुंडिया प्रमुख मांगरोल माछीमार एसोसिएशन ने कहा कि यदि सरकार डीज़ल की कीमत में 22.43 रुपये की बढ़ोतरी करती, तो प्रत्येक नाव को 75,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का नुकसान होने की आशंका थी. प्रत्येक नाव एक ही चक्कर में 3000 लीटर डीज़ल खर्च करती है. 88 रुपए का डीजल अब 111 रुपए में खरीदना पड़ता जिसका खर्च उठाना मछुआरों के लिए संभव नहीं था और इसके चलते मछली उद्योग पूरी तरह ठप हो सकता था. 

यह भी पढ़ें: इंडस्ट्रियल डीजल 21.92 रुपये लीटर हुआ महंगा, कहां होता है इस्तेमाल? और क्या-क्या चीजें होने वाली हैं महंगी

यह स्थिति न केवल मांगरोल के लिए, बल्कि पूरे गुजरात में मछली पकड़ने वाली लगभग 20,000 नावों से जुड़े मछुआरों के लिए भी अत्यंत चिंताजनक थी. मछली उद्योग को लगभग 15000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का खतरा था, लेकिन केंद्र सरकार ने इस नुकसान से मछली उद्योग को बचा लिया है. जिसके परिणामस्वरूप मछुआरे बेहद प्रसन्न हैं.

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22.43 रुपये प्रति लीटर की गई थी बढ़ोतरी

गुजरात सरकार के मत्स्य संघ (GFCCA) ने भारत पेट्रोलियम (BPCL) के साथ एक निविदा प्रक्रिया (tender process) संपन्न की थी. ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मछुआरों को डीज़ल रियायती दर पर प्राप्त हो. हालांकि हाल ही में भारत पेट्रोलियम ने मछुआरों के लिए डीज़ल की कीमत में 22.43 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा कर दी थी.

मांगरोल के मछुआरों ने इस बढ़ोतरी के विरुद्ध अपना विरोध दर्ज कराया और मत्स्य उद्योग पूरी तरह से ठप हो जाने की चिंता जाहिर की. जिसके बाद मत्स्य पालन मंत्री जीतूभाई वाघाणी और मुख्यमंत्री ने इस संबंध में केंद्र सरकार के समक्ष अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत किया. इस विषय पर बात करते हुए जीतू वाघाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार ने गुजरात के मछुआरों द्वारा प्रस्तुत इस उचित अभ्यावेदन को स्वीकार कर लिया है.

इसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने भारत पेट्रोलियम को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे मछुआरों की नावों में उपयोग होने वाले डीज़ल की कीमत में की गई 22.43 रुपये की बढ़ोतरी को तत्काल वापस ले लें. ताकि, अब राज्य के मछुआरों को डीज़ल पहले से निर्धारित रियायती दर पर ही प्राप्त हो सके.

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मांगरोल में मछली पकड़ने वाले मछुआरों ने कीमतों में की गई इस कटौती को वापस लिए जाने पर खुशी ज़ाहिर की और सरकार के इस फैसले का स्वागत किया. इस संबंध में फिशिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष दामोदर चामुंडिया और मछुआरे किशनभाई भाद्रेचा ने कहा कि यह राज्य सरकार और केंद्र सरकार का एक ऐतिहासिक फैसला है, जिसे मछुआरा समुदाय पूरे दिल से स्वीकार करता है. इस फैसले से सरकार ने मछुआरों को भारी नुकसान से बचा लिया है.
 

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