अहमदाबाद के आनंदनगर इलाके में जीवराज पुल के नीचे 2 मई को हुई नटूभाई परमार की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. जांच में सामने आया है कि इस जघन्य वारदात को किसी अज्ञात अपराधी ने नहीं, बल्कि पारिवारिक विवाद के चलते मृतक के बेटे के ससुराल पक्ष के लोगों ने अंजाम दिया था. उन्होंने मृतक पर 36 बार हमला किया.
घटना बापा सीताराम मोबाइल दुकान के पास की है, जहां 52 वर्षीय नटूभाई परमार पर अचानक हमला किया गया. हमलावरों ने लोहे के पाइप और लाठी से उन पर ताबड़तोड़ 36 वार किए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस पूरी घटना के भयावह दृश्य पास लगे निगरानी कैमरों में कैद हो गए, जिसके बाद पुलिस तुरंत सक्रिय हुई.
मामले की जांच के दौरान जोन 7 अपराध शाखा और आनंदनगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हसमुख वाघेला, कांति वाना और भावेश परमार के रूप में हुई है. वहीं, एक अन्य आरोपी केतन अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है.
प्रेम विवाह हुआ, गर्भपात के बाद अनबन
पुलिस के अनुसार, मृतक के बेटे कौशिक परमार की शादी करीब पांच साल पहले प्रेम विवाह के रूप में हुई थी. पत्नी के गर्भपात के बाद पिछले छह महीनों से दंपति के बीच लगातार विवाद चल रहा था और महिला अपने मायके में रह रही थी. कुछ दिन पहले नटूभाई और उनके बेटे जब ससुराल पक्ष के घर पहुंचे, तो वहां कहासुनी हो गई थी.
कैसे रची साजिश?
इसके बाद 28 अप्रैल को जब हसमुख वाघेला अपने साथियों के साथ नटूभाई के घर पहुंचा, तब भी विवाद हुआ. इसी रंजिश के चलते हसमुख ने हत्या की साजिश रची. योजना के अनुसार, नटूभाई को रात में जीवराज पुल के नीचे निशाना बनाया गया और वहां पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया.
वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर राणीप की ओर फरार हो गए और फिर बनासकांठा पहुंच गए. पुलिस से बचने के लिए वे मंदिरों और छोटे ठहरने के स्थानों में छिपते रहे. बताया जा रहा है कि आरोपी दिहाड़ी मजदूरी करते हैं.
फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और फरार आरोपी की तलाश में छापेमारी जारी है. साथ ही, पूरे मामले की अन्य कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.