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गुजरात विधानसभा के नए डिप्टी स्पीकर बने पूर्णेश मोदी, कांग्रेस का BJP पर परंपरा तोड़ने का आरोप

गुजरात विधानसभा को नया डिप्टी स्पीकर मिल गया है. भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी को ध्वनि मत से इस पद पर चुना गया. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई. कांग्रेस ने भाजपा पर संसदीय परंपराओं के उल्लंघन का आरोप लगाया, जबकि AAP ने मतदान का बहिष्कार करते हुए NOTA का विकल्प न मिलने की बात कही.

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बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी गुजरात विधानसभा के नए डिप्टी स्पीकर चुने गए. (Photo: X/@BJP4Gujarat)
बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी गुजरात विधानसभा के नए डिप्टी स्पीकर चुने गए. (Photo: X/@BJP4Gujarat)

गुजरात विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी को ध्वनि मत से विधानसभा का नया डिप्टी स्पीकर चुना गया. भाजपा के पास पूर्ण बहुमत होने के चलते पार्टी के उम्मीदवार पूर्णेश मोदी का निर्वाचन निर्विरोध रहा. चुनाव प्रक्रिया की घोषणा होते ही आम आदमी पार्टी ने मतदान का बहिष्कार कर दिया.

कांग्रेस ने संख्या बल कम होने के बावजूद अपने उपनेता शैलेश परमार को उम्मीदवार बनाया था. हालांकि, भाजपा के बहुमत के आगे कांग्रेस का प्रयास सफल नहीं हो सका. डिप्टी स्पीकर चुने जाने के बाद पूर्णेश मोदी ने अपनी पार्टी और सभी विधायकों का आभार जताया और कहा कि वे आने वाले समय में पक्ष और विपक्ष से ऊपर उठकर विधानसभा की कार्यवाही को निष्पक्ष और सुचारू रूप से संचालित करेंगे.

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इस चुनाव को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला. कांग्रेस विधायक दल के नेता डॉ. तुषार चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा बहुमत के बल पर लोकतांत्रिक और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन कर रही है. उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं दिया गया, फिर लोक लेखा समिति (PAC) के अध्यक्ष का पद भी विपक्ष को नहीं सौंपा गया. वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार विधानसभा में डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष के पास होता है, लेकिन भाजपा सत्ता में आने के बाद इस परंपरा को भी तोड़ा जा रहा है.

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कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी पर भी आरोप लगाया कि वह भाजपा की ‘बी टीम’ की तरह काम कर रही है, क्योंकि उसने चुनाव के दौरान कांग्रेस का साथ नहीं दिया और सदन से बाहर चली गई. वहीं आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस के पास आवश्यक संख्या बल नहीं था, इसलिए भाजपा की जीत तय थी. आम आदमी पार्टी का कहना है कि उसने विधानसभा अध्यक्ष से NOTA (इनमे से कोई भी नहीं) का विकल्प देने की मांग की थी, लेकिन ऐसा नहीं होने पर उसने मतदान प्रक्रिया का बहिष्कार किया.
 

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