scorecardresearch
 

रेंट के मामले में पेर‍िस से महंगी है दिल्ली, छोटी दुकान भी 9 लाख की

दिल्ली का दिल कनॉट प्लेस रेंटल के मामले में दूसरे पायदान पर है. इसका कारण है कि उसकी हेरिटेज वैल्यू और वहां मिलने वाली सुविधाएं. कनॉट प्लेस में भी इनर सर्किल का रेट आउटर के मुकाबले ज्यादा है. इनर सर्किल पर एक स्क्वायर फीट का रेंट 800 से 900 रुपए है, जबकि आउटर पर 350 से 400 रुपए.

Advertisement
X
प्र‍तीकात्मक तस्वीर
प्र‍तीकात्मक तस्वीर

दुनिया के कई प्रमुख शहरों से महंगी है दिल्ली. जी हां, बढ़ती महंगाई से दिल्ली वासी पहले से ही परेशान हैं. खाने-पीने की चीजों के दाम हर दिन बढ़ रहे हैं और इनसब के बीच हुए एक सर्वे ने भी ये बात साबित कर दी है. इस सर्वे के मुताबिक, दिल्ली में रेंटल यानी दुकानों और दफ्तरों से जो मासिक किराया लिया जाता है वो दुनिया के कई प्रमुख शहरों से ज्यादा है. इस कैटरगरी मे दिल्ली का सातवां स्थान है. इस लिस्ट में  सिंगापुर, सिडनी, लॉस एंजेलिस और पेरिस जैसे शहर भी दिल्ली से पीछे हैं.

क्यों महंगी है दिल्ली?

भारत की इकॉनमी हर दिन बढ़ रही है. विदेशी कंपनियां और बड़े विदेशी ब्रांड्स में इनदिनों भारत में निवेश करने की होड़ लगी हुई है. सभी भारतीय मार्केट को दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर मानते हैं. दिल्ली देश की राजधानी है इसलिए यहां हर कंपनी अपना आउटलेट या दफ्तर खोलना चाहती है. कनॉट प्लेस मार्केट एसोसिएशन के अतुल बताते है कि "दिल्ली में दुकानों और दफ्तरों के रेंटल जगह और एरिया के हिसाब से बंधे हैं.

Advertisement

दिल्ली का दिल कनॉट प्लेस रेंटल के मामले में दूसरे पायदान पर है. इसका कारण है कि उसकी हेरिटेज वैल्यू और वहां मिलने वाली सुविधाएं. कनॉट प्लेस में भी इनर सर्किल का रेट आउटर के मुकाबले ज्यादा है. इनर सर्किल पर एक स्क्वायर फीट का रेंट 800 से 900 रुपए है, जबकि आउटर पर 350 से 400 रुपए. वहीं, इनर सर्किल पर दुकानें 250 रुपए स्क्वायर फिट के हिसाब से उपलब्ध हैं.

राजधानी के सबसे पॉश इलाको में से एक खान मार्केट युवाओं में बेहद पॉपुलर है. ये रेंटल के लिहाज से भी सबसे ऊपर है. यहां दुकानों को रेंट 1700 रुपए स्क्वायर फीट तक है. यानी एक छोटी सी दुकान का रेंट 8 से 9 लाख रुपए है. ताज्जुब की बात ये है कि यहां की फुटफॉल कनॉट प्लेस के मुकाबले लगभग बराबर ही है, लेकिन यहां की फुटफॉल सेल में तब्दील हो जाती है.  

खान मार्केट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट संजीव मेहरा का कहना है कि "खान मार्केट दिल्ली के एक खास तबके के लिए है. यहां के कस्टमर लॉयल और पुराने हैं. दुकानदारों से उनका पारिवारिक रिश्ता होता है. दिल्ली के वो बाजार या इलाके जो एनडीएमसी के अंदर आते हैं वो महंगे हैं, लेकिन सुविधओं के लिहाज से बेहतर भी. यही कारण है कि इनके रेंटल दिल्ली में दूसरी जगहों से ज्यादा होते है.''

Advertisement

अब इसे गर्व की बात माने या बढ़ती महंगाई का नतीजा जो दिल्ली में अमीर और गरीब के बीच का फासला हर दिन बढ़ता जा रहा है. दुकानों से लेकर हर चीज़ आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है. भारत विदेशी कंपनियों के लिए मजबूत मार्केट बन कर उभर रहा है. वहीं, मध्यम वर्गीय परिवार दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष में लगा है.

Advertisement
Advertisement