प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी, अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई अहम दस्तावेजों और समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भारत-UAE शिखर सम्मेलन को छोटा लेकिन बेहद ठोस दौरा बताया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच प्रतिबंधित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई.
दोनों नेताओं के बीच वार्ता के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए फ्रेमवर्क समझौते पर काम करने के लिए आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर किए. अंतरिक्ष क्षेत्र में दो लॉन्च सुविधा और सैटेलाइट निर्माण के लिए भी समझौता हुआ है.
इसके अलावा, UAE अब भारत को हर साल 0.5 मिलियन मेट्रिक टन एलएनजी (LNG) की आपूर्ति करेगा, जिससे वह भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता बन गया है. गुजरात के धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र के विकास में भी UAE भागीदारी करेगा. दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की और दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने पर जोर दिया.
डिफेंस, स्पेस और न्यूक्लियर एनर्जी पर फोकस
समिट में रक्षा और तकनीक पर विशेष जोर दिया गया है. दोनों देशों ने सामरिक रक्षा साझेदारी के लिए हाथ मिलाया है. अंतरिक्ष के क्षेत्र में संयुक्त पहल के तहत बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा. इसके साथ ही, भारत और UAE ने नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाओं को तलाशने का भी फैसला लिया है. डेलिगेशन में अबू धाबी और दुबई के शाही परिवारों के सदस्यों सहित यूएई के रक्षा मंत्री शेख हमदान भी शामिल रहे.
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आर्थिक निवेश और फूड सिक्योरिटी
खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में हुए एमओयू (MoU) से भारतीय किसानों को सीधा लाभ होगा और यूएई की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी. यूएई भारत में डेटा सेंटर क्षमता और सुपर कंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने में निवेश करेगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है. साथ ही, दोनों देश आपसी संप्रभुता के आधार पर 'डेटा एंबेसी' (Data Embassy) स्थापित करने की संभावना पर भी काम करेंगे.
सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय शांति
यूएई में रहने वाले 4.5 मिलियन भारतीयों के लिए अबू धाबी में 'हाउस ऑफ इंडिया' (House of India) स्थापित किया जाएगा, जो दोनों देशों की साझा विरासत को दर्शाएगा. दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार साझा किए और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि का समर्थन किया. साथ ही, पश्चिम एशिया और अफ्रीका में निर्यात को बढ़ावा देने और युवाओं के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने पर भी सहमति बनी है.