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फांसी से बचने के लिए SC पहुंचा निर्भया का गुनहगार, वकील पर लगाए आरोप

निर्भया के गुनहगार मुकेश ने अपनी याचिका में कहा कि उसे धमका कर दबाव में लेते हुए हड़बड़ी में उपचारात्मक याचिका दाखिल करवाई गई. उसे फिर से क्यूरेटिव पिटिशन और दया याचिका दाखिल करने की इजाजत दी जाए.

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कल ही पटियाला हाउस कोर्ट ने जारी किया था डेथ वॉरंट (फाइल फोटो-PTI)
कल ही पटियाला हाउस कोर्ट ने जारी किया था डेथ वॉरंट (फाइल फोटो-PTI)

  • दोषी मुकेश ने दाखिल की याचिका
  • पूर्व वकील वृंदा ग्रोवर पर लगाए आरोप

फांसी से बचने के लिए निर्भया के गुनहगार ने एक और दांव चला है. दोषी मुकेश शर्मा ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके फिर से क्यूरेटिव याचिका और दया याचिका दाखिल करने की मांग की. मुकेश की तरफ से वकील एमएल शर्मा ने यह याचिका दाखिल की है.

मुकेश ने अपनी याचिका में कहा कि उसे धमका कर दबाव में लेते हुए हड़बड़ी में उपचारात्मक याचिका दाखिल करवाई गई. याचिका के मुताबिक, मुकेश की पूर्व वकील वृंदा ग्रोवर ने उस पर दबाव डाल कर क्यूरेटिव याचिका दाखिल करवाई. उसे फिर से क्यूरेटिव पिटिशन और दया याचिका दाखिल करने की इजाजत दी जाए.

20 मार्च को दी जाएगी फांसी

निर्भया के गुनहगारों को 20 मार्च को सुबह साढे पांच बजे फांसी दी जाएगी. पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार को नया डेथ वॉरंट जारी किया. दोषियों के पास सारे कानूनी विकल्प खत्म हो गए हैं. इसके बावजूद निर्भया के गुनहगार फांसी से बचने के लिए नए हथकंडे अपना रहे हैं.

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एपी सिंह ने निकाली थी भड़ास

निर्भया के गुनहगारों के वकील एपी सिंह कोर्ट के फैसले से नाखुश दिखे. उनका तर्क था कि गुरूवार को चौथा डेथ वारंट जारी किया गया. 2013 में चारों दोषियों को फांसी दी गई. उसके बाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी दोषियों को फांसी की सजा सुना चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया के दबाब की वजह से फैसले पर असर हो रहा है.

अलग-अलग फांसी की भी याचिका

निर्भया के दोषियों को अलग अलग फांसी देने की केंद्र की मांग पर सुप्रीम कोर्ट 23 मार्च को अगली सुनवाई करेगा. गृह मंत्रालय ने तिहाड़ जेल की गाइडलाइन में बदलाव को लेकर याचिका दायर की है.

दोषियों को मिली है 14 दिन की मोहलत

इससे पहले निर्भया के गुनहगार पवन ने अपने आखिरी कानूनी विकल्प को अपनाते हुए दया याचिका दाखिल की थी. इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दया याचिका खारिज कर दी थी. इस दया याचिका खारिज होने के बाद कोर्ट ने चौथा डेथ वॉरंट जारी कर दिया. नियमों के अनुसार, दया याचिका खारिज होने के बाद भी दोषी को फांसी पर लटकाने से पहले 14 दिन का वक्त मिलता है. इस वजह से फांसी की तारीख 20 मार्च तय की गई है.

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