मोम के पुतलों के लिए मशहूर मैडम तुसाद म्यूजियम भारत में भी खुल गया. 1 दिसंबर से आम जनता के लिए इस म्यूजियम को खोल दिया जाएगा. मैडम तुसाद में जाने के लिए आपको प्रति व्यक्ति टिकट खरीदना होगा. अगर आप काउंटर बुकिंग कराते हैं तो एडल्ट के लिए 960 रुपए देने होंगे, वहीं बच्चों के लिए करीब 700 रुपए खर्च करने होंगे. अगर आप ऑनलाइन बुकिंग करते हैं तो आपको 100 रुपए का डिस्काउंट मिल जाएगा. ऑनलाइन खरीद गया टिकट एक साल तक के लिए वैलिड रहेगा. मैडम तुसाद में सुबह 10 बजे से लेकर शाम 7:30 तक कभी भी जाया जा सकता है.
क्या है खास
मैडम तुसाद म्यूजियम में 4 हिस्से मिलेंगे. पहला बॉलीवुड और हॉलीवुड सितारों संग पार्टी जोन, दूसरा म्यूजिक जोन, तीसरा हिस्ट्री और लीडर जोन और चौथा खेल जोन मिलेगा. इस सभी जोन में इस क्षेत्र से जुड़ी हस्तियों को शामिल किया गया है.
यहां अलग अलग क्षेत्रो से चुनिंदा सितारों के मोम से बनाये गए पुतले रखे गए है। खेल, संगीत, इतिहास और फिल्मी जगत की करीब 50 बड़ी हस्तियों के पुतलों को रखा गया है. इनमें मेरी कॉम, रोनाल्डो क्रिस्टियानो, लेडी गागा, माइकल जैक्सन , अमिताभ बच्चन और कटरीना कैफ सरीखे सेलिब्रिटी प्रमुख हैं. यहां रखी गई प्रतिमाओं में 60% हस्तियां भारतीय हैं.
पीएम मोदी के पुतले का क्रेज
दिल्ली के मैडम तुसाद में सबसे खास पीएम मोदी की स्टेच्यू है. उनके पहने कपड़ों के साथ-साथ उनकी कद काठी पर भी खास ध्यान दिया गया है. खुद पीएम मोदी ने इसको बनाने वाले कलाकार की जम कर तारीफ की है.
सितारों के साथ सेल्फी भी ले सकते हैं लोग
यहां आने वाले लोगों को सेलिब्रिटी के साथ सेल्फी का मौका तो मिलेगा ही साथ ही उनके मनोरंजन के लिए और भी प्रयोजन किए गए हैं. यादगार सेल्फी के साथ-साथ आप अपने खुद के हाथों का मोम से बना इंप्रिंट बनवा सकते है, जिसे सालों साल रखा जा सकता है. इसके अलावा 3D गेम जोन में बच्चे और युवा अच्छा समय व्यतीत कर सकते हैं. इन सब के साथ-साथ आप जिस भी देश का चाहे बैक ड्राप लेकर अपनी फोटो भी क्लिक कर सकते हैं.
1835 में बना मैडम तुसाद म्यूजियम
मैडम तुसाद की स्थापना 1835 में मोम शिल्पकार मेरी तुसाद ने की थी. मोम के बने इन पुतलों कि खासियत ये है कि ये दिखने में असली और जीवंत लगते हैं. इनको बनाने में 6 महीने का समय लगता है, जिसकी लागत 1 से 1.50 करोड़ रुपए है. सेलिब्रिटी की शारीरिक बनावट, स्किन, बाल यहां तक कि आंखों की पुतलियों के रंग को ध्यान में रखा जाता है. यही कारण है कि मैडम तुसाद म्यूजियम की शुरुआत का भारत के लोग बेसब्री से इंतेज़ार कर रहे थे.