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'क्या हम आपातकाल लागू करें', CM केजरीवाल से जुड़ी अर्जी खारिज, याचिकाकर्ता पर लगा एक लाख का जुर्माना

कोर्ट ने कहा कि वह मीडिया को अपने विचार प्रसारित करने से नहीं रोकेंगे या मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को उनके खिलाफ विरोध करने से नहीं रोक सकते. याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा "हम क्या करें? क्या हम आपातकाल या मार्शल कानून लागू करें?

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल को तिहाड़ में सरकार चलाने के लिए पर्याप्त सुविधाएं देने और उनके खिलाफ बयानबाजी पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी. हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता श्रीकांत प्रसाद पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया.

मीडिया और प्रतिद्वंद्वियों को नहीं रोक सकते
कोर्ट ने कहा कि वह मीडिया को अपने विचार प्रसारित करने से नहीं रोकेंगे या मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को उनके खिलाफ विरोध करने से नहीं रोक सकते. याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा "हम क्या करें? क्या हम आपातकाल या मार्शल कानून लागू करें? हम प्रेस या राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का मुंह कैसे बंद कर दें?

जनहित याचिका में दिल्ली सरकार को तिहाड़ जेल में केजरीवाल को पर्याप्त सुविधाएं देने का निर्देश देने की भी मांग की गई थी. ताकि वह जेल से अपने मंत्रियों और अन्य विधायकों के साथ बातचीत कर सकें और दिल्ली सरकार को प्रभावी ढंग से चला सकें.

केजरीवाल की अर्जी पर मंगलवार को SC ने क्या कहा
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत पर मंगलवार को फैसला नहीं हो पाया. कारण, समय की कमी के कारण अंतरिम जमानत पर सुनवाई पूरी नहीं हो पाई. अब 9 मई को दोबारा इस मामले की सुनवाई होगी. ढाई बजे बेंच उठ गई और केजरीवाल को कोई राहत नहीं मिल पाई. सुप्रीम कोर्ट में इस पर लंबी बहस चली. सुनवाई कर रही बेंच ने कहा कि केजरीवाल चुने हुए सीएम हैं और दिल्ली का चुनाव सामने है. ये असाधारण स्थिति है. प्रचार करने देने में कोई हर्ज नहीं है. बेंच ने कहा कि हम सिर्फ अंतरिम बेल पर बात कर रहे हैं.

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हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाता है, तो उन्हें आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि इसका व्यापक प्रभाव हो सकता है. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की पीठ ने सुनवाई करते हुए टिप्पणी की, "हम आपको परसों (9 मई) की तारीख देंगे. यदि यह संभव नहीं है, तो हम इसे अगले हफ्ते किसी दिन रखेंगे. अगला हफ्ता बहुत कठिन होने वाला है." 

उधर, ईडी ने जमानत का पुरजोर विरोध किया. ईडी का कहना है कि केजरीवाल को जमानत दी गई तो इससे गलत परिपाटी कायम होगी. हर कोई जमानत मांगने लगेगा. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, दो जजों की पीठ ने जेल में बंद मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा कि क्या केजरीवाल सीएम ऑफिस में उपस्थित होंगे, फाइलों पर हस्ताक्षर करेंगे और अंतरिम जमानत पर रिहा होने पर दूसरों को निर्देश देंगे?".

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