दरअसल साल 2001 में दिल्ली विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए दिल्ली सरकार ने रक्षा मंत्रालय की इस 3 एकड़ जमीन को अधिग्रहित किया था. बाद में दिल्ली मेट्रो ने सिर्फ 1 एकड़ जमीन का ही इस्तेमाल किया और बाकी की 2 एकड़ जमीन को दिल्ली मेट्रो ने एक निजी बिल्डर को लीज पर दे दिया.
7 दिसंबर 2018 को दिल्ली विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने इमारत को मंजूरी न देने की मांग करते हुए केंद्र सरकार के हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मंत्रालय के सचिव को चिट्ठी लिखी थी.
इंडिया टुडे ने इस मामले को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के ओएसडी विपिन तिवारी से बातचीत की. उन्होंने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की तमाम शिकायतों और अनुरोध के बावजूद नगर निगम ने सभी नियमों को दरकिनार करते हुए निजी बिल्डर को 39 मंजिला बिल्डिंग बनाने की अनुमति दे दी.
दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन विपिन तिवारी कहते हैं कि यह जगह एक एजुकेशनल हब है. बिल्डिंग के पास में ही 4 गर्ल्स हॉस्टल हैं. आसपास डीआरडीओ का दफ्तर है और थोड़ी ही दूरी पर उपराज्यपाल का दफ्तर है. यह इलाका एजुकेशनल एरिया होने के साथ-साथ हाई सिक्योरिटी जोन भी है. ऐसे में इतनी बड़ी निजी इमारत बनने से दिल्ली विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों की प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.
विपिन तिवारी आगे कहते हैं कि उन्हें उम्मीद थी कि नगर निगम इस इमारत को मंजूरी नहीं देगा लेकिन एक बार इस प्रस्ताव को खारिज करने के बाद दूसरी बार नगर निगम ने इस बिल्डिंग के नक्शे को मंजूरी दे दी. जबकि ये दिल्ली के मास्टर प्लान 2021 के सेक्शन 11. 3 का उल्लंघन करता है, जो कहता है कि लुटियंस बंगला जोन, सिविल लाईंस और नॉर्थ दिल्ली कैंपस में ऊंची इमारत बनाने पर रोक रहेगी.
इंडिया टुडे को दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी की 27 अप्रैल 2010 की वह चिट्ठी भी मिली जिसके तहत डीडीए ने इस जगह पर ऊंची इमारत बनाने की मंजूरी नहीं देने की बात कही थी. डीडीए ने कहा था कि यहां पर ऊंची इमारत के निर्माण से विश्वविधालय की प्राईवेसी और इंटीग्रेटी पर संकट खड़ा हो सकता है.
दिल्ली विश्वविद्यालय के अलावा नॉर्थ एमसीडी में आम आदमी पार्टी नेता ने भी नगर निगम के इस फैसले पर तमाम सवाल उठाए हैं. वहीं उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर अवतार सिंह कहते हैं कि अगर प्रोजेक्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी नजर आती है या किसी भी तरह का भ्रष्टाचार है तो वह किसी को नहीं छोड़ेंगे.
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
वहीं इस इमारत को लेकर डीयू प्रशासन सुप्रीम कोर्ट गया है. वहां पर कल यानी सोमवार को हुई सुनवाई में जहां रक्षा मंत्रालय ने इस इमारत का विरोध किया है तो वहीं शहरी विकास मंत्रालय ने इस पर अपना पक्ष रखने के लिए और वक्त मांगा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी.