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दिल्ली में टेंडर प्रक्रिया में बड़ा बदलाव... बिचौलियों का खेल खत्म, अब EMD पूरी तरह डिजिटल

दिल्ली में टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा बदलाव किया गया है. अब EMD जमा करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है, जिससे ठेकेदारों को दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी. केवल सबसे कम बोली लगाने वाले को ही बाद में असली EMD जमा करना होगा. सरकार का कहना है कि इससे भ्रष्टाचार कम होगा और सभी को बराबरी का मौका मिलेगा.

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प्रवेश वर्मा के मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है (File Photo: X/@DelhiGovt)
प्रवेश वर्मा के मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है (File Photo: X/@DelhiGovt)

दिल्ली सरकार ने टेंडर प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. फ्लड कंट्रोल और सिंचाई विभाग ने अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) जमा करने की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है.

पहले ठेकेदारों को EMD जमा करने के लिए संबंधित दफ्तर में जाना पड़ता था. इस दौरान कई बार अनावश्यक देरी, मानवीय संपर्क और गड़बड़ी की आशंका बनी रहती थी. कुछ मामलों में सूचना लीक होने या पक्षपात के आरोप भी सामने आते थे.

नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब ठेकेदारों को कहीं जाने की जरूरत नहीं होगी. वे ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर ही टेंडर भरते समय EMD की स्कैन कॉपी अपलोड करेंगे. इससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी.

इस सिस्टम में एक और बड़ा बदलाव यह है कि टेंडर खुलने के बाद सिर्फ L1 यानी सबसे कम बोली लगाने वाले ठेकेदार को ही असली EMD जमा करना होगा. उसे यह रकम 3 दिनों के अंदर जमा करनी होगी. अगर वह तय समय में EMD जमा नहीं करता, तो उसे 2 साल के लिए टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा.

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सरकार का मानना है कि इस कदम से टेंडर प्रक्रिया में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगेगी. अब कोई भी व्यक्ति या अधिकारी यह नहीं जान पाएगा कि कौन किस टेंडर में बोली लगा रहा है, जिससे दबाव या सिफारिश की संभावना कम होगी.

इस फैसले पर मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि यह सुधार सिस्टम में विश्वास बढ़ाने के लिए जरूरी था. इससे अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप खत्म होगा और सभी ठेकेदारों को समान अवसर मिलेगा.

विभाग ने यह भी साफ किया है कि अब भविष्य में EMD की कोई भी ऑफलाइन जमा स्वीकार नहीं की जाएगी. जहां जरूरत होगी, वहां नई व्यवस्था के अनुसार बदलाव भी किए जाएंगे. कुल मिलाकर, यह कदम टेंडर प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है, जिससे सरकारी कामकाज में जवाबदेही भी बढ़ेगी.

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