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‘शिक्षकों से कुत्तों की गिनती’ वाला AAP का दावा फर्जी, दिल्ली शिक्षा विभाग ने दर्ज कराई FIR

दिल्ली के शिक्षा निदेशालय ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि दुर्भावनापूर्ण इरादे से जानबूझकर झूठी और मनगढ़ंत खबरें फैलाई गईं, जिससे शिक्षकों और स्कूल स्टाफ में भ्रम और घबराहट फैली, शिक्षा विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा और सरकारी संस्थानों में जनता के भरोसे को कमजोर करने की कोशिश की गई.

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दिल्ली​ शिक्षा विभाग ने कहा कि शिक्षकों से आवार कुत्तों की गिनती कराने संबंधी कोई आदेश जारी नहीं हुआ है. (सांकेतिक तस्वीर)
दिल्ली​ शिक्षा विभाग ने कहा कि शिक्षकों से आवार कुत्तों की गिनती कराने संबंधी कोई आदेश जारी नहीं हुआ है. (सांकेतिक तस्वीर)

दिल्ली के शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने सरकारी स्कूल के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती का काम सौंपे जाने के संबंध में फैलाई जा रही 'झूठी' और 'भ्रामक' सूचना के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. यह शिकायत सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों से उपजी है, जिसमें कहा जा रहा है कि दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने 20 नवंबर को एक सर्कुलर जारी करके सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती और निगरानी का काम सौंपा है.

दिल्ली शिक्षा विभाग की निदेशक वेदिता रेड्डी ने मीडिया से कहा कि ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है और सरकारी शिक्षकों को सिर्फ शैक्षणिक गतिविधियों में ही शामिल किया गया है. उन्होंने कहा कि शिक्षकों से आवारों कुत्तों की गिनती कराने वाली खबर लोगों के बीच भ्रम पैदा करने और उन्हें गुमराह करने के इरादे से फैलाई गई थी. दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने इस झूठ को प्रसारित करने वाले जिम्मेदार लोगों की जांच शुरू कर दी है.

दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में कहा है कि 'सिटी हाउंडेड बाय स्ट्रेज, किड्स पे प्राइस' शीर्षक वाले सर्कुलर का उद्देश्य केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, ताकि स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों का प्रवेश रोका जा सके. इसके लिए सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और अन्य आवश्यक इंतजामों पर जोर दिया गया था, न कि शिक्षकों को किसी तरह की गिनती या गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारी सौंपने पर.

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सर्कुलर में आवारा कुत्तों की गिनती का उल्लेख नहीं

शिकायत में लिखा है, 'देखा गया है कि दुर्भावनापूर्ण इरादे से झूठी और मनगढ़ंत खबरें फैलाई जा रही हैं, जिससे शिक्षकों और स्कूल स्टाफ में भ्रम व घबराहट पैदा हो रही है, शिक्षा विभाग की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है तथा सार्वजनिक व्यवस्था और सरकारी संस्थानों में विश्वास को बाधित किया जा रहा है... उक्त सर्कुलर में आवारा कुत्तों की गिनती का कोई उल्लेख नहीं है.' शिकायत पहले सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराई गई, जिसे बाद में दिल्ली पुलिस की IFSO (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक सर्विसेज) यूनिट को ट्रांसफर कर दिया गया.

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस 'गलत जानकारी' के लिए आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार ठहराते हुए एक्स पर पोस्ट किया, 'शिक्षा विभाग ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है... आम आदमी पार्टी द्वारा फैलाई जा रही फेक न्यूज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह हमारे समर्पित शिक्षकों का मनोबल तोड़ने और लोगों के मन में दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को लेकर जानबूझकर अविश्वास पैदा करने की गंभीर व सुनियोजित कोशिश है. दिल्ली के खिलाफ ऐसे छल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. झूठ की राजनीति के लिए जीरो टॉलरेंस है और इस झूठ को प्रसारित करने के लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति को कानून के तहत पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाएगा.'

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दरअसल, आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने 30 दिसंबर 2025 को सुबह एक ट्वीट किया था, जिसमें दिल्ली सरकार के एक आधिकारिक आदेश की कॉपी साझा कर दावा किया गया था कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से अब आवारा कुत्तों की गिनती कराई जाएगी. इस ट्वीट को AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी शेयर किया था और बीजेपी सरकार पर शिक्षकों का अपमान करने का आरोप लगाया था. आम आदमी पार्टी के बुराड़ी विधायक संजीव झा ने भी इसे मुद्दा बनाकर बीजेपी सरकार पर हमला बोला था.

हालांकि, दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद और दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया कि 20 नवंबर 2025 को जारी सर्कुलर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन था, जिसमें स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय करने को कहा गया था. इसमें शिक्षकों से कुत्तों की गिनती कराने का कोई निर्देश नहीं था. निदेशालय ने इसे पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत बताया. दिल्ली की शिक्षा निदेशक वेदिता रेड्डी ने कहा कि इस मामले में सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें कई सोशल मीडिया हैंडल्स की सूची भी दी गई है.

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