दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि मानसून के दौरान जलभराव को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
आगामी मॉनसून और बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए, उन्होंने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में चिन्हित किए गए प्रत्येक जलभराव स्थल पर एक समर्पित नोडल अधिकारी तैनात किया जाए, जिसकी जवाबदेही और जिम्मेदारियां पूरी तरह से तय हों.
सीएम ने सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग की शीर्ष समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह निर्देश दिया. मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा, "यदि किसी भी क्षेत्र में जलभराव होता है, तो संबंधित अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. सभी विभाग अपनी टीमों को अलर्ट पर रखें और मानसून के दौरान किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें."
बारिश में जलभराव से निपटने के लिए खास तैयारी
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राहत और बचाव कार्यों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की जांच तय नियमों के अनुसार की जानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि बाढ़ के कारण लोगों को किसी इलाके से सुरक्षित बाहर निकालना पड़े, तो इसके लिए पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एक अधिकारी ने बताया, "22 मुख्य नालों सहित कुल 77 नालों से 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद निकाली जा चुकी है, जबकि बचा हुआ काम युद्ध स्तर पर जारी है." इसके अलावा, हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने, पल्ला क्षेत्र में पानी के बहाव और यमुना नदी के जलस्तर की लाइव जानकारी के लिए विभाग द्वारा एक नया डिजिटल सिस्टम विकसित किया गया है.
मुख्यमंत्री गुप्ता ने बताया कि इस साल स्थायी, मोबाइल और ट्रैक्टर वाले पंपों की संख्या बढ़ाकर 243 से अधिक कर दी गई है. आपातकालीन स्थिति के लिए उपलब्ध नावों की संख्या भी 41 कर दी गई है. इसके अलावा, 31 मोटरबोट इंजन और 12 बोट-कैरेज ट्रॉली भी उपलब्ध कराई गई हैं.
यह सुनिश्चित करने के लिए कि अलग-अलग विभागों के नालों के जंक्शन प्वाइंट्स पर कोई रुकावट न हो, I&FC, लोक निर्माण विभाग (PWD) और दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारियों को मिलाकर संयुक्त निरीक्षण समितियां भी बनाई गई हैं.