छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेंज के दबंग आई.जी. दीपांशु काबरा इन दिनों चर्चा में है. इसलिए नहीं कि उनकी ख्याति बॉडी बिल्डर आईपीएस अधिकारियों में होती है. बल्कि इसलिए की वो इन दिनों दो महिला पुलिस इंस्पेक्टरों के बीच छिड़ी जंग में बतौर रेफरी अपनी भूमिका का निर्वाहन कर रहे है.
मामला गैलेंट्री अवॉर्ड का है. पुलिस सेवा में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस सर्वोच्च अवॉर्ड को पाने वाले शख्श को समय पूर्व पदोन्नति से लेकर कई तरह के लाभ मिलते है. यही नहीं पुलिस महकमे में इस अवॉर्ड से नवाजे जाने वाले शख्श की काफी पूछ परख भी होती है. उन्हें सम्मान की नजरों से देखा जाता है.स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह किसी योग्य पुलिस अफसर को इस अवॉर्ड से सम्मानित करने वाले है. इसकी प्रक्रिया काफी पहले से शुरू हो चुकी है. गैलेंट्री अवॉर्ड पाने वाले अफसरों का पूरा ब्योरा पुलिस मुख्यालय तक पहुंच चुका है. उनका साइटेशन उनकी उपलब्धियों से भरा पड़ा है.
अंतिम फैसले की घडी जब आई तो दो प्रतिद्वंदियों के बीच इस अवॉर्ड को लेकर जंग छिड़ गई. मामला इतना अधिक बढ़ा कि दोनों प्रतिद्वंदियों का साइटेशन राजयपाल बी.डी. टंडन तक जा पंहुचा. राज्यभवन ने दोनों की फाइलों पर गौर फरमाया. चूकीं दोनों ही साइटेशन दुर्ग रेंज के थे, लिहाजा मामले को जांच और परिक्षण के लिए दुर्ग रेंज के आईजी दीपांशु काबरा को सौप दिया गया. दुर्ग जिले के पुलिस अधीक्षक ने पुलिस गैलेंट्री अवॉर्ड के लिए महिला थाने की मरकाम के नाम की सिफारिश की थी. भारती का कार्यकाल काफी उपलब्धि भरा रहा. महिला पीड़ितों की शिकायतों का निपटारा हो या फिर आरोपियों की धर पकड़ का भारती मरकाम ने कई मौको पर बहादुरी का परिचय दिया और अपनी सूझबूझ से हवालात की सैर कराई.
भारती की उपलब्धियों का पूरा ब्योरा पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गया. इस बीच इसी महिला थाने की पूर्व प्रभारी इंस्पेक्टर इरफत आरा खैरानी ने अपनी आपत्ति दर्ज करा दी कि गैलेंट्री अवॉर्ड के लिए इंस्पेक्टर भारती मरकाम ने जो उपलब्धि अपने खाते में दर्ज की है. दरअसल वो उसके कार्यकाल की है. इरफत आरा ने क्राइम रिकार्ड और प्रिवेंशन को लेकर अपना दावा इस अवॉर्ड पर करते हुए पुरे मामले की जांच की मांग कर दी. चूकिं मामला गंभीर था लिहाजा पुलिस मुख्यालय की में खलबली मच गई. यही नहीं शिकायतकर्ताओं ने इस अवार्ड के डिक्लेरेशन में किसी भी तरह से भाई भतीजा वाद ना हो इसके लिए एक पत्र भी राजभवन तक पहुंचा दिया. इस उम्मीद में कि अवार्ड वाकई योग्य इंस्पेक्टर को मिल सके.
मामले के तूल पकड़ने के बाद आईजी दीपांशु काबरा दोनों ही दावेदारों की फैक्ट फाइल का अध्धयन करने में जुटे है. बताया जाता है कि और इंस्पेक्टर भारती मरकाम दोनों से ही आईजी साहब के ताल्लुकात बेहद अच्छे है. ऐसे में कौन इस अवार्ड के योग्य है, ये तय कर पाना उनके लिए काफी जोखिम भरा है.
फिर भी कयास लगाए जा रहे है कि आईजी साहब उसी की पीठ थप थपायेंगे. जिसने सही मायनो में इस अवॉर्ड के लिए अपनी दक्षता साबित की है. लेकिन आईजी साहब के करीबी अफसर कबीर दास का यह दोहा गुनगुनाने से नहीं चूक रहे कि " दो पाटन के बीच में साबुत भया ना कोय. "