बिहार की नीतीश कुमार की महागठबंधन सरकार भूमिहीन लोगों को घर बनाने के लिए जमीन देने जा रही है. इतना ही नहीं जिन भूमिहीनों को जमीन पहले दे दी गई और उनका परिवार अब बढ़ गया है तो वैसे लोगों का विशेष सर्वेक्षण कराकर उन्हें भी प्लान देने की तैयारी है. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भूमिहीनों को जमीन देकर नीतीश कुमार अनुसूचित जाति, पिछड़े एंव अति पिछड़ा वर्ग को साधने की कवायद है, क्योंकि इसका लाभ उन्हें ही मिला है. इस तरह से नीतीश मिशन-2024 को फतह करने के लिए अपनी सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने का दांव माना जा रहा?
गरीबों के घर के लिए जमीन देंगे नीतीश
नीतीश सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री आलोक मेहता ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि बिहार में एक भी भूमिहीन परिवार नहीं रहेगा. विभाग के अधिकारियों को एमपी-एमएलए-एमएलसी विकास योजनाओं के लिए जमीन संबंधी एनओसी शीघ्रता से देने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 तक राज्य में जमीन का विशेष सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया जाएगा. विपक्ष के वॉकआउट के बीच 1548.50 करोड़ का राजस्व-भूमि सुधार विभाग का अनुदान पास कर दिया गया है.
दरअसल, बिहार में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले वैसे लोगों को जिनके पास घर बनाने के लिए जमीन नहीं है, उनको चिन्हित कर बिहार सरकार जमीन देने जा रही है. ऐसे लोगों को चिन्हित भी कर लिया गया है. इस योजना का फायदा बिहार सरकार अनुसूचित जाति, पिछड़े एंव अति पिछड़ा वर्ग के वैसे लोगों को दिया जाएगा, जिनके पास अपना घर बनाने के लिए जमीन नहीं है. ऐसे लोगों को ही सरकारी स्तर पर जमीन मुहैया करायी जाएगी. सरकार बिहार में भूमिहीनों को वैसी जमीन को देने की कोशिश कर रही है जो जमीन गैर मजरुआ, सीलिंग या फिर भू-दान की जमीन हैं. उसी जमीन पर ऐसे परिवारवालों को बसाया जाएगा.
किस जाति के कितने लोगों को फायदा
राजस्व-भूमि सुधार मंत्री आलोक मेहता ने बताया कि अभी बिहार में फिलहाल 21 हजार 819 भूमिहीन परिवार हैं. इसमें अत्यंत पिछड़ा वर्ग के 3733, पिछड़ा वर्ग के 2264, अनुसूचित जाति के 3598, महादलित वर्ग के 11112 और अनुसूचित जनजाति वर्ग के 1112 परिवार शामिल हैं. इसी साल 2023 में इन सभी परिवारों को घर बनाने के लिए जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी.
उन्होंने कहा कि बिहार में बहुत सारे परिवार ऐसे हैं, जिनके पास खुद की जमीन नहीं है. ऐसे ही भूमिहीन के लिए इस योजना के अंतर्गत 5 डेसीमल जमी मुफ्त में बिहार सरकार के द्वारा दी जा रही है. बिहार में 'भूदान' आंदोलन के दौरान दान की गई करीब 104 लाख एकड़ जमीन भूमिहीन लोगों में बांटने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी. भूदान आंदोलन के दौरान दान की गई कुल 6,48,593 एकड़ जमीन में से 2,56,664 एकड़ जमीन वितरित की है. इसके अलावा भी अन्य 1.04 लाख एकड़ जमीन वितरण के लिए उपयुक्त पाई गई है, जिसे गरीबों में बांटा जाएगा.
नीतीश की सोशल इंजीनियरिंग
नीतीश कुमार सरकार भूमिहीनों को घर बनाने के लिए जमीन देकर 2024 के चुनाव से पहले अपनी सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. इसके पीछे वजह यह है कि इसका फायदा दलित, पिछड़े और अत्यंत पिछड़े वर्ग के लोगों को मिलेगा. बिहार की सियासत में दलित, पिछड़े और अतिपिछड़े वर्ग का बड़ा वोटबैंक है, जो सियासी तौर पर किसी भी दल का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं. ऐसे में नतीश सरकार घर बनाने का जमीन उपलब्ध कराकर लोकसभा चुनाव में अपने समीकरण को दुरुस्त करने का दांव चला है.
बीजेपी के लाभार्थी का काउंटर प्लान?
बिहार में सियासी बदलाव के बाद बीजेपी अपने दम पर खड़े होने की कवायद में जुटी है. ऐसे में बीजेपी की नजर उसी इसी वोटबैंक पर है, जिसे मोदी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए लाभार्थियों साधने की कोशिश हो रही है. पीएम आवास योजना के जरिए गरीबों को पक्का मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपये दिए जा रहे हैं. बीजेपी के लिए यह आवास योजना चुनाव में फायदेमंद साबित हो रही है, जो कई राज्यों के चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव नतीजे में दिखा है. ऐसे में नीतीश सरकार बीजेपी के इस दांव को काउंटर करने के लिए गरीबों को घर बनाने के लिए जमीन उपलब्ध करा रहे हैं?