आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में तनाव एक आम समस्या बन चुका है. दुनिया में ऐसा शायद ही कोई होगा जिसे किसी ना किसी वजह से तनाव का सामना ना करना पड़े. वास्तव में तनाव आदमी के लिए अजनबी नहीं है. यह शायद इंसान के वजूद जितना ही पुराना है. जिंदगी में थोड़ा बहुत तनाव सामान्य है.
ये परेशानी अगर लंबे वक्त तक रहे तो ये आपके लिए खतरनाक साबित हो सकती है. ऐसे में जरूरी है कि हम अपने तनाव और चिंता को पहचानें और उसे दूर करने का प्रयास करें. मानसिक तनाव को लेकर समाज में अब भी उतनी जागरुकता नहीं आई है जितनी आनी चाहिए थी. भारत में मानसिक समस्या से ग्रसित लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है और आने वाले दस सालों में दुनिया भर में मानसिक समस्याओं से ग्रसित लोगों की एक बड़ी आबादी भारतीयों की होगी.
सौ बीमारियों की जड़ है तनाव
इंडिया टुडे मैगजीन के मुताबिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2016 में तनाव को '21वीं सदी का स्वास्थ्य महारोग' करार दिया था. तनाव निश्चित कारणों और लक्षणों वाली बीमारी भले न हो, पर समय के साथ शरीर के अंगों पर इतना कहर बरपाता है कि जिंदगी के लिए खतरा बन जाता है.
बेंगलुरु के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और स्नायु विज्ञान संस्थान के पूर्व प्रमुख डॉ. बीएन गंगाधर ने इंडिया टुडे मैगजीन को बताया, ''तनाव अब केवल मानसिक परेशानी नहीं रहा. ये ढेर सारी शारीरिक परेशानियों का कारण बन चुका है.''
वास्तव में भारत में पिछले दो साल में हुए कई वैज्ञानिक अनुसंधानों ने हमें सचेत किया है कि तनाव सीधे या घुमा-फिराकर हृदय रोग, ब्रेन स्ट्रोक, डायबिटीज, कैंसर, फेफड़े की बीमारियों, लीवर सिरोसिस और बांझपन, मोटापे जैसी बीमारियों और आत्महत्या की ओर ले जाने वाले अवसाद का कारण बन रहा है. इसके बाद भी लोग तनाव को तब तक परेशानी नहीं मानते, जब तक यह ज्यादा घातक बीमारियों के रूप में प्रकट नहीं होता.
गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी और डायबिटोलॉजी प्रैक्टिस के डायरेक्टर डॉ. सुनील कुमार मिश्रा ने कहा, ''लोग आम तौर पर किसी चीज को तब तक गंभीरता से नहीं लेते जब तक वह संकट बनकर खड़ा नहीं हो जाता. शरीर में तनाव को माप नहीं सकते, इसलिए जब कोई बड़ी घटना घटती है तभी अपनी बेहद तनावपूर्ण जीवनशैली का एहसास होता है.''
वहीं, डॉ. मिश्रा की बात को आगे बढ़ाते हुए फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. अशोक सेठ कहते हैं, ''हमारे सामने पिछले कुछ साल में भारत में हार्ट अटैक के मामलों में अचानक बढ़ोतरी हुई है जिसमें तनाव का अहम योगदान है.''
मुंबई में मुलुंड स्थित फोर्टिस अस्पताल के सीनियर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अतुल इंगले कहते हैं, ''मेडिकल शब्दावली में हम तनाव को दीर्घकालिक सूजन की शारीरिक अवस्था के रूप में देखते हैं.''
किडनी पर इसके असर की बात करते हुए वे कहते हैं, ''यह असर सीधा नहीं होता पर जिस तरह यह जीवनशैली को प्रभावित करता है, जिसमें लोग पानी कम पीते हैं और पोषक आहार से समझौते करते हैं जो डायबिटीज, किडनी और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का कारण बनता है.''
पत्रिका पीएलओएस वन के 2017 के एक अध्ययन से पता चला कि तनाव टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम कारक है.
किस तरह करें तनाव की पहचान
तनाव शरीर में कई परेशानियों को जन्म देता है. सिर दर्द या मांसपेशियों में दर्द भी इसका एक लक्षण है. अगर आपके सोने और खाने के पैटर्न में बदलाव हो रहा है तो हो सकता है कि आप तनाव में हों. इसके अलावा थकान या शरीर में कमजोरी भी तनाव का लक्षण है. रक्तचाप, दिल की धड़कन बढ़ना, घबराहट के दौरे पड़ना या हमेशा खतरे का आभास होना और एकाग्रता की कमी भी तनाव के संकेत हैं.
तनाव का विज्ञान
तनाव के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया की कुंजी उसके एंडोक्राइन सिस्टम यानी अंत:स्रावी प्रणाली में है. साथ ही उसमें भी जिसे हाइपोथैलमिक-पिट्यूटरी एड्रीनल (एचपीए) एक्सिस कहा जाता है. हाइपोथैलमस मस्तिष्क का कमान सेंटर है जो मनोदशा, शरीर का तापमान, हृदय गति, खान-पान, यौन इच्छा, ऊर्जा, प्यास और नींद का चक्र सरीखी कई सारी चीजों को दुरुस्त करता है. यह हॉर्मोन के स्राव को भी नियंत्रित करता है. यानी उन रसायनों को जो रक्तप्रवाह के साथ बहते हुए शरीर के तमाम ऊतकों और अंगों तक जाते हैं और कई कामों को सक्रिय करते हैं और उनमें तालमेल बिठाते हैं.
समस्या तब पैदा होती है जब तनाव लंबे वक्त तक रहता है और शरीर में इससे इतना ज्यादा कॉर्टिसोल जमा होने लगता है कि जरा सी भी तनावपूर्ण स्थिति जैसे कि ट्रैफिक जाम से भी इसका स्राव शुरू कर सकता है.
डॉ. मिश्रा कहते हैं, ''कॉर्टिसोल हमारे जिंदा रहने का हॉर्मोन है और हमारे विचारों से नियंत्रित होता है. जब हमारे विचार तनावपूर्ण हो जाते हैं तो शरीर अपनी रक्षा के लिए यह हॉर्मोन छोड़ता है. जब हम लंबे वक्त तक तनाव में रहते हैं तो शरीर में बहुत ज्यादा कॉर्टिसोल जमा होने लगता है और ये हमारी सेहत के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं है.''
तनाव इन अंगों को करता है प्रभावित
मस्तिष्क
कुछ अध्ययनों से पता चला कि तनाव मस्तिष्क की कोशिकाओं को मार सकता है और मस्तिष्क का आकार भी छोटा कर सकता है. शरीर में तनाव से उत्पन्न कॉर्टिसोल की लहरें याददाश्त कमजोर कर देती हैं क्योंकि तनाव के असर से प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स सिकुड़ जाता है
हृदय
शरीर में कॉर्टिसोल के उच्च स्तर से पैदा सूजन हृदय की धमनियों को नुक्सान पहुंचाती है. लंबे समय तक कॉर्टिसोल के संपर्क से रक्तचाप, कोलेस्टेरॉल और ट्राइग्लीसराइड्स बढ़ते हैं. 2019 के एक अध्ययन में सामने आया कि तनाव का संबंध कार्डियोवैस्कुलर बीमारी की जल्द शुरुआत से है.
किडनी
तनाव सीधा किडनी को प्रभावित नहीं करता लेकिन तनाव डायबिटीज का कारण बनता है जो लंबे वक्त में किडनी की गंभीर बीमारी को जन्म देती है.
कैंसर
साल 2021 में पबमेड में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला कि तनाव के हॉर्मोन प्रयोग के लिए इस्तेमाल किए गए चूहे के सुप्त कैंसर कोशिकाओं को जगा सकते थे जिससे तनाव के कारण मनुष्यों में कैंसर के बार-बार होने की संभावना बढ़ जाती है.
तनाव दूर करने के तरीके
दिमाग को सकारात्मक सोच में लगाएं
तनाव को दूर करने के कई तरीके हैं. उदाहरण के लिए अपने दिमाग में यह सोचें कि ग्लास आधा खाली नहीं, आधा भरा है. दिमाग सकारात्मक सोचने लगता है तो तनाव के हॉर्मोन घट जाते हैं क्योंकि शरीर को खतरे का एहसास नहीं होता.
कोई वैकल्पिक इलाज पद्धति आजमाएं
क्रिस्टल और फ्लावर थेरेपी जैसी पद्धतियां नकारात्मक विचार और ऊर्जा को घटाकर शरीर में तनाव कम करने में मदद करती हैं. क्रिस्टल थेरेपी पिछले कुछ सालों में मानसिक तनाव से छुटकारा दिलाने में काफी प्रभावी साबित हुई है. इसमें अलग-अलग तरह के पारदर्शी पत्थरों या ट्रांसपेरेंट क्रिस्टल का उपयोग किया जाता है. ये सभी क्रिस्टल हीट कंडक्टर और ऊर्जा के अच्छे सुचालक होते हैं.
कोई हमदर्द तलाशें
किसी से अपनी भावनाएं साझा करने से आप तनाव की स्थितियों से बाहर निकलते हैं या उन लोगों से दूर हो जाते हैं जो आपके तनाव का कारण हैं.
हंसने-खुश रहने के बहाने खोजें
अध्ययनों से पता चला है कि हंसने से तनाव पैदा करने वाले हॉर्मोन का स्राव कम होता है. हंसना-मुस्कुराना आपकी सेहत पर सकारात्मक असर डालता है.
अपनी खुशी का काम करें
तनाव से दूर रहने के लिए अपने लिए समय निकालें और अपनी पसंद का काम करें. जो कुछ आपको खुशी देता है, वह करने से अपने आप शरीर में तनाव के हॉर्मोन संतुलित हो जाते हैं.
ध्यान और प्राणायाम करें
ध्यान करने और सांस को नियंत्रित करने से तनाव का एहसास कम हो जाता है और बेतुके ख्याल आना बंद हो जाते हैं. इससे रक्तचाप भी घटता है. ध्यान और प्राणायाम शरीर के साथ ही मानसिक बीमारियों को दूर करने के लिए बहुत अच्छा तरीका है.