ये बात किसी से छिपी नहीं है कि सिगरेट और गांजा पीने से लोगों की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है. ये दोनों ही चीजें फेफड़ों के लिए हानिकारक हैं, लेकिन एक लेटेस्ट रिसर्च में हुए खुलासे ने सबके होश उड़ा दिए हैं. एसोसिएशंस ऑफ कैनाबिस (Associations of cannabis) नामक इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने सिगरेट और गांजे से दिमाग पर होने वाले बुरे असर के बारे में खुलासा किया है. उनका कहना है कि तंबाकू और गांजे का सेवन हमारे दिमाग को समय से पहले ही बूढ़ा बना रहा है और उसे सिकोड़ रहा है.
किंग्स कॉलेज लंदन और यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ के रिसर्चर्स ने 72,000 से ज्यादा लोगों पर हुई 100 अलग-अलग स्टडीज की गहराई से जांच की. इस जांच में जो नतीजे सामने आए वो हैरान कर देने वाले थे. ये सिर्फ एक खराब आदत नहीं है, बल्कि एक बड़ी चेतावनी है कि ये आपके दिमाग के काम करने के तरीके को भी बदल सकती है.
दिमाग के किन हिस्सों पर होता है असर?
रिसर्च में पता चला है कि सिगरेट दिमाग के उन खास हिस्सों को नुकसान पहुंचाती है जो आपकी भावनाओं और याददाश्त को कंट्रोल करते हैं.
इमोशन्स और डर (Amygdala): रिसर्च में गांजा पीने वालों में दिमाग का ये हिस्सा छोटा पाया गया, जो डर, चिंता और कोई भी मुश्किल फैसला लेने की क्षमता को कंट्रोल करता है.
याददाश्त और सीखना (Hippocampus): अगर लोग तंबाकू ज्यादा खाते हैं तो इसकी वजब से दिमाग का ये हिस्सा सिकुड़ जाता है, जिससे चीजें याद रखने में दिक्कत हो सकती है.
बॉडी अवेयरनेस (Insula): स्टडी में ये भी सामने आया है कि तंबाकू का असर उस हिस्से पर भी पड़ता है जो आपको भूख, प्यास या दर्द का अहसास कराता है.
सोचने की शक्ति (Grey Matter): तंबाकू की वजह से पूरे दिमाग का 'ग्रे मैटर' कम हो सकता है, जो हमारी सोचने-समझने की मुख्य शक्ति है.
जितनी ज्यादा सिगरेट, उतना ज्यादा खतरा
इस स्टडी में ये भी पाया गया है कि कोई जितनी ज्यादा और जितने लंबे समय तक सिगरेट पीते हैं खतरा उतना ज्यादा बढ़ता जाता है. आप जितनी ज्यादा सिगरेट पीते हैं आपके दिमाग के सिकुड़ने का खतरा उतना ही बढ़ता जाता है. खासतौर पर तंबाकू के मामले में ये असर और भी ज्यादा क्लियर है. रिसर्च के अनुसार, जितनी ज्यादा सिगरेट पी जाती है, उतना ही दिमाग का याददाश्त वाला हिस्सा यानी हिप्पोकैम्पस धीरे-धीरे छोटा होने लगता है.
धुआं दिमाग को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, जब तंबाकू या गांजा जलता है, तो इसे कंबशन (जलने की प्रक्रिया) कहते हैं. इस दौरान धुएं में हानिकारक तत्व निकलते हैं, जिन्हें रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीसीज कहा जाता है. ये दिमाग में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन बढ़ाते हैं. इससे दिमाग के सेल्स यानी न्यूरॉन्स कमजोर होकर धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं और मरने लगते हैं.
क्या कभी-कभार पीने वालों को भी चिंता करनी चाहिए?
रिसर्च ज्यादातर उन लोगों पर की गई है जो लंबे समय से या रोजाना सिगरेट पीते हैं. कभी-कभार पीने वालों पर इसका असर तुरंत ज्यादा नहीं दिखता. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि दिमाग में बदलाव धीरे-धीरे होते हैं और कई बार सालों बाद पता चलते हैं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब सिर्फ फेफड़ों या कैंसर ही नहीं, बल्कि ब्रेन हेल्थ के बारे में भी पता होना जरूरी है. तंबाकू और गांजे को मिलाकर पीना और भी ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है. जिसे छोटे-छोटी आदत समझा जाता है, वही आगे चलकर दिमाग पर स्थायी असर डाल सकती है.