Chronic kidney disease: किडनी की समस्या धीरे-धीरे आम होती जा रही है और अब सिर्फ बुजुर्गों को किडनी की दिक्कत नहीं हो रहा है. बल्कि कम उम्र के लोगों में भी क्रोनिक किडनी डिजीज के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. मलेशिया में युवाओं के बीच किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि अब 40 साल की उम्र में ही कई लोग किडनी फेल्योर का शिकार हो रहे हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, खराब लाइफस्टाइल, गलत खानपान औरफिजिकल एक्टिविटी की कमी इसके सबसे बड़े कारण बनते जा रहे हैं.
अप्रैल 2025 में एनवायरनमेंट बिहेवियर प्रोसिडिंग जर्नल में पब्लिश हुए एक क्रॉस-सेक्शनल स्टडी में मलेशिया के दो राज्यों के 1,391 वयस्कों को शामिल किया गया. इस स्टडी में पाया गया कि देश में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के मामले ज्यादा होने के बावजूद आम लोगों में इसकी जानकारी बेहद कम है. यही वजह है कि बीमारी समय रहते पकड़ में नहीं आती.
बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन कोच और फिटनेस ट्रेनर मिलो याप ने अपने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में इस गंभीर समस्या पर खुलकर बात की. उन्होंने लिखा, 'हफ्ते में तीन बार, हर बार चार घंटे..जिंदगी भर के लिए. यही है डायलिसिस. वह सिर्फ 40 साल का है, उसकी किडनी फेल हो चुकी है. लोग कहते हैं, ‘इतनी कम उम्र में?’ लेकिन किडनी की बीमारी उम्र नहीं देखती.'
मिलो याप के मुताबिक, हाई ब्लड शुगर सीधे किडनी को नुकसान पहुंचाती है. कई लोग सालों तक प्री-डायबिटिक रहते हैं और उन्हें पता ही नहीं चलता. जब तक लक्षण दिखते हैं, तब तक किडनी लगभग 80 प्रतिशत तक खराब हो चुकी होती है. किडनी फेल्योर की सबसे बड़ी वजह डायबिटीज ही है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि जब तक कोई तकलीफ नहीं है, सब ठीक है. लेकिन हाई ब्लड प्रेशर बिना लक्षण के किडनी की बारीक नसों को नुकसान पहुंचाता रहता है, जिससे धीरे-धीरे उनकी कार्यक्षमता खत्म हो जाती है.
सिरदर्द, बॉडी पेन या हैंगओवर में लोग बिना सोचे-समझे पेनकिलर (जैसे पैरासिटामोल, आइबुप्रोफेन) ले लेते हैं. लंबे समय तक इन दवाओं का सेवन किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.
जिम जाने वाले प्री-वर्कआउट ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स और अनरेगुलेटेड सप्लीमेंट्स लेते हैं. इनमें मौजूद कुछ तत्व किडनी के लिए जहरीले साबित हो सकते हैं.इसलिए किसी सप्लीमेंट्स के बारे में बिना जांच किए उसे लेकर आप अपनी किडनी को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
पर्याप्त पानी न पीना, सिर्फ कॉफी या चाय पर निर्भर रहना और जरूरत से ज्यादा हाई-प्रोटीन डाइट लेना किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालता है. इससे स्टोन, डैमेज और आखिरकार किडनी फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है.
मिलो याप बताते हैं कि अगर इनमें से दो या ज्यादा लक्षण दिखें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए:
आखिर में मिलो याप ने चेतावनी देते हुए कहा कि आपकी किडनी हर दिन लगभग 200 लीटर खून फिल्टर करती है. जब ये काम करना बंद कर देती हैं, तो शरीर खुद ही जहर बन जाता है. ज्यादातर मामलों में किडनी फेल्योर रोका जा सकता है, बस समय रहते सही कदम उठाने की जरूरत है.