घी सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है लेकिन जब यही घी आपकी सेहत को नुकसान पहुंचाने लगे तो हर किसी के मन में डर बैठ जाता है. हमेशा से ही बाजार में मिलने वाले घी की शुद्धता पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं लेकिन अब मिलावटखोरों ने एक ऐसा नया और खतरनाक तरीका ढूंढ लिया है जिसने वैज्ञानिकों को भी चिंता में डाल दिया है. आईआईटी (बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी) के रिसर्चर्स ने अपनी नई रिसर्च में खुलासा किया है कि गाजर के पिगमेंट (बीटा-कैरोटीन) का इस्तेमाल करके पाम ऑयल या सूअर की चर्बी को हूबहू गाय के असली घी जैसा बनाया जा सकता है.
हैरान करने वाली बात यह है कि इस मिलावट के बाद यह नकली घी बड़े-बड़े लैबोरेट्री टेस्ट को भी आसानी से चकमा दे देता है.
कैसे फेल हो रहे हैं क्वालिटी टेस्ट?
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, आमतौर पर फूड रेगुलेटर्स और लैब्स गाय के घी की शुद्धता जांचने के लिए रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी नाम की एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं. इस टेस्ट में बीटा-कैरोटीन के खास सिग्नल्स को देखा जाता है, जो प्राकृतिक रूप से केवल गाय के दूध से बने घी में मिलते हैं.
नोबेल पुरस्कार विजेता सी.वी. रमन के नाम पर नामित रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी को एक असरदार गुणवत्ता परीक्षण माना जाता है. यह किसी पदार्थ की सटीक रासायनिक संरचना, क्रिस्टलीय संरचना और शुद्धता को सत्यापित करने के लिए एक फिंगरप्रिंट के रूप में कार्य करता है
कैसे फेल हुए लैब टेस्ट?
अब तक माना जाता था कि असली गाय के घी की पहचान बीटा-कैरोटीन के तीन खास सिग्नल्स 1006, 1157 और 1520 -1 से होती है जो सिर्फ असली घी में मिलते हैं. लेकिन रिसर्चर्स ने पाम ऑयल और सूअर की चर्बी में गाजर का अर्क मिलाकर लैब टेस्ट में हूबहू यही सिग्नल जनरेट कर दिए. गाजर का रंग मिलते ही पाम ऑयल और चर्बी का रंग बदलकर बिल्कुल असली घी जैसा पीला-नारंगी हो गया यानी यह दिखने और लैब टेस्ट दोनों में असली घी जैसा बन गया.
वैज्ञानिकों ने पाया कि 1 ग्राम चर्बी में सिर्फ 0.22 मिलीग्राम गाजर का अर्क मिलाने पर भी लैब का 'रमन टेस्ट' धोखा खा जाता है और उसे असली घी बताने लगता है. जब वैज्ञानिकों ने एक और एडवांस टेस्ट (FTIR स्पेक्ट्रोस्कोपी) किया तब जाकर पोल खुली. इस टेस्ट में पता चला कि अंदर का फैट बदला नहीं है, वह पाम ऑयल या चर्बी ही है. बस ऊपर से गाजर का रंग मिलाकर लैब को झांसा दिया गया है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने यह रिसर्च मिलावटखोरों की मदद के लिए नहीं, बल्कि टेस्टिंग सिस्टम की कमजोरी (लूपहोल) को सामने लाने के लिए की है. सिर्फ एक टेस्ट के भरोसे रहने से बाजार में नकली घी का खेल बढ़ता रहेगा, जिसका सीधा असर लोगों की सेहत और अन्य भावनाओं पर पड़ेगा.
सेहत के लिए कितना बड़ा खतरा?
गाजर सेहत के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि गाजर के मिक्सचर वाला यह नकली घी आपके लिए फायदेमंद है. रिसर्चर्स के मुताबिक, मिलावटखोर गाजर का इस्तेमाल सिर्फ असली रंग और केमिकल सिग्नल की नकल करने के लिए एक मास्किंग एजेंट के रूप में कर रहे हैं.
नकली घी का बेस पाम ऑयल या खतरनाक ट्रांस-फैट वाली चीजें होती हैं जो आपके दिल की सेहत को सीधा नुकसान पहुंचा सकती हैं.
घी असली है या नकली, इन 5 प्वाइंट्स से समझें
हथेली पर टेस्ट: थोड़ा सा घी अपनी हथेली पर रखें. अगर यह शरीर की गर्मी से तुरंत पिघलने लगे तो असली है और यदि जमा रहे तो इसमें मिलावट है.
गर्म करने पर रंग: एक चम्मच घी को बर्तन में गर्म करें. अगर घी तुरंत पिघलकर गहरे भूरे रंग का हो जाए तो शुद्ध है. देर से पिघलना और पीला या सफेद बना रहना नकली होने की निशानी है.
आयोडीन टेस्ट (स्टार्च की पहचान): पिघले हुए घी में दो बूंद आयोडीन सॉल्यूशन मिलाएं. अगर घी का रंग नीला हो जाता है तो समझ लें कि इसमें आलू या स्टार्च मिलाया गया है.
फ्रिज टेस्ट (तेल की मिलावट): कांच के जार में पिघला हुआ घी डालकर फ्रिज में रख दें. जमने के बाद अगर घी में दो अलग-अलग परतें (Layers) दिखाई दें तो इसका मतलब इसमें पाम ऑयल या अन्य तेल मिक्स है.
खुशबू और टेक्सचर: असली घी छूने में दानेदार होता है और इसकी एक खास सोंधी खुशबू होती है. नकली घी चिपचिपा, मोम जैसा लग सकता है और उसमें से खुशबू नहीं आती.