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क्या कैंसर पैदा कर रही हैं गर्भनिरोधक गोलियां? पिल्स खाने वाली महिलाएं जरूर जानें

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि WHO ने गर्भनिरोधक गोलियों को सिगरेट की तरह कैंसर पैदा करने वाला 'ग्रुप-1 कार्सिनोजेन' घोषित किया है. इस दावे में कितनी सच्चाई है, इस बारे में आर्टिकल में जानेंगे.

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सोशल मीडिया पर इन दिनों गर्भनिरोधक दवाओं को लेकर दावा फैल फैल रहा है. (Photo: ITG)
सोशल मीडिया पर इन दिनों गर्भनिरोधक दवाओं को लेकर दावा फैल फैल रहा है. (Photo: ITG)

आए दिन सोशल मीडिया पर कई चीजें वायरल होती रहती हैं. कई चीजें सही होती हैं तो कई में गलत दावे किए जाते हैं. हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बात तेजी से वायरल हो रही है जिसमें बर्थ कंट्रोल पिल को लेकर दावा किया जा रहा है, ''WHO ने गर्भनिरोधक गोलियों को 'ग्रुप-1 कार्सिनोजेन' यानी कैंसर पैदा करने वाले तत्वों की श्रेणी में डाल दिया है. वायरल पोस्ट्स में इसकी तुलना सिगरेट, तंबाकू और एस्बेस्टस जैसे जानलेवा पदार्थों से की जा रही है, जिससे उन करोड़ों महिलाओं में डर का माहौल है जो इन गोलियों का इस्तेमाल करती हैं.

लेकिन क्या वाकई ये गोलियां इतनी खतरनाक होती हैं जितना इन्हें बताया जा रहा है? सच यह है कि इस दावे में आधी सच्चाई है और आधा भ्रम. 

दरअसल, डेटा बताता है कि हॉर्मोनल पिल कुछ तरह के कैंसर का जोखिम बढ़ाती भी हैं और कुछ का खतरा घटाती भी हैं. WHO की ये बात अभी की नहीं बल्कि 27 साल पुरानी है. आइए इस बात को पूरी तरह समझते हैं.

क्या है वायरल दावे का सच?

WHO की एक स्पेशल ऑर्गनाइजेशन इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने गर्भनिरोधक गोलियों को 'ग्रुप-1' श्रेणी में रखा जरूर है लेकिन यह कोई अभी की बात नहीं है. असल में, WHO ने यह फैसला आज से करीब 27 साल पहले यानी 1999 में लिया था.

हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ इन्फ्लुएंसर्स और कंजर्वेटिव अकाउंट्स ने इसे 'ब्रेकिंग न्यूज' की तरह पेश करना शुरू कर दिया, जिससे भ्रम फैल गया. यह गोलियां एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन हार्मोन के मेल से बनती हैं और इन्हीं हार्मोन्स के शरीर पर असर के कारण इन्हें इस सूची में शामिल किया गया था. 

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पिल्स और सिगरेट को जो एक ही कैटेगरी में रखने का दावा किया जा रहा है यानी दोनों का खतरा एक समान है, इस दावे के कारण लोगों में काफी भ्रम है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. IARC किसी भी चीज को ग्रुप-1 में तब रखता है जब उसके कैंसर पैदा करने के 'पुख्ता सबूत' मिल जाते हैं. यह इस आधार पर नहीं होता कि वह चीज कितनी खतरनाक है. तंबाकू से होने वाले कैंसर का जोखिम और गर्भनिरोधक गोलियों से जुड़ा जोखिम जमीन-आसमान का अंतर रखता है.

IARC की स्पोकपर्सन वेरोनिक टेरेस के मुताबिक, यह हेजार्ड क्लासिफिकेशन है जो सिर्फ इतना कहता है कि किसी लेवल या कुछ स्थितियों में यह एजेंट कैंसर पैदा कर सकता है, लेकिन यह नहीं बताता कि असल जिंदगी में कुल जोखिम कितना बढ़ता है. इसी वजह से पिल उसी ग्रुप में है जिसमें एस्बेस्टस, शराब, धूप, सिगरेट और सेकंड हैंड स्मोक भी हैं. लेकिन एक ही ग्रुप में होना यह साबित नहीं करता कि इन सबका कैंसर रिस्क बराबर लेवल का है इसलिए पिल्स और लगातार स्मोकिंग को सीधे-सीधे बराबर रखना गलत तुलना है.

क्या गर्भनिरोधक गोलियों से कैंसर का रिस्क है?

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि इन गोलियों का शरीर पर 'मिश्रित असर' होता है. PolitiFact की रिपोर्ट का कहना है कि 2008 के बाद भी रिसर्च यह दिखाती है कि हॉर्मोनल पिल से कुछ कैंसर का जोखिम हल्का बढ़ता है और कुछ कम भी होता है.

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ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर

2024 में Frontiers in Global Women’s Health में पब्लिश हुए रिव्यू के मुताबिक, हॉर्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर का जोखिम कुछ बढ़ा हुआ पाया गया था. लेकिन ये खतरा उन महिलाओं में था जिन्होंने लंबे समय तक इस गोली का इस्तेमाल किया था या वो हाई-रिस्क जीन (जैसे BRCA1/BRCA2) में थीं.

ओवरी और एंडोमेट्रियल (बच्चेदानी की अंदरूनी परत) कैंसर

2024 वाली इसी स्टडी में यह भी पाया गया था कि हॉर्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव, खासकर कॉम्बाइंड पिल, ओवरी और एंडोमेट्रियल कैंसर के खतरे को कम करते हैं. कई मामलों में तो गोलियां छोड़ने के सालों बाद तक यह सुरक्षा कवच बना रहता है.

WHO ने 2025 की अपनी फैक्ट शीट में पिल को 'अनइंटेंडेड और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी को रोकने के सबसे प्रभावी उपायों में से एक' और 'महिलाओं की सेहत सुधारने तथा मातृ मृत्यु घटाने वाली बड़ी पब्लिक हेल्थ उपलब्धि' बताया है. 

डॉक्टरों की सलाह

एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी दवा के साइड इफेक्ट्स होते हैं लेकिन उस पर किए जा रहे गलत दावों की गहराई से भी जांच करनी चाहिए. जैकोब्स इंस्टीट्यूट ऑफ विमेंस हेल्थ की लिज बोरकोव्स्की के अनुसार, अनचाही प्रेग्नेंसी और असुरक्षित अबॉर्शन के अपने खतरे होते हैं. गर्भनिरोधक गोलियां मातृ मृत्यु दर को कम करने में दुनिया भर में एक बड़ा हथियार साबित हुई हैं.

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अगर आप इन गोलियों का सेवन कर रही हैं तो घबराने के बजाय अपनी मेडिकल हिस्ट्री के साथ डॉक्टर से सलाह लें. कुल मिलाकर, WHO का क्लासिफिकेशन साइंस और रिसर्च पर आधारित है. और यह आपको जागरुक करने के लिए है ना कि डराने के लिए.

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