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फैक्ट चेक: नीली आंखों की वजह से बच्चे की पिटाई की झूठी कहानी वायरल

सोशल मीडिया पर नीली आंखों वाले बच्चे की एक विचलित करने वाली तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें उसकी आंखों के नीचे चोट लगी है और वहां पर टांके लगे हैं. तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि 12 साल के स्वीडिश बच्चे को एक मुस्लिम आप्रवा​सी ने इसलिए पीटा क्योंकि उसकी आंखें नीली थीं.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
एक 12 वर्षीय स्वीडिश बच्चे की फोटो जिसकी नीली आंखों को लेकर एक मुस्लिम आप्रवासी ने उसे पीटा.
वेबसाइट “Daily Political News” और सोशल मीडिया यूजर
सच्चाई
फोटो में दिख रही बच्ची यूके के कार्डिफ की है, 2008 में उस पर कुत्ते ने हमला किया था.

सोशल मीडिया पर नीली आंखों वाले बच्चे की एक विचलित करने वाली तस्वीर वायरल हो रही है. जिसमें उसकी आंखों के नीचे चोट लगी है और वहां पर टांके लगे हैं. तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि 12 साल के स्वीडिश बच्चे को एक मुस्लिम आप्रवा​सी ने इसलिए पीटा क्योंकि उसकी आंखें नीली थीं.

यह दावा एक वेबसाइट “” ने किया है. वेबसाइट पर अंग्रेजी में प्रकाशित लेख में घायल बच्चे की तस्वीर लगाई है और शीर्षक दिया है, “स्वीडिश बच्चे को नीली आंखों के लिए मुस्लिम आप्रवासी ने पीटा”. लेख में कहा गया है कि यह घटना स्वीडन के शहर हेल्सिंगबर्ग में हुई और “उदारवादी जजों” के चलते यह घटना घृणा अपराध के तौर पर दर्ज नहीं हुई.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि यह आर्टिकल भ्रामक है. तस्वीर में जो बच्चा दिख रहा है वह दरअसल एक 4 साल की बच्ची की फोटो है. यूनाइटेड किंगडम के कार्डिफ में उसके घर पर ही उसे रॉटवेलर ब्रीड के कुत्ते ने काट लिया था. यह घटना 2008 की है, जब वह 4 साल की थी.

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ट्विटर पर “David Vance” नाम के एक ब्लू टिक वाले यूजर ने यह भ्रामक लेख शेयर करते हुए लिखा, “क्या नीली आंखें हराम हैं?” इस ट्वीट को 8,400 लोगों ने लाइक किया है और इसे 7000 से ज्यादा बार रीट्वीट किया गया है.

Vance के ट्वीट के स्क्रीनशॉट को कुछ और अन्य यूजर्स ने भी शेयर किया है. जब कुछ यूजर्स ने टिप्पणी की कि यह खबर फर्जी है तो Vance ने जवाब दिया कि उन्होंने “स्वीडन में एक छोटे से बच्चे पर हमले को लेकर चिंता जाहिर करते हुए ​ट्वीट किया है” और “लेख के साथ जो फोटो है वह इससे जुड़ी नहीं है”.

AFWA की पड़ताल

रिवर्स सर्च टूल की मदद से हमने पाया कि वायरल हो रही यह फोटो कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में छप चुकी है. के मुताबिक, तस्वीर में घायल बच्ची दिख रही है. वह कार्डिफ की 4 वर्षीय सोफी विलिस है, जिस पर कैजर नाम के रॉटवेलर प्रजाति के कुत्ते ने हमला कर दिया था. यह घटना 2008 की है. ने भी इस बारे में खबर प्रकाशित की थी.

2016 में भी ऐसा ही दावा किया जा चुका है जब अंतरराष्ट्रीय फैक्ट चेक वेबसाइट “ ” ने 2016 में ही इस दावे की पोल खोली थी. “Snopes” की रिपोर्ट कहती है कि बच्चे की नीली आंखों के कारण उसे एक मुस्लिम किशोर के पीटने वाली स्टोरी एक स्वीडिश न्यूजपेपर “ ” ने 2013 में छापी थी.

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“Fria Tider” के मुताबिक, एक 15 वर्षीय किशोर ने अपने साथी छात्र को आंखों के रंग को लेकर हुए मतभेद के चलते पीटा था. हालांकि, आरोपी ने दावा किया कि भाषा की जानकारी कम होने के चलते उसे भ्रम हुआ क्योंकि उसकी भाषा अरबी है. हालांकि, इस लेख में इस बात का जिक्र नहीं है कि पीटने वाला लड़का मुस्लिम अप्रवासी है या फिर दोनों के बीच हुए झगड़े में किसी को गंभीर चोट आई थी.

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सच जानने के लिए उसे हमारे नंबर 73 7000 7000 पर भेजें.
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