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वकील की हत्या के केस में अब घिरे इमरान खान, भुट्टो को फांसी पर चढ़ाने से पहले ऐसा ही केस हुआ था दर्ज

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान बुरी तरह से मुश्किलों में फंसते जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के एक वकील की हत्या के मामले में इमरान खान पर एंटी-टेररिज्म कानून के तहत केस दर्ज किया गया है. इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने इसकी जानकारी दी.

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इमरान खान .(फाइल फोटो)
इमरान खान .(फाइल फोटो)

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की परेशानियां बढ़ती ही जा रहीं हैं. इमरान खान पर अब एंटी-टेररिज्म कानून के तहत केस दर्ज किया गया है. ये मामला सुप्रीम कोर्ट के एक वकील की हत्या से जुड़ा है. 

इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने इस बात की जानकारी दी है. पीटीआई ने इस बात की पुष्टि की है कि शहीद जमीनल कक्कड़ पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर में इमरान खान का भी नाम है.

क्या है मामला?

सुप्रीम कोर्ट के वकील अब्दुल रज्जाक शार की मंगलवार को हत्या कर दी गई थी. अब्दुल रज्जाक जब हाईकोर्ट जा रहे थे, तभी रास्ते में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी. ये हमला बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में हुआ था.

इमरान का नाम क्यों?

अब्दुल रज्जाक के बेटे सिराज अहमद ने मंगलवार को अपने पिता की हत्या के मामले में एफआईआर दर्ज करवाई है. सिराज ने आरोप लगाया है कि इमरान खान के इशारे पर उनके पिता की हत्या की गई.

एफआईआर के मुताबिक, सिराज का आरोप है कि उनके पिता ने इमरान खान के खिलाफ केस दर्ज करवाया था और इसके बाद उन्हें धमकियां मिल रही थीं. सिराज ने दावा किया है कि इमरान खान के कहने पर उनके पिता को धमकाया जा रहा था.

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कैसा केस...?

दरअसल, अब्दुल रज्जाक शार ने इमरान खान और पूर्व डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी के खिलाफ बलूचिस्तान हाईकोर्ट में एक केस दायर किया है. 

ये मामला अप्रैल 2022 में पाकिस्तानी संसद भंग करने से जुड़ा है. अप्रैल 2022 में विपक्ष जब इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया था, तब डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी ने संसद भंग कर दी थी. हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर संसद को फिर से बहाल किया गया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया और इसके बाद इमरान की सरकार गिर गई.

अब्दुल रज्जाक शार ने संसद भंग करने के फैसले को असंवैधानिक बताते हुए बलूचिस्तान हाईकोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 6 के तहत केस दर्ज करवाया था. 

पीटीआई का क्या है कहना?

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के करीबी अताउल्लाह तरार ने आरोप लगाया है कि देशद्रोह के एक मामले में जवाबदेही से बचने के लिए इमरान खान के इशारे पर अब्दुल रज्जाक शार की हत्या की गई.

वहीं, पीटीआई प्रवक्ता रऊफ हसन ने इस आरोपों को खारिज किया है. हसन ने प्रधानमंत्री शरीफ और गृहमंत्री राणा सनाउल्लाह पर हत्या की प्लानिंग करने का आरोप लगाया है.

इमरान खान के पास अब क्या रास्ता?

इमरान खान जब से सत्ता से बाहर हुए हैं, तब से ही उनकी परेशानियां बढ़ती जा रहीं हैं. उनके खिलाफ 100 से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं.

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6 जून को ही इस्लामाबाद के कोहसर पुलिस थाने में इमरान खान के खिलाफ धोखाधड़ी का एक नया केस दर्ज हुआ है. ये मामला तोशखाना के तोहफों की खरीद के लिए फर्जी रसीद का इस्तेमाल करने से जुड़ा है.

इस मामले में इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी और उनके पूर्व करीबियां शहजाद अकबर और जुल्फी बुखारी, बुशरा बीबी की दोस्त फराह गोगी को भी नामजद किया गया है. 

इतना ही नहीं, कई मामलों में इमरान के खिलाफ एंटी-टेररिज्म लॉ की धाराएं भी जोड़ी गईं हैं. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के वकील की हत्या के मामले में भी एंटी-टेररिज्म कानून के तहत केस दर्ज किया गया है. इससे पहले एक जज को धमकाने के मामले में भी उन पर एंटी-टेररिज्म कानून के तहत मामला दर्ज हो चुका है.

एंटी-टेररिज्म कानून के तहत दर्ज मामलों में बचने के लिए इमरान खान को फिलहाल जमानत का ही आसरा है. लेकिन इस कानून के तहत दर्ज मामलों में आरोपी को तभी जमानत मिलती है, जब अदालत में वो खुद मौजूद होता है. यानी, इस मामले में जमानत लेने के लिए इमरान खान को खुद अदालत में पेश होना होगा. 

हालांकि, सरकार अगर उन्हें गिरफ्तार करना चाहे तो फिर कोई भी उसके रास्ते में रुकावट नहीं बन सकता. 

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जुल्फिकार अली भुट्टो का भी ऐसा ही था मामला

अभी जिस तरह से इमरान खान पर हत्या करवाने का इल्जाम लगा है, ठीक ऐसा ही पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो पर भी लगा था. 

दरअसल, 10 और 11 नवंबर 1974 की रात को मोहम्मद अहमद खान कसूरी पर हमला हुआ था. जिस समय ये हमला हुआ था, उस समय उनके साथ कार में उनके बेटे अहमद रजा कसूरी, पत्नी और साली भी बैठी थी.

हमलावरों ने कार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं. इसमें मोहम्मद अहमद खान कसूरी की मौत हो गई थी. अहमद रजा कसूरी ने अपने पिता की हत्या के मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के खिलाफ केस दर्ज करवाया.

इस मामले की जांच चल ही रही थी कि तभी उस समय के सेना प्रमुख जनरल जिया उल-हक ने जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार का तख्तापलट कर दिया. जनरल उल-हक ने मार्शल लॉ लगा दिया और भुट्टो को जेल में डाल दिया.

18 मार्च 1978 को लाहौर हाईकोर्ट ने भुट्टो को अहमद खान कसूरी की हत्या का दोषी पाया और फांसी की सजा सुनाई. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा लेकिन कोई राहत नहीं मिली. आखिरकार 4 अप्रैल 1979 को भुट्टो को फांसी पर चढ़ा दिया गया.

 

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