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अमित शाह ने बताया, CAA के संदर्भ में नेहरू, राजेंद्र प्रसाद मनमोहन सिंह ने क्या कहा?

गृह मंत्री अमित शाह देश के नंबर वन न्यूज चैनल आजतक के 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण के दूसरे दिन मंच पर पहुंचे तो कई सवालों से उनका सामना हुआ. उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार ने जो भी फैसले लिए हैं वो संविधान के दायरे में रहकर लिया.

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अमित शाह, गृह मंत्री (फोटो- शेखर घोष, इंडिया टुडे)
अमित शाह, गृह मंत्री (फोटो- शेखर घोष, इंडिया टुडे)

  • पाकिस्तान में रह रहे हिंदू और सिख, यदि वहां नहीं रहना चाहते, तो नि:संदेह भारत आ सकते हैं- गांधी
  • कांग्रेस पाकिस्तान के उन सभी गैर मुस्लिमों को पूर्ण सुरक्षा देने के लिए बाध्य है- कांग्रेस पार्टी का प्रस्ताव

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हो रहा है. ऐसे में जब गृह मंत्री अमित शाह देश के नंबर वन न्यूज चैनल आजतक के 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण के दूसरे दिन मंच पर पहुंचे तो कई सवालों से उनका सामना हुआ. उन्होंने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि मोदी सरकार ने जो भी फैसले लिए हैं वो संविधान के दायरे में रहकर लिया.

अमित शाह ने इस बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, पूर्व राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने क्या कहा?

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'जवाहर लाल नेहरू- हमें राजनीतिक सीमाओं के कारण हमसे दूर हो चुके अपने भाईयों-बहनों जो देख रहे हैं और इस समय स्वतंत्रता सामरोह में शामिल नहीं हो सकते हैं. उनकी भी चिंता है. चाहे कुछ भी हो जाए वो हमारे हैं और हमेशा हमारे ही रहेंगे. उनके सुख-दुख में हम समान रूप से सहभागी होंगे और वो जब भी आना चाहेंगे हम उन्हें स्वीकार करेंगे.'

'राजेंद्र प्रसाद ने अपने शपथग्रहण के वक्त कहा- हम उन विस्थापित व्यक्तियों को पुनर्स्थापित करने के लिए व्यग्र हैं, जो काफी कठिनाई और असुविधा झेल रहे हैं. वो कभी भी यहां आएं उनका स्वागत है.

'कांग्रेस पार्टी का प्रस्ताव- 25 नवंबर 1947, कांग्रेस कार्यकारिणी ने निम्नलिखित संकल्प अंगीकार किया. कांग्रेस पाकिस्तान के उन सभी गैर मुस्लिमों को पूर्ण सुरक्षा देने के लिए बाध्य है. जो उनके जीवन और सम्मान की रक्षा करने के लिए जो सीमा पार कर के भारत आए हैं या आने वाले हैं.'

'महात्मा गांधी- 7 जुलाई 1947- पाकिस्तान में रह रहे हिंदू और सिख, यदि वहां नहीं रहना चाहते, तो नि:संदेह भारत आ सकते हैं. इस मामले में उनको रोजगार देना, नागरिकता देना और सम्मानपूर्वक सुखकर जीवन देना भारत सरकार का प्रथम कर्तव्य है.'

'मनमोहन सिंह- 18 दिसंबर 2003 को कहा- अल्पसंख्यकों को बांग्लादेश जैसे देशों में उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. अगर हालात इन लोगों को मजबूर करती है तो हमारा नैतिक दायित्व इन अभागे लोगों को नागरिकता प्रदान करना है. इस बारे में सरकार को सोचना चाहिए. 

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