इंडस्ट्री के कुछ एक्टर्स ऐसे रहे, जिन्होंने अपनी एक्टिंग का लोहा निगेटिव रोल में ऐसा मनवाया कि लोग उनसे सचमुच नफरत करने लगे. ऐसी ही एक अदाकारा थीं ललिता पवार. इन्हें लोग हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे क्रूर और निर्दयी विलेन मानते थे. ललिता को खड़ूस और खतरनाक सास का भी टाइटल मिला.
मंथरा के रोल ने दिलाया फेम
उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक रोल निभाए. निगेटिव रोल में ऐसी जान फूंकी कि हर किरदार का अपना व्यक्तित्व बन गया. वो निगेटिव रोल प्ले करने में इतनी जबरदस्त थीं कि वो लोग उनसे डरने लगे थे. उनके सबसे आइकॉनिक विलेन रोल में मंथरा टॉप पर है. ललिता ने रामानंद सागर की रामायण में मंथरा का रोल निभाया था. वो आज भी इस किरदार के लिए जानी जाती हैं. मंथरा के रोल ने उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था. ललिता ने फिल्म 'चतुर सुंदरी' में 17 अलग-अलग रोल निभाए थे. लेकिन क्या आप जानते हैं विलेन के रोल में पहचान बनाने वाली ललिता का सपना तो हीरोइन बनने का था. फिर आखिर ऐसा क्या हुआ जो उनका ये सपना चकनाचूर हुआ था. जानते हैं.
कैसे एक हादसे ने तोड़ा ललिता का सपना
महाराष्ट्र के नासिक में जन्मीं ललिता को बचपन से एक्टिंग का शौक था. एक्टिंग लाइन में जाने के उनके फैसले को पेरेंट्स का साथ मिला. सिर्फ 9 साल की उम्र में मूवी राजा हरिश्चंद्र से उन्होंने एक्टिंग डेब्यू किया. इसके बाद से ललिता ने करियर में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. लेकिन ललिता कभी हीरोइन नहीं बन सकीं. 1942 में मूवी जंग-ए-आजादी की शूटिंग के वक्त उनके साथ हुए हादसे ने पूरी जिंदगी बदल दी थी. सीन में को-एक्टर ने उन्हें इतनी जोर का थप्पड़ मारा कि उनके बाएं आंख की नस फट गई थी. उन्हें फेसियल पैरालाइज हो गया था. 3 साल उनका ट्रीटमेंट चला.
इस एक्सीडेंट से उभरने में उन्हें सालों लगे थे. वो काफी वक्त तक एक्टिंग से दूर रही थीं. बाई आंख खराब होने के चलते उन्हें लीड रोल छोड़कर कैरेक्टर रोल करने पड़े. बाद में इन्हीं रोल्स ने ललिता को स्टार बनाया. मंथरा के रोल ने निगेटिव रोल में उनकी छवि को सशक्त किया. उन्होंने 70 साल में करीबन 700 मूवीज में काम किया. ललिता ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे लंबे समय तक एक्टिंग करने के लिए अपना नाम दर्ज कराया था.
पति से मिला धोखा, आखिरी दिनों में झेला अकेलापान
ललिता की निजी जिंदगी काफी ड्रामैटिक थी. सगी बहन ने उनकी शादी तोड़ी थी. उनके पहले पति गणपत राव का ललिता की बहन संग अफेयर चल रहा था. पति-बहन की करतूत मालूम पड़ने पर ललिता ने शादी तोड़ी. प्रोड्यूसर राजप्रकाश गुप्ता संग दूसरी शादी की. उनका बेटा जय पावर भी प्रोड्यूसर बना. जिंदगी में तमाम झटके खा चुकी ललिता को अंतिम समय में भी दुख झेलना पड़ा था.
उन्हें मुंह का कैंसर डिटेक्ट हुआ. जिसकी वजह से वो घरवालों से दूर पुणे रहने लगीं. वहां वो अकली रहती थीं. जानकारी के मुताबिक, आखिरी पलों में उनके पास कोई नहीं था. तीन दिन तक ललिता की लाश कमरे में पड़ी रही. ललिता पर ढेरों सितम हुए. लेकिन सबसे बड़ी ये ट्रैजिडी हुई कि उन्हें सुकून भरी मौत भी नसीब नहीं हुई.