सास बहू ड्रामा और रियलिटी शोज की बादशाहत के बीच इन दिनों माइक्रो ड्रामा शोज का ट्रेंड बढ़ा है. टीवी के टैलेंटेड एक्टर्स में शुमार करणवीर बोहरा इस स्पेस में एक्टिव हैं. उनका नया शो 'डील तो पागल है' बुलेट ऐप पर स्ट्रीम हो रहा है. इसमें करणवीर अविराज गोयल का रोल प्ले कर रहे हैं. उन्होंने इस शो को एक्टिंग के साथ डायरेक्ट और प्रोड्यूस भी किया है. करणवीर ने शो को माधवी भोजवानी संग मिलकर बनाया है. शो में गीता चौधरी, इशिका मखीजा भी अहम रोल में हैं.
आज तक डॉट इन संग बातचीत करते हुए करणवीर ने अपने इस शो के बारे में बताया. जहां एक ओर टीवी स्टार्स फिल्मों और ओटीटी की तरफ भाग रहे हैं, ऐसे दौर में क्यों करणवीर ने माइक्रो ड्रामा शोज को चुना है? वो कब टीवी स्क्रीन्स पर लौटेंगे? जानें इन सभी सवालों के जवाब...
शो के बारे में बताएं. आपने इसे डायरेक्ट भी किया है. कैसा एक्सपीरियंस रहा?
'डील तो पागल है' शो मैंने और मेरी दोस्त ने मिलकर बनाया है. हम दो पार्टनर हैं. मैं इसमें एक्टिंग भी कर रहा हूं, मैंने शो को अपनी पार्टनर माधवी के साथ मिलकर डायरेक्ट किया है. मेरी पार्टनर ने शो लिखा भी है. माइक्रोड्रामा में अक्सर कोरियन और चाइनीज ड्रामा देखने को मिलता है. माधवी ने इतना शानदार शो लिखा है, ऐसा लगता है यशराज का कोई जेन-जी शो है. शो बहुत स्पंकी, यूथफुल, फैमिली ड्रामा और एंटरटेनिंग है.
फिल्म का टाइटल 'डील तो पागल है' रखने पर करणवीर ने कहा- हम सभी अपनी लाइफ में किसी ना किसी चीज से डील ही कर रहे हैं. बच्चे पेरेंट्स के साथ कर रहे हैं या गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड डील कर रहे हैं. हम हमेशा हर रिश्ते में डील ही करते हैं. बच्चों को कहते हैं अच्छे मार्क्स लाओगे तो गाड़ी मिलेगी, बिजनेस करोगे, शादी करोगे तो कंपनी बढ़ जाएगी. हमेशा एक डील चलती रहती है. उस इमोशंस को लेकर इतनी बढ़िया रॉम-कॉम बनी है. ऐसे रॉम-कॉम माइक्रो ड्रामा स्पेस में पहले कभी नहीं बनी है.
डेली शोज के बजाय माइक्रो ड्रामा बनाने की क्यों ठानी?
जब मुझे इसके लिए पहली बार एक्टिंग का ऑफर मिला, मैंने सोचा माइक्रो ड्रामा अच्छा स्पेस है. ये आगे बहुत ग्रो करेगा. हमने इस अवसर को देखा. माधवी और मैंने सबसे पहले एक कंपनी शुरू की. उसमें मैंने कहा कि हम आपके माइक्रो ड्रामा को प्रोड्यूस और डायरेक्ट करेंगे. उस शो में मैं एक्टिंग भी करूंगा, क्योंकि हमारे पास सेटअप तो है ही. प्रोडक्शन तो हमने पहले भी किया है. डायरेक्शन हमें आता ही है. अब एक अच्छी राइटर भी मिल गई है. तो पूरा पैकेज डील हो गया. तो हमने सोचा क्यों ना हम ये शो खुद से बनाएं. करणवीर ने बताया कि शो 'डील तो पागल है' से पहले उन्होंने दूसरे प्लेटफॉर्म के लिए शो बनाए हैं. लेकिन ओरिजनल शो करने का मजा ही कुछ और है.
-लंबे वक्त से आप किसी रियलिटी शो में नजर नहीं आए हैं. इन शोज से दूरी बनाने की खास वजह?
कोई खास वजह नहीं है. माइक्रो ड्रामा स्पेस में हम इतना अंदर तक घुस चुके हैं कि टाइम ही नहीं है. यहां पर हम बस एक्टिंग ही नहीं कर रहे हैं. इन शोज को हम प्रोड्यूस और डायरेक्ट भी कर रहे हैं. हम महीने के 5 माइक्रो ड्रामा कर रहे हैं. उसी में वक्त चला जाता है. इसका काफी ज्यादा स्कोप है. माइक्रो ड्रामा की जबरदस्त ऑडियंस हो गई है. बुलेट ऐप पर हर हफ्ते लगातार 10 नए ड्रामा आ रहे हैं. हमें ये स्कोप दिखा और मौके को ग्रैब कर लिया. कहते हैं ना पहले आने वालों को फायदा होता है.
-माइक्रो ड्रामा का इतना क्रेज, फिर क्यों बड़े एक्टर्स इन शोज में ज्यादा नहीं दिखते?
दूसरे एक्टर्स अभी समझ नहीं पा रहे हैं कि माइक्रो ड्रामा करें या नहीं करें. एक वक्त वेब सीरीज का ट्रेंड आया. तब बड़े स्टार्स ने इससे दूरी बनाई. आज वही सोच माइक्रो ड्रामा को लेकर है. जो पहले आए और वेब सीरीज में हाथ आजमाया, आज वो छाए हुए हैं. हमारा भी यही मकसद है कि जब प्रोड्यूस करें तो माइक्रो ड्रामा के यशराज बने, एक्टिंग करें तो माइक्रो ड्रामा के अमिताभ बच्चन बने.
-इतने बिजी शेड्यूल के बीच क्या फैंस आपको छोटे पर्दे पर देख पाएंगे?
अगर कोई अच्छा टीवी शो मिलेगा तो उसे जरूर करूंगा. मैं एक वेब सीरीज कर रहा हूं. उसके लिए 15 दिन का समय निकाला है. फिर एक फिल्म भी की, उसके लिए 1 महीने का समय निकाला. दुकान लगातार चलती रहनी चाहिए.
-'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में आपने भी काम किया था. रीबूट वर्जन में कई पुराने एक्टर लौटे हैं. आकाशदीप सहगल की एंट्री हुई है.
मैं आकाशदीप के लिए काफी खुश हूं. लोगों को बस काम करते रहना चाहिए. हमें इतना अच्छा मौका मिला है. मीडियम मिला है. चाहे वो टीवी हो या वेब हो, भले ही माइक्रो ड्रामा क्यों ना हो. सबको इसे करना चाहिए. आने वाले दिनों में बहुत बड़े-बड़े लोग माइक्रो ड्रामा में आएंगे. माइक्रो ड्रामा इसलिए बन रहे हैं क्योंकि लोगों की अटेंशन स्पैन कम हुई है. ये एक ऐसा स्पेस है कि 2 मिनट में एक एपिसोड खत्म. फिर आपको दूसरा देखना है. इसमें हुक्स बहुत सारे हैं. जिस तरह माइक्रो ड्रामा शूट बन रहे हैं, आगे टीवी और सीरीज भी वैसे ही बनेंगी. माइक्रो ड्रामा में पैसे इतने नहीं मिलते. लेकिन हमें क्वॉलिटी पर ध्यान देना होता है. बाद में इस फील्ड में यशराज और रेड चिलीज भी आने वाले हैं.
-लॉकअप शो में कर्ज में डूबने और काम न मिलने का खुलासा किया था. आज 4 साल बाद आपके पास काम की भरमार है. कैसे ये सफर तय किया?
बहुत जरूरी होता है मायूस नहीं होना. उतार-चढ़ाव सबकी जिंदगी में आते हैं. बच्चन साहब ने भी मुश्किल दौर देखा है. मोदी जी की लाइफ में भी उतार चढ़ाव आए हैं. लेकिन मायूस नहीं होना है बस डटे रहना है. आपको अपना लक्ष्य नहीं भूलना है. वो भी समय था निकल गया. अच्छा समय है निकल आता है. बुरा समय भी निकल जाता है. आपको बस स्थिर रहना है. लाइफ की इसी फिलॉसफी ने मुझे हेल्प किया है.