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टीवी

राधा-कृष्ण की भक्ति में लीन करोड़पति एक्टर, नॉन-वेज छोड़ पहनी तुलसी माला, करता है जाप

आध्यात्मिक हुए करण वाही
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टीवी के मशहूर एक्टर करण वाही का झुकाव इन दिनों आध्यात्म की दुनिया की ओर हो गया है. उन्होंने खुद इस बारे में बात की और अपने मन में चल रही उथल पुथल को जाहिर किया है.

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करण टीवी की दुनिया के रिच एंड मोस्ट पॉपुलर एक्टर में गिने जाते हैं. हाल ही में पारस छाबड़ा के पॉडकॉस्ट में वो शामिल हुए जहां उनके गले में कंठी यानी तुलसी माला दिखी.

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करण ने रिवील किया कि पिछले कुछ महीनों से वो आध्यात्मिक हो गए हैं. वो नॉन वेज खाना छोड़ चुके हैं, राधा-कृष्ण का नाम जपते हैं. इससे उनका मन शांत रहता है. 

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करण ने कहा- मेरे काफी दोस्त सरप्राइज हो गए हैं, मुझे कंठी माला पहने देख. किसी ने मुझे कहा नहीं ऐसा करने को, मैंने खुद ही पहना है, बस मन किया मेरा. 4-5 महीने पहले किसी ऐसे ही आदमी ने मुझे कहा था कि तुम्हें गुस्सा बहुत आता है. शांत रहा करो.

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करण ने बताया आगे बताया कि ऐसा नहीं कि मैं स्पिरिचु्अल नहीं था, बस कुछ वक्त के लिए इससे दूर चला गया था. कोई खास वजह भी नहीं थी. 

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करण का झुकाव अपने आप इस ओर हुआ. वो बोले- फिर कुछ महीने पहले मैंने चेक किया कि कैसे मैं वृंदावन से तुलसी की माला ला सकता हूं. मुझे तो ये भी नहीं पता था कि ये दो करके पहनी जाती है. 

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करण को पारस ने इसकी जानकारी दी. डिटेल देते हुए पारस कहते हैं- वो इसलिए कि एक को कहते हैं राधा, और एक को कहते हैं कृष्ण. सिंगल होगी तो कोई मतलब नहीं. डबल करके पहनते हैं तो गले में टच होती है. 

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करण ने इसी के साथ जाहिर किया कि ऐसा करने से उनके आस पास की एनर्जी पॉजिटिव हो गई है. वो कहते हैं- मैंने हाल ही में नाम जप करना शुरू किया है. ये खूबसूरती है स्पिरिचुअलिटी की कि मेरे साथ सब कुछ ठीक चल रहा है.

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करण ने बताया कि वो वृंदावन के वर्ल्ड फेमस प्रेमानंद महाराज के प्रवचन भी सुनने लगे हैं. उन्हें सुनने के बाद पता चला कि नाम जप का मतलब क्या है. ये भी पता चला कि क्यों राधा-कृष्ण साथ में कहा जाता है. इनके मायने क्या हैं.

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करण खुश होकर बताते हैं कि अब जब भी वक्त होता है, जब भी दिमाग इधर-उधर जाता है, या जब भी निगेटिव सोचने लगता हूं तो मैं नाम जप करने लगता हूं.

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