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नाच उठीं बॉलीवुड छमियां

इस साल की कुछेक सबसे बड़ी फिल्में नाजुक कंधों पर सवार होकर आ रही हैं. जीनत अमान के यादगार गीत दम मारो दम को एक नए आक्रामक अंदाज में पेश कर रहीं दीपिका पादुकोण रोहन सिप्पी की इसी नाम की फिल्म के प्रचार की अगुआई करेंगी.

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मल्लिका
मल्लिका

इस साल की कुछेक सबसे बड़ी फिल्में नाजुक कंधों पर सवार होकर आ रही हैं. जीनत अमान के यादगार गीत दम मारो दम को एक नए आक्रामक अंदाज में पेश कर रहीं दीपिका पादुकोण रोहन सिप्पी की इसी नाम की फिल्म के प्रचार की अगुआई करेंगी.

1.5 करोड़ रु. की लागत से तैयार, मल्लिका सहरावत पर फिल्माया रजिया गुंडों में फंस गई गाना अनीस बज्‍मी की कॉमेडी थैंक यू का मोर्चा संभालेगा. साल के आखिर में आने वाला है करीना कपूर की छम्मक छल्लो, जिसके खास सफेद लिबास में फबने की खातिर खुद को तैयार करने के लिए उन्होंने तीन अलग अलग तरह के डाएट प्लान अपनाए.

शाहरुख खान की महत्वाकांक्षी रा.वन का चौतरफा प्रचार शुरू होते ही टीवी पर इसका फुटेज नुमायां होगा. और हां, आमिर खान भी पीछे नहीं हैं. उनके ही बैनर तले बन रही डेल्ही बेली नाम की कॉमेडी में वे डिस्को फाइटर गाते हुए मिथुन चक्रवर्ती की स्टाइल में झूमेंगे मटकेंगे.

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आइटम सांग हिंदी सिनेमा में हाल के दिनों में भारी भीड़ खींचने का बड़ा औजार बनकर उभरे हैं. उनका सीधा निशाना दर्शकों का दिमाग और आंख है. एक समय में एक अंग पर निशाना. दम मारो दम के प्रचार वाले पोस्टरों में पादुकोण कमर पर गोदना गुदाए, झमाझम नाच वाली मुद्रा में हैं. अनिता अदजानिया श्रॉफ का शैलीबद्ध किया और आइटम सांग विशेषज्ञ बॉस्को सी.जर का कोरियोग्राफ किया हुआ यह गाना पहले ही फिल्म से कहीं ज्‍यादा चर्चा में आ चुका है. {mospagebreak}

टेबलॉएड अखबारों में इसने खूब सुर्खियां बटोरीं जब इसके रीमिक्स के लिए देवानंद से इजाजत न लिए जाने पर उनके नाराज होने की बात सामने आई. यह उन्हीं के बैनर तले, 1971 में बनी फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा का गाना था (बाद में पता चला कि संगीत कंपनी सारेगामा से अधिकार खरीद लेने के बाद उनसे इजाजत की जरूरत ही नहीं थी).

गोवा में मादक द्रव्यों के कारोबार पर आधारित सस्पेंस ड्रामे वाली फिल्म को इस गाने ने एक ग्लैमरस रंगत दे दी है. ऐसे में 1.5 करोड़ रु. की इसकी लागत ज्‍यादा नहीं लगती. जयदीप साहनी के लिखे इसके तगड़े तड़के वाले बोल कामुकता की एक नई छौंक का एहसास कराते हैं (आज मेरे लिए चेयर खींच रहा है, कल मेरी स्कर्ट खींचेगा, खींचेगा क्या?).

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अब वे दिन गए, जब चोली के पीछे क्या है सुनकर ही दर्शक रोमांचित हो उठते थे. 1993 में सुभाष घई ने खलनायक का यह गाना फिल्माया तो इसके अश्लील बोलों को लेकर इसके खिलाफ खासा बवंडर खड़ा हो गया था.

आज जब मलैका अरोड़ा खान ऐलान करती हैं कि मुन्नी बदनाम हुई गाने के लिए उनके पास शिल्पा शेट्टी जैसी देह थी और करीना कपूर जैसी अदा, तो किसी को इसमें रत्ती भर भी कोई ऐतराज नहीं होता. न ही कैटरीना कैफ के इन बोलों पर होंठ हिलाने परः आइ नो यू वांट इट बट यू नेवर गोइंग टु गेट इट/ यू नेवर गोइंग टु गेट माइ बॉडी.

नन्हे मुन्नों की बर्थडे पार्टियों से लेकर रात भर चलने वाले डिस्को नाच तक, आधुनिक मांओं से लेकर मॉडर्न युवाओं तक ये गाने सभी की पसंदीदा खुराक बन गए हैं.{mospagebreak}

सालों तक महानगरों के लिए रचे जाने वाले मसालेदार लोकगीतों का गवाह बनने के बाद लगता है सामुदायिक सेक्स आकांक्षाओं की पूरा सोच ही बदल गई है. जब से ऐश्वर्य रॉय अपने भावी ससुर और भावी पति के साथ कजरारे में नाचीं और बिपाशा बसु बीड़ी जलाइ ले पर झूमीं, उसके बाद तो गंवई मि.जाज ने शहराती चोला पहन लिया.

अश्लीलता जब परंपरा के रूप में आगे बढ़ाई जाए तो उसका तंज कम हो जाता है. फिल्मों पर खासा शोध कर चुकीं नसरीन मुन्नी कबीर कहती भी हैं, ''चोली के पीछे  जैसे गाने को कटाक्ष वाले अल्फाज की वजह से अभद्र माना गया जबकि आज के गानों में पूरा खुलापन है. मुन्नी खुद को झंडु बाम बताती है और दूसरी ओर शीला कहती है कि उसे कौन छुएगा, इसका फैसला वह खुद करेगी.''

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नौटंकी जैसी परंपरागत शैलियों के सांचे ढांचे में उतरकर ये गाने एक मजाहिया रंगत भी अख्तियार कर लेते हैं. जैसा कि मुन्नी बदनाम हुई में देखने को मिला. फिल्म अध्येता रैशेल डायर कहते हैं, ''इस प्रक्रिया में सारी प्रस्तुति बहुत ही शोख और मजेदार हो जाती है, जिसे हम ब्रिटेन वाले मसालेदार और अश्लील कहते हैं. पर यह उत्तेजक और बेशर्मी भरा नहीं होता.''

अभिनेत्रियों के लिए तो यह कुछ कुछ व्यक्तिगत और कुछ कुछ विज्ञापन जैसा मामला हो जाता है. कैफ के लिए शीला की जवानी  एक सुनहरा मौका था, खुद को किसी म्युजिक वीडियो में रिहाना या शकीरा की नृत्य शैली में उतारे जाने का. वे कहती हैं, ''मुझे नाचना पसंद है. हमारे सिनेमा का सबसे अहम हिस्सा है ये.'' इसीलिए बज्‍मी जैसे निर्देशक भी, जो नजाकत के लिए तो नहीं ही जाने जाते हैं, बेहतर सेटिंग पर काफी वक्त और ऊर्जा खर्च कर रहे हैं.{mospagebreak}

रजिया गुंडों में फंस गई को फिल्मिस्तान स्टुडियोज के एक सेट पर फिल्माने में उन्होंने पूरे पांच दिन लगाए. उन्हें कॉस्ट्‌यूम बदलवानी पड़ी (''मल्लिका ने पहले जो पसंद की थी वह दिखती तो बिंदास थी पर परिवार के दर्शकों के लिहाज से  ठीक नहीं थी'') और संगीत पर खासा काम करना पड़ा (''मैंने मल्लिका से कहा कि पहले प्रीतम का गाना सुनो. उन्हें पसंद आ गया तब हम आगे बढ़े'').

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वे इसे बेहद अहम बताते हैं ''क्योंकि अब फिल्म बनाना ही काफी नहीं है. इसका आपको अच्छी तरह से प्रचार भी करना होता है.''

और तेजी से चर्चा में आने के लिए अंग प्रदर्शन से बेहतर भला क्या हो सकता है. मिलन लुथरिया से ही पूछ लीजिए. वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई का यह निर्देशक अब विद्या बालन को लेकर डर्टी पिक्चर बना रहा है, जो सिल्क स्मिता की जिंदगी पर आधारित है. इसमें छह आइटम सांग हैं. सभी में विद्या नाचेंगी, जिसके लिए वे छह हफ्ते का अभ्यास करने वाली हैं और इसकी शुरुआत होगी मार्च के अंत में.लुथरिया आइटम सांग के शौकीन हैं.

उन्हीं के शब्दों में, ''हिंदी फिल्मों की यह क्लासिक डिश है. यह अमूमन उत्तरार्ध के जोखिम भरे हिस्से में आती है, जब एक्शन गहराने लगता है. और आइटम सांग तो शुरू से ही हमारी फिल्मों का हिस्सा रहे हैं.'' पर पहली शर्त यह है कि फिल्म अच्छी हो. डायर के शब्दों में, कजरारे और मुन्नी इसकी मिसाल हैं कि उन्होंने लोगों की रुचि जगाई और उनकी फिल्में उम्मीदों पर खरी उतरीं.{mospagebreak}

आइटम सांग में अब केवल जांघों और वक्ष का प्रदर्शन भर नहीं होता. सात खून माफ के डार्लिंग में प्रियंका चोपड़ा ने साड़ी पहनकर भारी आवाज में अपनी आजादी का ऐलान किया. इसी तरह तनु वेड्‌स मनु में कंगना रनौत साड़ी और ब्लाउज पहनकर जुगनी वाला आइटम सांग गाती हैं.

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पर ये गाने सबसे कारगर उस वक्त होते हैं जब वे फिल्म के मि.जाज के एकदम माकूल बैठें. मुन्नी दबंग की ही तरह मजाहिया है. सिप्पी ने दम मारो दम को गोवा के संगठित ड्रग कारोबार के गंदले मि.जाज के माफिक ही रखा है. वे कहते हैं, ''अब सॉफ्ट ड्रग और फूलपत्ती वाले दिनगए.''

और फिल्में भी अब चूंकि एनआरआइ डिजाइनर रोमांस वाली नहीं रहीं, जहां ऐसे गानों को फिट करना मुश्किल होता था, इसलिए अब निर्देशकों के लिए आइटम सांग के हिसाब से जरूरी स्थितियां पैदा करना आसान हो गया है.

कोरियोग्राफर बॉस्को मार्टिस कहते हैं कि चर्चा और प्रचार फिल्मों की खुराक है. और हीरोइनों को ऐसे गाने चाहिए जिसे लेकर वे दुनिया भर का दौरा कर सकें, पुरस्कार समारोहों और वीआइपी शादियों में जिसे पेश कर सकें. पांचों उंगलियां घी में.

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