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कश्मीर की नई पीढ़ी सिनेमा से दूर, मूवी के लिए 300 KM करनी पड़ती है यात्रा

कश्मीर में कई सालों से फिल्में दिखाने पर संकट है. आतंकियों के डर की वजह से घाटी के लोगों के पास मनोरंजन का ये माध्यम कोसों दूर है.

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पैलेडियम सिनेमा (इंडिया टुडे आर्काइव)
पैलेडियम सिनेमा (इंडिया टुडे आर्काइव)

कश्मीर में सिनेमाघरों पर कई सालों से संकट है. 90 के दशक की शुरुआत के साथ आतंकियों के विरोध की वजह से यहां के लोग फिल्मों से दूर हैं. ये आश्चर्यजनक है कि मॉडर्न इंडिया और डिजिटाइजेशन के युग में कश्मीर के बहुत से लोगों को थियेटर और सिनेमा की ABCD तक नहीं पता है. मई 2010 में आतंकियों ने घाटी में चलने वाले इकलौते नीलम सिनेमा को भी बंद कर दिया था. मालूम हो कि जनवरी 1990 में कश्मीर के 15 सिनेमाहॉल को बंद कर दिया गया था. घाटी के लोगों को फिल्म देखने के लिए 300 किमी दूर ट्रैवल कर जम्मू आना पड़ता है.

क्यों खतरे में आया सिनेमा?

सिनेमा पर मंडराए संकट की इकलौती वजह आतंकी हैं. वे फिल्म जगत को गैर इस्लामिक मानते हैं. आतंकवादी सिनेमाहॉल मालिकों को डराते-धमकाते हैं. उनके ना मानने पर सिनेमाहॉल पर हमला करवाते हैं. घाटी में दहशत का माहौल बनाया है. इसलिए कोई भी अपनी जान को संकट में नहीं डालना चाहता. कश्मीर के सिनेमाहॉल मालिक आतंकी फरमान की खिलाफत उठाने का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं.

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1990 में जब 15 हॉल्स को बंद करा दिया गया तो लोगों ने सोचा कि कुछ दिन बाद हालात स्थिर हो जाएंगे. ज्यादातर सिनेमाहॉल सुरक्षाबलों के कैंप में तब्दील हो गए थे, कुछ अस्पतालों में और कहीं पर तो बिजनेस के उद्देश्य से बिल्डिंग्स बनाई गईं. 1996 में नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार ने सिनेमाहॉल मालिकों को सुरक्षा और थियेटर की बहाली का आश्वासन दिया. 3 सिनेमाहॉल्स को खोला गया. जिनमें नीलम, रीगल और ब्रॉडवे सिनेमा शामिल थे. अपने फतवे की खिलाफत देख आतंकियों ने 1999 में रीगल सिनेमा पर बम-बारुदों से हमला किया. जिसमें 1 शख्स की मौत, 17 घायल हुए. फिर रीगल को बंद कर दिया गया.

2005 में नीलम सिनेमाहॉल में आतंकियों के साथ एनकाउंटर हुआ. उस वक्त 70 लोग आमिर की फिल्म मंगल पांडे देख रहे थे. पुलिस और स्टाफ ने लोगों की जान बचाई. इसके बाद 2010 में नीलम को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया.

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एक युवा फिल्ममेकर का सवाल है कि जब पाकिस्तान में बॉलीवुड फिल्में दिखाई जाती हैं तो क्यों कश्मीर में दहशत का माहौल है? यहां तक कि मुस्लिम देश सऊदी अरब में भी 37 साल बाद थियेटर से बैन हटा दिया गया है. वैसे निकटतम भविष्य में सिनेमाहॉल की बहाली मुश्किल ही नजर आती है. राजनीतिक पार्टियां भारत-कश्मीर मुद्दे पर सियासत करने में व्यस्त हैं. घाटी में आतंकियों की दहशत के सामने राजनेता भी पस्त नजर आते हैं. ऐसे में कश्मीर में फिल्मों को लेकर कब हालात सामान्य होंगे कहना मुश्किल है.

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