फिल्मकार-अभिनेता नागेश कुकुनूर की हालिया प्रदर्शित फिल्म 'लक्ष्मी' ने समीक्षकों से तारीफें पाई हैं. फिल्म मानव तस्करी और बाल देह व्यापार के बारे में है. कुकुनूर कहते हैं कि वह फिल्मों में दर्शकों को एक विकल्प देने की जद्दोजहद करते हैं क्योंकि दोहराव से दर्शक ऊब सकते हैं. कुकुनूर 'रॉकफोर्ड', 'इकबाल', 'डोर' और 'मोड़' जैसी अलग-अगल फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं.
उन्होंने एनआरआई ऑफ द ईयर पुरस्कार समारोह के दौरान कहा, 'मेरा हमेशा ही विचार रहा है कि दर्शकों को विकल्प देने चाहिए. हम अगर एक जैसी फिल्में बनाते हैं तो दर्शक आगे नहीं बढ़ेंगे और अलग-अलग चीजों का अनुभव नहीं पाएंगे.' फिल्मकार ने 'लक्ष्मी' को सिनेमाघरों तक लाने में कड़ी मेहनत की है. वह अब आराम करना चाहते हैं.
कुकुनूर ने कहा, 'दर्शकों तक पहुंचना बहुत कठिन है खासकर लघु फिल्मों के लिए, जैसे लक्ष्मी को एक साल लग गया. मैं बहुत थक गया हूं. अब कुछ सप्ताह का ब्रेक लूंगा और तब अपनी अगली फिल्म के बारे में सोचूंगा. 'लक्ष्मी' को जनवरी में पाम स्प्रिंग्स अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव में सर्वश्रेष्ठ कहानी के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म दर्शक पुरस्कार के सम्मान से नवाजा गया था.
यहां के लालबत्ती इलाके में यौनकर्मियों के लिए फिल्मकार नागेश कुकुनूर की 'लक्ष्मी' फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग रखी गई. इस दौरान गुस्साए यौनकर्मियों के एक समूह ने फिल्मकार से बात की, जो जानना चाहता था कि फिल्म में धूर्त दलाल की भूमिका किसने निभाई है. यौनकर्मियों ने स्क्रीनिंग के बाद कुकुनूर से कहा, 'अगर वह मिल जाए तो हम उसे ऐसा सबक सिखाएंगे कि नानी याद आ जाएगी.'
फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग ग्रांट रोड स्थित अलंकार सिनेमाघर में रखी गई थी. जब यौनकर्मियों को पता चला कि दुष्ट दलाल की भूमिका और किसी ने नहीं बल्कि खुद कुकुनूर ने निभाई है तो उन्होंने अपना गुस्सा उन पर उतार दिया. गुस्साए यौनकर्मियों ने उन पर तब तक अपशब्दों की बौछार की जब तक वह वहां से चले नहीं गए.
अपने इस अनुभव पर हंसते हुए फिल्म के सह-निर्माता इलाही हेपतुल्ला ने कहा, 'फिल्म की यह स्क्रीनिंग सिर्फ कमाठीपुरा (मुंबई के रेड लाइट जिले) के यौनकर्मियों के लिए थी. माहौल भावुक और जोशपूर्ण था. पर्दे पर जो कुछ दिखाया गया, महिलाओं की उससे पूरी सहानुभूति थी. उन्हें लगा कि पर्दे पर उनकी और दलाल की कहानी चला दी गई है. दलाल की भूमिका हमारे निर्देशक नागेश ने निभाई है, नागेश ने यौनकर्मियों की जिंदगी में जो बुरा था उसका प्रतिनिधित्व किया.' कुकु़नूर की फिल्म को पूरे भारतभर की वेश्याओं को दिखाने की योजना है.
हेपतुल्लाह ने कहा, 'हमें लगता है कि 'लक्ष्मी' एक फिल्म से परे यौनकर्मियों की जिंदगी के अनुरूप है. हम देश के सभी रेड लाइट क्षेत्रों में फिल्म दिखाना चाहते हैं. लेकिन सबसे पहले हम इसे ग्रांट रोड के अलंकार सिनेमा में रिलीज कराने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि सभी यौनकर्मी इसे देख पाएं.'