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मनोरंजन

चाहे डायन कहो या चुड़ैल, 'क्वीन' तो क्वीन है

चाहे डायन कहो या चुड़ैल, 'क्वीन' तो क्वीन है
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एक क्वीन का व्यक्तित्व चाहे उसे एक दायरे में बांधकर रखता हो लेकि‍न बॉलीवुड के पास एक ऐसी क्वीन है जो हर बार अपने मन की सुनती है और वही करती है जो उसका दिल करे. फि‍र चाहे पूरी दुनिया ही उसके खिलाफ क्यों ना हो जाए. और यह क्वीन कोई और नहीं बल्कि 'बॉलीवुड क्वीन' कही जाने वाली एक्ट्रेस कंगना रनोट है. जिन्होंने अपने पर हाल ही में लगाए गए अरोपों पर मुंह तोड़ और तर्कसंगत जवाब दिए हैं. पेश है इंटरव्यू में दिए गए कंगना के ऐसे जवाब जिन्हें आप भी बार-बार पढ़ना चाहेंगे:
चाहे डायन कहो या चुड़ैल, 'क्वीन' तो क्वीन है
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डायन और चुड़ैल कहा जाना:
अगर कोई मुझे डायन कह रहा है तो मुझे कोई शर्म महसूस नहीं हो रही. बल्कि इससे मुझे हमारी सोसायटी की मानसिकता का पता चलता है. क्योंकि महिलाओं को ऐसे ही नामों के आरोप लगाकर दबाया जाता रहा है. यह सब नाम महिलाओं को खत्म करने के लिए एक हथि‍यार का जरिया हैं और यह सदियों से होता आ रहा है. इसलिए कोई डायन कहे, होर कहे यह सब मेरा आत्मविश्वास नहीं तोड़ सकतीं.
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जब तक गलती नहीं तब तक नो सॉरी:
मुझ पर जब कई तरह के आरोप लगाए जाते हैं तो मुझे दुख होता है. मैं भी रुक कर सोचती हूं तो मुझे भी झटका लगता है. लेकिन मैं तब तक सॉरी नहीं बोल सकती, जब तक मैंने कुछ गलत नहीं किया हो. मैं अपनी गलतियों को मानने वाली लड़कियों में से हूं.
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  • 4/10
रिलेशनशि‍प्स को स्वीकारने पर:
मुझे किसी बात की शर्म नहीं है और मेरे पास छिपाने को भी कुछ नहीं है. मुझे मुंहफट कहा जा सकता है लेकिन मैं सब साफ बोलने वालों में से हूं.
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मेरा खून कोई कॉकटेल नहीं:
देश में मेरे पीरियड्स को लेकर बात हो रही है. इसे खाने में मिलाने वाली चीज कहा जा रहा है. क्या मेरे पीरियड कोई कॉकटेल या एपेटाइजर हैं? हमेशा से ऐसा होता आया है जब महि‍लाओं से जुड़ी चीजों को चुड़ैल-डायन जैसे नामों से जोड़कर पेश किया जाता है लेकिन क्यों फिर आजतक आदमी के शरीर से निकलने वाले फ्ल्यूड को कभी इस तरह की जादू टोने वाली चीजों ने नहीं जोड़ा गया.
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अपने माता पिता की ना मानकर अपनी मानी:
अकसर कहा जाता है कि मां बाप की सुननी चाहिए लेकिन मैंने नहीं सुनी. शायद वो अपनी सोच के दायरे तक सही हों लेकिन मेरी अपनी सोच थी और मैं उनके खि‍लाफ गई. पापा ने साथ नहीं दिया तो एक तरीके से मेरे लिए सही ही रहा. इससे कुछ कर दिखाने का जज्बा बढ़ा और अपनी सोच को सही साबित करने का मौका भी मिला.
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  • 7/10
खुद को मेल एक्टर्स से कम नहीं मानतीं:
मेल एक्टर्स और फीमेल एक्टर्स में अंतर क्यूं. जितनी मेहनत मेल एक्टर्स करते हैं उतनी ही फीमेल एक्टर्स भी करती हैं. अवॉर्ड की ही बात ले लें, बेस्ट एक्टर और बेस्ट एक्ट्रेस को अवॉर्ड दिया जाता है. लेकिन यह बात बेस्ट डायरेक्टर्स के अवॉर्ड पर लागू क्यों नहीं होती, क्योंकि डायरेक्टर्स तो मेल भी होते हैं और फीमेल भी.
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बॉलीवुड द्वारा कंगना को अपनाए जाने पर:
बॉलीवुड मुझे अपनाए या ना अपनाए मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. मैंने तो बॉलीवुड को अपनाया है ना. और रही बात बॉलीवुड का मेरे लिए स्टैंड लेने की तो कोई मेरे लिए क्यों स्टैंड ले. मैं खुद अपने लिए स्टैंड ले सकती हूं. लेकिन मैं सोशल मीडिया और बाकी लोगों का मेरा साथ देने के लिए शुक्रिया कहूंगी.
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शूटिंग सेट का हीरो:
जब मुझे वाकई एक सुपर ब्रेक की जरूरत थी, तब मुझे खान सुपरस्टार्स के साथ काम करने के ऑफर नहीं मिले. और अब जब ऑफर मिलते हैं तो मैं अपने हिसाब से फिल्में करना चाहती हूं. बस कुछ सीन के लिए किसी फिल्म को करने का क्या तुक है. अब मैं अपने शूटिंग सेट का हीरो होती हूं.
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  • 10/10
अध्ययन के कंगना पर लगाए गए आरोपों पर:
मुझे स्ट्रग्लर्स से पूरी सहानुभूति है. कुछ लोग होते हैं जो खुद की जिंदगी में कुछ नहीं कर पाते और उसका गुस्सा दूसरों को नुकसान पहुंचाकर निकालना चाहते हैं.