scorecardresearch
 
Advertisement
मनोरंजन

काल्पनिक, पर कमाल की हैं बॉलीवुड में राजनीति पर बनी ये फ़िल्में

काल्पनिक, पर कमाल की हैं बॉलीवुड में राजनीति पर बनी ये फ़िल्में
  • 1/11
देशभर में लोकसभा चुनाव 2019 की गहमा गहमी है. गली, चौराहे नुक्कड़ों और लोगों के घरों में राजनीति चर्चा में है. राजनीति हमेशा से बॉलीवुड की फिल्मों का एक केंद्र रहा है. दर्जनों फ़िल्में हैं जिसमें काल्पनिक राजनीतिक किरदारों को रखा गया. कभी पॉजिटिव तो कभी निगेटिव. 2019 में तो बाकायदा राजनीति के असली किरदारों को लेकर भी फिल्मों का निर्माण शुरू हो गया है. द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर और ठाकरे के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के बायोपिक का निर्माण चर्चा में है.

वैसे बॉलीवुड में तमाम फ़िल्में ऐसी हैं जिनकी काल्पनिक कहानियां पूरी पूरी तरह से राजनीति और सत्ता के अंदरूनी खेल पर आधारित हैं. अपने समय में दर्शकों ने इन फिल्मों को काफी पसंद किया था. लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्योहार करीब है, आइए जानते हैं ऐसी ही चुनिंदा बॉलीवुड फिल्मों के बारे में जो पूरी तरह राजनीति पर आधारित हैं...

(फोटो: नायक फिल्म का टीवी ग्रैब)
काल्पनिक, पर कमाल की हैं बॉलीवुड में राजनीति पर बनी ये फ़िल्में
  • 2/11
नायक

राजनीति की बात हो और उसमें नायक का जिक्र ना हो, ये हो ही नहीं सकता. नायक को बॉलीवुड की बेस्ट पॉलिटिकल फिल्मों में शुमार किया जाता है. फिल्म में दिखाया गया है कि पत्रकार शिवाजी (अनिल कपूर) कद्दावर नेता बलराज (अमरीश पुरी) का इंटरव्यू करता है. लेकिन सवालों में अपने को घिरा देख बलराज, शिवाजी को एक दिन मुख्यमंत्री बनने का मौका देता है. अब 24 घंटों के लिए बना मुख्यमंत्री शिवाजी पूरे शहर का नक्शा बदल देता है. वो सभी भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसता है रामराज्य स्थापित करने की कोशिश. इस मुहिम में उस पर कई जानलेवा हमले किए जाते हैं, लेकिन वो एक सच्चे नायक की तरह सभी मुसीबतों का सामना करता है और अपने राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाता है.
काल्पनिक, पर कमाल की हैं बॉलीवुड में राजनीति पर बनी ये फ़िल्में
  • 3/11
राजनीति-

प्रकाश झा निर्देशित राजनीति, उस अंधेरे गलियारे से रुबरु करवाती है, जहां सत्ता हासिल करने के लिए जायज नाजायज सभी हथकंडे आजमाए जाते हैं. फिल्म में सत्ता के लिए लड़ाई, परिवारवाद, वंशवाद के मुद्दे को मुखर होके उठाया गया है. प्रकाश झा ने ये फिल्म महाभारत के सिद्धातों से प्रेरित होकर बनाई है. फिल्म में दिखाया गया है कि किस प्रकार से बड़े नेता चंद्र प्रताप की हत्या कर दी जाती है. इसके चलते चंद्र प्रताप के छोटे बेटे समर ( रणबीर कपूर) को राजनीति में आना पड़ता है. राजनीति में आते ही समर को अहसास हो जाता कि ये कोई आसान काम नहीं है और एक ऐसा दलदल है जिससे बाहर नहीं निकला जा सकता.
Advertisement
काल्पनिक, पर कमाल की हैं बॉलीवुड में राजनीति पर बनी ये फ़िल्में
  • 4/11
पीपली लाइव
बॉलीवुड में राजनीति पर सिर्फ सीरियस फिल्में नहीं बनाई गई है. व्यंग्य के माध्यम से भी देश की राजनीति की परते खोली गई है. ऐसी ही एक फिल्म है पीपली लाइव, जो अगर आपने नहीं देखी है तो जरूर देंखे. फिल्म में किसानों की आत्महत्या और सरकार के खोखले वादों की पोल खोली गई है. सरकार ने एक नई स्कीम निकाली है जिसमें वो उन किसान परिवारों को पैसे देंगे जिन्होंने आत्महत्या कर ली है. ये खबर सुन बुधिया अपने भाई नत्था को आत्महत्या करने के लिए उकसाता है. ये न्यूज आग की तरह फैलती है और पूरे देश के लिए एक चर्चा का विषय बन जाती है.
काल्पनिक, पर कमाल की हैं बॉलीवुड में राजनीति पर बनी ये फ़िल्में
  • 5/11
परिस्थितियों को बिगड़ता देख सरकार नत्था के घर टीवी और हैंडपंप लगवा देती है. लेकिन फिर एक दिन नत्था की एक एक्सीडेंट में मौत हो जाती है. उसकी मौत होते ही सरकार उसके परिवार से सभी सुविधाएं वापस ले लेती है. उनके अनुसार नत्था की मौत एक्सीडेंट के कारण हुई है न कि आत्महत्या की वजह से.
काल्पनिक, पर कमाल की हैं बॉलीवुड में राजनीति पर बनी ये फ़िल्में
  • 6/11
सरकार-

रामगोपाल वर्मा की सरकार इस बात पर मुहर लगाती है राजनीतिक दल और नेता सत्ता की कुर्सी पर स्थापित होने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. फिल्म मुबंई के प्रभावशाली नेता सुभाष नागरे (अमिताभ बच्चन) के बारे में है. पूरी मुबंई में उसका सिक्का चलता है और सब उसे सरकार कहकर पुकारते हैं. लेकिन क्योंकि राजनीति में कोई भी किसी का सगा नहीं होता, इसलिए सुभाष नागरे का बेटा विष्णु अपने पिता को मारने के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट किलर हॉयर करता है. यहां से शुरू होता है सत्ता के लिए कुछ भी कर गुजरने का सिलसिला और बदलते हैं कई समीकरण. वैसे बता दें कि इस फिल्म की सफलता को देखते हुए इसके 2 पार्ट और बनाए गए है.
काल्पनिक, पर कमाल की हैं बॉलीवुड में राजनीति पर बनी ये फ़िल्में
  • 7/11
सत्ता-

मधुर भंडारकर की फिल्म 'सत्ता' में वो सब दिखाया गया है जो भारतीय राजनीति का एक अहम हिस्सा है. फिल्म में नेता, उद्योगपति और अडंरवर्ल्ड के बीच में पनपने वाले रिश्तों पर रोशनी डाली गई है. फिल्म में दिखाया गया है अनुराधा ( रवीना टंडन) एक ऐसे इंसान से शादी करती हैं जो दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने का इच्छुक है. लेकिन शादी के बाद उसका पति उस पर अत्याचार करता है और शराब के नशे में डूबा रहता है. लेकिन फिर उसके पति पर मर्डर का आरोप लगता है और वो जेल चला जाता है. इसके चलते अनुराधा राजनीति में कदम रखती हैं और चुनाव भी लड़ती है. तब उसको एहसास होता है कि राजनीति एक कला है जहां टिके रहने के लिए कई हथकंडे अपनाने पड़ते हैं.
काल्पनिक, पर कमाल की हैं बॉलीवुड में राजनीति पर बनी ये फ़िल्में
  • 8/11
आंधी-

1975 में बनी ये फिल्म विवादों के चलते दो साल तक रिलीज ही नहीं हो पाई थी. आंधी, इंदिरा गांधी के जीवन पर आधारित है. क्योंकि उस समय देश में आपातकाल लगा था, इसलिए फिल्म को रिलीज नहीं होने दिया गया. लेकिन जब 1977 में इंदिरा गांधी की सरकार गिर गई तब नई सरकार ने फिल्म को हरी झंडी दिखाई. ऐसा कहा जाता है ये फिल्म पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके पति के रिश्तों से प्रेरित होकर बनाई गई थी.
काल्पनिक, पर कमाल की हैं बॉलीवुड में राजनीति पर बनी ये फ़िल्में
  • 9/11
खैर फिल्म में दिखाया गया है कि आरती और जे.के एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं. शादी होने के बाद दोनों के रिश्तों में खटास आ जाती है. वो तलाक ले लेते हैं. मगर काफी साल बाद जब दोनों फिर मिलते हैं, तब आरती जो अब एक बड़ी राजनेता बन चुकी है, जे.के से दूरी बनाने की कोशिश करती है, क्योंकि उसको लगता है अपने तलाकशुदा पति के साथ रहने से उसकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंच सकता है.
Advertisement
काल्पनिक, पर कमाल की हैं बॉलीवुड में राजनीति पर बनी ये फ़िल्में
  • 10/11
मैं आजाद हूं-

टीनू आनंद द्वारा निर्देशित  मैं आजाद हूं, एक अलग प्रकार की फिल्म है जिसमें राजनीति और मीडिया के बीच में रिश्ता दिखाया गया है. एक महिला पत्रकार अपनी नौकरी बचाने के लिए आजाद बनकर अखबार में कॉलम लिखना शुरू कर देती है. वो सभी बड़े राजनेताओं के भष्टाचार को उजागर करती है और समाज से जुड़े मुद्दों को उठाती है. वो हमेशा हर कॉलम के नीचे लिख देती है कि आजाद 26 जुलाई को आत्महत्या कर लेगा अगर उसकी मांगे नहीं मानी गईं.
काल्पनिक, पर कमाल की हैं बॉलीवुड में राजनीति पर बनी ये फ़िल्में
  • 11/11
फिर वो महिला एक लड़के को हायर करती है जो नौकरी की तलाश में होता है. वो उसे आजाद की पहचान देती है और पूरी दुनिया से रूबरू करवाती है. इसके बाद आजाद पूरे देश में मशहूर हो जाता है और सभी राजनेता उससे डरने लगते हैं. लेकिन जब उस लड़के को इस सच्चाई का अहसास होता है, तब वो सच्चे मायनो में आजाद बनता है और सभी लोगों को अपने साथ जोड़कर भष्टाचार मुक्त भारत की मुहिम छेड़ता है. फिर 26 जुलाई को तय अनुसार वो आत्महत्या कर लेता है.
Advertisement
Advertisement