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Yeh Meri Family Season-2 Review: गर्मी के सीजन में रिलीज हुआ 'ये मेरी फैमिली' का सीजन-2, दिला देगा ठंडक

अमेजन मिनी पर 'ये मेरी फैमिली' का सीजन 2 आ गया है जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार से. 'ये मेरी फैमिली' के सीजन-1 में तो आपने बचपन वाली गर्मी को फिर से जिया था लेकिन 'ये मेरी फैमिली' का सीजन अब 90 के दशक की ठंड के साथ वापस आया है. तो आइए जानते हैं 'ये मेरी फैमिली सीजन-2' के बारे में.

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फिल्म:कॉमेडी, ड्रामा
2.5/5
  • कलाकार : हेतल गाडा, जूही परमार, राजेश कुमार
  • निर्देशक :समीर सक्सेना

अमेजन मिनी पर 'ये मेरी फैमिली' का सीजन 2 आ गया है जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार से. 'ये मेरी फैमिली' के सीजन-1 में तो आपने बचपन वाली गर्मी को फिर से जिया था लेकिन 'ये मेरी फैमिली' का सीजन अब 90 के दशक की ठंड के साथ वापस आया है. तो आइए जानते हैं 'ये मेरी फैमिली सीजन-2' के बारे में.

लखनऊ से शुरू होती है कहानी

तो कहानी शुरू होती है लखनऊ के अवस्थी निवास से. जहां हर घर की तरह बच्चे आपस में झगड़ते रहते हैं और हर चीज में अपना हक जमाने की कोशिश करते हैं. हालांकि यहां रितिका यानि कि हेतल गाडा, जो 11वी क्लास में पढ़ती है उसे अपना खुद का कमरा चाहिए होता है.

लेकिन उनकी मम्मी जो खुद स्कूल में टीचर हैं वो शायद भूल जाती हैं कि घर वे एक मां है, हमेशा अपने बच्चों को रोकती-टोकती रहती हैं. और इस बार भी वे रितिका को ऋषि यानि कि अपने भाई के साथ कमरा शेयर करने के लिए फोर्स करती हैं. और हर घर की तरह यहां भी पापा यानि कि राजेश कुमार का भी जबाव यही होता है कि मम्मी से पूछो!  

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खास है दादी का किरदार

ये मेरी फैमिली सीजन-1 की तरह ही इसकी कहानी भी मां-बाप और बच्चों के आसपास घूमती रहती है. लेकिन यहां एक और अहम किरदार है जो है दादी. दादी का आना बच्चों को हमेशा उत्साह से भर देता है लेकिन रितिका को पहले तो अच्छा नहीं लगता क्योंकि उसे अपना कमरा ऋषि के साथ-साथ दादी के साथ भी शेयर करना होता है. लेकिन फिर कुछ टाइम बाद रितिका और दादी की दोस्ती हो जाती है.

ठंड की याद दिलाती है कहानी

गर्मी के मौसम में रिलीज हुआ ये मेरी फैमिली का सीजन ठंड लेकर आया है. एक ही रजाई में सोना, रोज-रोज आलू मटर की सब्जी खाना, अलाव जालकर मूंगफली खाना और न्यू ईयर की तैयारियां करना, ये सारी चीजें हमें ठंड की याद दिलाती हैं.

सीरीज की कहानी हमें हमारे बचपन में ले जाकर छोड़ देती है जब हम भी कभी घर में छोटी-छोटी चीजों के लिए जिद किया करते थे. हम सभी ने अपने बचपन में अपने मम्मी-पापा से झगड़े किए होंगे और भाई-बहन तो जैसे हमारे दुश्मन होते थे. 

सीरीज की कहानी भी कुछ इसी दिशा में आगे बढ़ती है जहां रितिका और ऋषि के वजह से PTM में उनकी मम्मी जो खुद उस स्कूल में टीचर हैं, उन्हें सुनना पड़ता है. जिसके बाद से दोनों बच्चों के ऊपर कुछ बढ़ा कर दिखाने का भूत सवार हो जाता है. ऋषि 10 साल का होने के बावजूद हमेशा साइंस के एक्सपेरिमेंट करता रहता है और रितिका मन लगा कर पढ़ाई करती है. लेकिन बाकी बच्चों की तरह वो भी पेपर देखते ही सब कुछ भूल जाती है. 

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सीजन-1 के मुकाबले खरा नहीं उतरा सीजन-2

सीरीज के सेट की बात करें तो या तो सीन घर का होगा या फिर स्कूल का. इन दो जगहों के अलावा किसी और जगह का सेट आपको देखने को नहीं मिलेगा. ये मेरी फैमिली का सीजन-2, सीजन-1 से कई ज्यादा अलग है. बतौर दर्शक सबसे ज्यादा शॉकिंग सीजन-2 की कास्ट है. जो अपने किरदार के साथ ज्यादा न्याय नहीं कर पाई. कई लोग सीजन-2 में विशेष बंसल जैसे एक्टर की आस लगाए बैठे थे लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हुआ.

पूरी सीरीज में जूही परमार यानि की बच्चों की मां हमेशा NO Means NO के मोड में ही रहती है. एक-दो जगह ही ऐसी होंगी जहां उन्होंने किसी चीज के लिए हां किया होगा. पिता के किरदार में राजेश कुमार भी सीधे-साधे पिता बनकर रह जाते हैं. सीरीज में अगर थोड़ी बहुत कोई किरदार अगर जान डालता है तो वो है बच्चों और दादी की दोस्ती. अगर ओवरऑल स्टोरी को देखें तो कई सारी ऐसी चीजें हैं जो और भी बेहतर हो सकती थीं.

 

 

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