प्राइम वीडियो एक दिलचस्प और रहस्यमयी दुनिया को पर्दे पर लेकर आ रहा है. एक्टर विजय वर्मा की नई सीरीज 'मटका किंग' 17 अप्रैल को रिलीज होने जा रही है. इस सीरीज में सट्टेबाजी की उस अंधेरी दुनिया, उसके उतार-चढ़ाव, पावर, पैसे और खतरनाक खेल को फिल्मी अंदाज में दिखाया जाएगा.
सट्टे का असली बादशाह कौन?
विजय वर्मा इस सीरीज में एक ऐसे किरदार में नजर आएंगे, जो आम आदमी से उठकर सट्टे की दुनिया का बड़ा नाम बनता है. ट्रेलर और प्रमोशन के बाद से ही इस सीरीज को लेकर जबरदस्त चर्चा है और दर्शक इसके रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. दमदार दिखने वाली इस सीरीज में विजय के साथ कृतिका कामरा, साई तम्हानकर और गुलशन ग्रोवर भी होंगे.
मुंबई की अंडरवर्ल्ड दुनिया, सट्टेबाजी का खेल और करोड़ों का दांव… इन सबके बीच एक नाम ऐसा उभरा जिसने इस खेल को पहचान दी- रतन खत्री, जिन्हें 'मटका किंग' कहा जाता था.
सिंध से ताल्लुक रखने वाले रतन खत्री विभाजन के बाद भारत आए और मुंबई (तब बॉम्बे) में बस गए. 1960 के दशक में उन्होंने 'मटका' यानी सट्टे को एक संगठित रूप दिया. देखते ही देखते ये छोटा सा जुआ बड़े नेटवर्क में बदल गया और 70 के दशक तक रतन खत्री इस धंधे के सबसे बड़े सरगना बन चुके थे. हर दिन लाखों रुपये का खेल होता था, और इसी वजह से उन्हें 'बॉम्बे का मटका किंग' कहा जाने लगा.
जेल जाने पर लगा ब्रेक!
हालांकि, मटका की शुरुआत का श्रेय कल्याणजी भगत को भी दिया जाता है, जिन्हें इस कारोबार का पहला किंग माना जाता है.लेकिन इस खेल को पूरे देश में फैलाने और इसे एक बड़े उद्योग का रूप देने का काम रतन खत्री ने किया. उनका नेटवर्क इतना मजबूत था कि देशभर में लोग इस सट्टेबाजी से जुड़ गए.
1975 में जब देश में आपातकाल लगा, तो रतन खत्री को भी जेल जाना पड़ा. इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने इस कारोबार से दूरी बना ली और 90 के दशक में पूरी तरह संन्यास ले लिया. साल 2020 में उनका निधन हो गया, लेकिन 'मटका किंग' का नाम आज भी उसी दबदबे के साथ लिया जाता है.
दावा है कि 'मटका किंग' में इसी कहानी को विजय वर्मा नए तरीके से पेश करने जा रहे हैं. ये सिर्फ एक सीरीज नहीं, बल्कि उस दौर की कहानी है जब किस्मत नंबरों में लिखी जाती थी और एक सही दांव इंसान को रातोंरात बादशाह बना देता था.